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विधवा के प्लॉट पर कब्जा करने का मामला, काउंसिलर कैंथ को राहत नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 08 Jul 2016 07:02 PM IST
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पुलिस हिरासत में भाजपा काउंसलर सतीश कैंथ
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ के हल्लोमाजरा में विधवा के प्लॉट पर कब्जे के मामले में भाजपा पार्षद सतीश कुमार कैंथ को राहत नहीं मिल पाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खारिज कर दिया। सेक्टर-31 थाना पुलिस ने सतीश कैंथ, उनकी पत्नी और पिता के खिलाफ मार्च 2016 में धोखाधड़ी और आपराधिक स्तर पर कब्जे की धाराओं में केस दर्ज किया था। 7 जून को कोर्ट में सरेंडर करने के बाद से कैंथ बुड़ैल जेल में हैं।
इससे पहले कैंथ की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया था कि उसे पुलिस ने केस में झूठा फंसाया है। उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। एफआईआर के तथ्यों को देखने से पता चलता है कि पुलिस संबंधित अपराध के साथ उनकी भूमिका को जोड़ने में नाकाम रही है। संबंधित जमीन की जीपीए उनके पिता सोहन लाल के नाम है। वहीं इसकी सेल डीड उनकी पत्नी जसवंत कौर के नाम है। दस्तावेजों में कहीं भी उनका नाम नहीं है। इससे उनके खिलाफ कोई केस नहीं बनता। कैंथ की ओर से कहा गया है कि, अगर उनके पिता और पत्नी ने कानून कोई अपराध किया है तो ऐसे में उन पर अपराध का दायित्व हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
वहीं इस पर पुलिस की ओर दिए गए जवाब में कहा गया था कि कैंथ की अग्रिम जमानत याचिका जिला अदालत और हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है। पुलिस के अनुसार कैंथ ने अपने पद और राजनीतिक जानपहचान का दुरुपयोग किया है। जमीन हड़पने के मामले में कैंथ को ही पुलिस ने मास्टरमाइंड बताया है। पुलिस के अनुसार कैंथ अनावश्यक तरीके से शिकायतकर्ता महिला की जमीन को किसी अन्य खसरा नंबर के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कैंथ और उनके परिवार पर शिकायतकर्ता की जमीन पर गैरकानूनी तरीके से दाखिल होने, जालसाजी कर जमीन हथियाने के आरोप पुलिस ने लगाए हैं।
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राजस्व विभाग के रिकार्ड को भी पुलिस ने आधार बनाया है जिसमें कहा गया है कि जमीन का कब्जा शिकायतकर्ता महिला के पति के पास था। वहीं पुलिस ने सतीश कैंथ के आपराधिक रिकार्ड का भी हवाला दिया था। इनमें उसके खिलाफ अप्रैल 2015 को इंडस्ट्रियल एरिया थाने में हत्या का प्रयास, हथियारों समेत दंगा करने समेत अन्य धाराओं में दर्ज केस की जानकारी दी थी। इसके अलावा अदालत को बताया था कि फरवरी 2011 को जसवंत कौर और मनीष कैंथ के मकान को संबंधित एक्ट के तहत ढहाने के आदेश हुए थे तब भी कैंथ के प्रभाव के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
यह है मामला
सतीश कैंथ पर हल्लोमाजरा में बिमला देवी के पांच मरले के प्लॉट पर कब्जा करने का आरोप है। बिमला देवी का कहना था कि उनके पति स्व. शाम लाल गुप्ता ने खसरा नंबर 133/2 में 2.5 बिसवा जमीन खरीदी थी। इसके बाद बिमला देवी परिवार समेत फरीदाबाद रहने चली गईं। बिमला देवी के पुत्र अरुण गुप्ता बीच बीच में प्लॉट देखने आते थे। जब वह काफी लंबे समय के बाद आए तो उसके प्लॉट पर पूरा मकान बना हुआ था। सतीश कैंथ ने उस मकान पर दो मंजिला मकान बना लिया था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि कैंथ ने धोखे से प्लॉट पर कब्जा कर मकान बना लिया।
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इससे पहले कैंथ की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया था कि उसे पुलिस ने केस में झूठा फंसाया है। उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। एफआईआर के तथ्यों को देखने से पता चलता है कि पुलिस संबंधित अपराध के साथ उनकी भूमिका को जोड़ने में नाकाम रही है। संबंधित जमीन की जीपीए उनके पिता सोहन लाल के नाम है। वहीं इसकी सेल डीड उनकी पत्नी जसवंत कौर के नाम है। दस्तावेजों में कहीं भी उनका नाम नहीं है। इससे उनके खिलाफ कोई केस नहीं बनता। कैंथ की ओर से कहा गया है कि, अगर उनके पिता और पत्नी ने कानून कोई अपराध किया है तो ऐसे में उन पर अपराध का दायित्व हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
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वहीं इस पर पुलिस की ओर दिए गए जवाब में कहा गया था कि कैंथ की अग्रिम जमानत याचिका जिला अदालत और हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी है। पुलिस के अनुसार कैंथ ने अपने पद और राजनीतिक जानपहचान का दुरुपयोग किया है। जमीन हड़पने के मामले में कैंथ को ही पुलिस ने मास्टरमाइंड बताया है। पुलिस के अनुसार कैंथ अनावश्यक तरीके से शिकायतकर्ता महिला की जमीन को किसी अन्य खसरा नंबर के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कैंथ और उनके परिवार पर शिकायतकर्ता की जमीन पर गैरकानूनी तरीके से दाखिल होने, जालसाजी कर जमीन हथियाने के आरोप पुलिस ने लगाए हैं।
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राजस्व विभाग के रिकार्ड को भी पुलिस ने आधार बनाया है जिसमें कहा गया है कि जमीन का कब्जा शिकायतकर्ता महिला के पति के पास था। वहीं पुलिस ने सतीश कैंथ के आपराधिक रिकार्ड का भी हवाला दिया था। इनमें उसके खिलाफ अप्रैल 2015 को इंडस्ट्रियल एरिया थाने में हत्या का प्रयास, हथियारों समेत दंगा करने समेत अन्य धाराओं में दर्ज केस की जानकारी दी थी। इसके अलावा अदालत को बताया था कि फरवरी 2011 को जसवंत कौर और मनीष कैंथ के मकान को संबंधित एक्ट के तहत ढहाने के आदेश हुए थे तब भी कैंथ के प्रभाव के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
यह है मामला
सतीश कैंथ पर हल्लोमाजरा में बिमला देवी के पांच मरले के प्लॉट पर कब्जा करने का आरोप है। बिमला देवी का कहना था कि उनके पति स्व. शाम लाल गुप्ता ने खसरा नंबर 133/2 में 2.5 बिसवा जमीन खरीदी थी। इसके बाद बिमला देवी परिवार समेत फरीदाबाद रहने चली गईं। बिमला देवी के पुत्र अरुण गुप्ता बीच बीच में प्लॉट देखने आते थे। जब वह काफी लंबे समय के बाद आए तो उसके प्लॉट पर पूरा मकान बना हुआ था। सतीश कैंथ ने उस मकान पर दो मंजिला मकान बना लिया था। पीड़ित ने आरोप लगाया कि कैंथ ने धोखे से प्लॉट पर कब्जा कर मकान बना लिया।