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हरियाणा में रजिस्ट्रियों में भ्रष्टचार...आरोपियों की कुंडली हो रही तैयार, अब भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं
Tue, 04 Aug 2020 10:54 AM IST
खुशबू गोयल
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 04 Aug 2020 10:54 AM IST
सार
- गलत रजिस्ट्रियां कराकर बिल्डर्स, कॉलोनाइजर्स ने काटी अवैध कालोनियां
- पूरे प्रदेश से शिकायतें मिलने पर मुख्यमंत्री सख्त, हर तहसील में जांच तेज
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विस्तार
हरियाणा में अब भ्रष्ट अफसरों की खैर नहीं है। सवा तीन माह की रजिस्ट्रियों में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद राजस्व व अन्य विभागों के दागी अफसरों की कुंडली तैयार की जा रही है। गलत रजिस्ट्रियों में शामिल होने व भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के कारण इन पर आने वाले दिनों में गाज गिरना तय है। दागी अफसरों को सरकार प्री-मेच्योर रिटायरमेंट भी दे सकती है।
गलत रजिस्ट्रियां कराकर बिल्डर्स व कॉलोनाइजर्स ने सबसे अधिक अवैध कालोनियां गुरुग्राम, रेवाड़ी, फरीदाबाद, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, पानीपत, करनाल व पंचकूला जिलों में काटी हैं। इसकी शिकायतें सीधे सीएम मनोहर लाल के पास पहुंची हैं। इन शहरों के अलावा अन्य जिन शहरों में भी अवैध कालोनियां काटने का काम चल रहा है, वहां से भी शिकायतें आ रही हैं।
इसे देखते हुए सीएम ने अवैध कालोनियों में निर्माण पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। बिल्डर्स व कॉलोनाइजर्स ने सबसे अधिक अवैध कालोनियां उन शहरों में काटी या काट रहे हैं, जहां जमीन के भाव आसमान पर हैं। इन कालोनियों की जमीन की रजिस्ट्री कृषि भूमि के नाम पर पर हुई है। कुछ की रजिस्ट्री के लिए एनओसी ली गई व कुछ के लिए जरूरत ही नहीं समझी।
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एनओसी सही हैं या गलत, इसकी भी जांच तहसीलों में नहीं हुई। भ्रष्टाचार का खुलासा होने पर अब गलत एनओसी, डीड व रजिस्ट्री करने में शामिल असफरों व कर्मचारियों की सूची तैयार हो रही है, जिसे सीधा सीएम को सौंपा जाएगा। इस समय हर तहसील में हुई गलत रजिस्ट्रियों की जांच तेजी से चल रही है।
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गलत रजिस्ट्रियां कराकर बिल्डर्स व कॉलोनाइजर्स ने सबसे अधिक अवैध कालोनियां गुरुग्राम, रेवाड़ी, फरीदाबाद, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, पानीपत, करनाल व पंचकूला जिलों में काटी हैं। इसकी शिकायतें सीधे सीएम मनोहर लाल के पास पहुंची हैं। इन शहरों के अलावा अन्य जिन शहरों में भी अवैध कालोनियां काटने का काम चल रहा है, वहां से भी शिकायतें आ रही हैं।
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इसे देखते हुए सीएम ने अवैध कालोनियों में निर्माण पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। बिल्डर्स व कॉलोनाइजर्स ने सबसे अधिक अवैध कालोनियां उन शहरों में काटी या काट रहे हैं, जहां जमीन के भाव आसमान पर हैं। इन कालोनियों की जमीन की रजिस्ट्री कृषि भूमि के नाम पर पर हुई है। कुछ की रजिस्ट्री के लिए एनओसी ली गई व कुछ के लिए जरूरत ही नहीं समझी।
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एनओसी सही हैं या गलत, इसकी भी जांच तहसीलों में नहीं हुई। भ्रष्टाचार का खुलासा होने पर अब गलत एनओसी, डीड व रजिस्ट्री करने में शामिल असफरों व कर्मचारियों की सूची तैयार हो रही है, जिसे सीधा सीएम को सौंपा जाएगा। इस समय हर तहसील में हुई गलत रजिस्ट्रियों की जांच तेजी से चल रही है।
राजस्व हानि नहीं, योजनाबद्ध विकास में दिक्कत: मुख्यमंत्री
गलत रजिस्ट्रियों से सरकार को राजस्व में कोई हानि नहीं हुई है। यह सीएम मनोहर लाल मानते हैं। उनका कहना है कि नियमानुसार रजिस्ट्री न होने से योजनाबद्ध विकास में दिक्कत आती है। अवैध निर्माण किसी सूरत में नहीं होने देंगे। लोगों के सुंदर भविष्य के लिए अवैध कालोनियां नहीं बसने देंगे। अवैध निर्माण हटाने पर गरीबों की वर्षों की जमा पूंजी भी जमींदोज हो जाती है।
चूंकि, घर का सपना साकार करने के लिए उन्होंने सारी राशि अवैध कालोनी में प्लाट खरीदने व घर बनाने पर लगा दी होती है। सीएम का कहना है कि 90 से 95 फीसदी अफसर, कर्मचारी पिछली सरकारों के समय भर्ती हुए हैं। उनमें से कुछेक के मुंह में भ्रष्टाचार रूपी खून लगा हुआ है जो छूट नहीं रहा।
भ्रष्टाचार चाहे पिछली सरकार में हुआ हो या इसमें, उसमें संलिप्त बड़े से बड़े अफसर को भी बख्शा नहीं जाएगा। उनकी सरकार सिस्टम व व्यवस्थाओं की कमियों को दुरुस्त कर रही है। घोटाले तो पिछली सरकारों में आसमान से पाताल तक हुए हैं।
अब ये कदम उठाने जा रही सरकार
. योजनाएं बदलने के साथ जैसे ही भूमि का लैंड यूज बदलेगा, उसे तुरंत ऑनलाइन किया जाएगा
. फर्जी दस्तावेजों से जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह बंद होंगी
. तय समय में अगर टीसीपी, एचएसआईआईडीसी, शहरी निकाय, एचएसवीपी, राजस्व, पुलिस व विधि विभाग ऑनलाइन सिस्टम तैयार नहीं कर पाते हैं तो उन्हें सिस्टम विकसित होने तक मैन्युल तरीके से प्रमाण पत्र या एनओसी देने की मोहलत दी जाएगी। उस पर पूरी नजर रखेंगे।
चूंकि, घर का सपना साकार करने के लिए उन्होंने सारी राशि अवैध कालोनी में प्लाट खरीदने व घर बनाने पर लगा दी होती है। सीएम का कहना है कि 90 से 95 फीसदी अफसर, कर्मचारी पिछली सरकारों के समय भर्ती हुए हैं। उनमें से कुछेक के मुंह में भ्रष्टाचार रूपी खून लगा हुआ है जो छूट नहीं रहा।
भ्रष्टाचार चाहे पिछली सरकार में हुआ हो या इसमें, उसमें संलिप्त बड़े से बड़े अफसर को भी बख्शा नहीं जाएगा। उनकी सरकार सिस्टम व व्यवस्थाओं की कमियों को दुरुस्त कर रही है। घोटाले तो पिछली सरकारों में आसमान से पाताल तक हुए हैं।
अब ये कदम उठाने जा रही सरकार
. योजनाएं बदलने के साथ जैसे ही भूमि का लैंड यूज बदलेगा, उसे तुरंत ऑनलाइन किया जाएगा
. फर्जी दस्तावेजों से जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह बंद होंगी
. तय समय में अगर टीसीपी, एचएसआईआईडीसी, शहरी निकाय, एचएसवीपी, राजस्व, पुलिस व विधि विभाग ऑनलाइन सिस्टम तैयार नहीं कर पाते हैं तो उन्हें सिस्टम विकसित होने तक मैन्युल तरीके से प्रमाण पत्र या एनओसी देने की मोहलत दी जाएगी। उस पर पूरी नजर रखेंगे।