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टेक्सटाइल फैक्ट्री में लगी भयानक आया, दमकल के 4 कर्मचारी घायल
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Fri, 12 May 2017 09:15 AM IST
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फैक्ट्री में भयानक आग
- फोटो : अमर उजाला
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टेक्सटाइल फैक्ट्री में भयानक आग लग गई। देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को आग ने चपेट में ले लिया। पूरी आग को पाने के लिए 30 गाड़ियों को भी 4 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा है। लुधियाना महानगर में रोजाना किसी न किसी फैक्टरी में आग लग रही हैं। पिछले एक सप्ताह में वीरवार को छठी जगह आग लग गई। वीरवार सुबह सुफिया चौक स्थित मल्लिका होजरी फैक्टरी की दूसरी मंजिल पर आग लग गई।
जिस समय फैक्टरी में आग लगी, एक मजदूर अंदर था। उसने लिफ्ट के जरिए नीचे आकर अपनी जान बचाई। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के चार कर्मचारी जैसे ही ऊपर वाली मंजिल पर जाने लगे तो फैक्टरी में पड़ा गैस सिलेंडर फट गया। इससे चारों फायर कर्मचारी घायल हो गए। चारों को सीएमसी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उनकी पहचान हजूरा सिंह, सरदारा सिंह उर्फ फौजी, लवलेश सूद और नरेश कुमार के रुप में हुई है। हजूरा सिंह और सरदारा सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है।
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जिस समय फैक्टरी में आग लगी, एक मजदूर अंदर था। उसने लिफ्ट के जरिए नीचे आकर अपनी जान बचाई। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड के चार कर्मचारी जैसे ही ऊपर वाली मंजिल पर जाने लगे तो फैक्टरी में पड़ा गैस सिलेंडर फट गया। इससे चारों फायर कर्मचारी घायल हो गए। चारों को सीएमसी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां उनकी पहचान हजूरा सिंह, सरदारा सिंह उर्फ फौजी, लवलेश सूद और नरेश कुमार के रुप में हुई है। हजूरा सिंह और सरदारा सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है।
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शीशा और ग्रिल तोड़ कर पाया आग पर काबू
फैक्ट्री में भयानक आग
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, बाकी फायर कर्मियों को आग बुझाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्हें खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े और पानी की निकासी के लिए ग्रिलिंग भी तोड़ी गई। फायर ब्रिगेड की तीस गाड़ियों ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग लगने से फैक्टरी में पड़ा करोड़ों रुपये का सामान जल कर राख हो गया।
सुफिया चौक के पास स्थित विजय नगर में लेखराज की दो मंजिला बिल्डिंग है।
उन्होंने अपनी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल अनुभव ओसवाला को किराए पर दे रखी है। यहां अनुभव ने मल्लिका टेक्सटाइल के नाम से होजरी फैक्टरी खोली हुई है। जहां पर निटिंग की मशीनें लगी हुई हैं। वीरवार सुबह फैक्टरी में सिर्फ मजदूर अनिल ही मौजूद था। इसी दौरान अचानक आग लग गई। आग की लपटें देख अनिल बाहर की तरफ भागा, लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं मिला।
वह लिफ्ट के जरिए नीचे आया और तुरंत इसकी जानकारी फायर ब्रिगेड को दी। जब फायर ब्रिगेड के चार कर्मचारी ऊपर जाने लगे तो सिलेंडर फटने का जोरदार धमाका हुआ। इससे चारों घायल हो गए।
सुफिया चौक के पास स्थित विजय नगर में लेखराज की दो मंजिला बिल्डिंग है।
उन्होंने अपनी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल अनुभव ओसवाला को किराए पर दे रखी है। यहां अनुभव ने मल्लिका टेक्सटाइल के नाम से होजरी फैक्टरी खोली हुई है। जहां पर निटिंग की मशीनें लगी हुई हैं। वीरवार सुबह फैक्टरी में सिर्फ मजदूर अनिल ही मौजूद था। इसी दौरान अचानक आग लग गई। आग की लपटें देख अनिल बाहर की तरफ भागा, लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं मिला।
वह लिफ्ट के जरिए नीचे आया और तुरंत इसकी जानकारी फायर ब्रिगेड को दी। जब फायर ब्रिगेड के चार कर्मचारी ऊपर जाने लगे तो सिलेंडर फटने का जोरदार धमाका हुआ। इससे चारों घायल हो गए।
दमकल कर्मचारियों के पास पुख्ता इंतजाम तक नहीं
फैक्ट्री में भयानक आग
- फोटो : अमर उजाला
वहीं ब्लास्ट से फैक्ट्री की दीवारों में दरार आ गई। जब अन्य फायर कर्मचारियों को ऊपर जाने और पानी के बाहर न आने का रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने वहां लगी ग्रिल तोड़ी और रास्ता बनाया। चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि फायर ब्रिगेड के पास पुख्ता इंतजाम नहीं थे। फायर कर्मचारियों के पास न तो कोई सेफ्टी किट थी और न ही मुंह पर बांधने के लिए मास्क। इस वजह से धुआं चढ़ने के कारण भी फायर कर्मचारियों की हालत खराब हो रही थी।
जिला फायर अफसर सुरजीत सिंह ने कहा कि फैक्टरी में आगजनी से बचाव के कोई प्रबंध नहीं थे। धागा और कपड़ा पड़ा होने के कारण आग ज्यादा फैल गई थी। तीस गाड़ियों ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि फायर ब्रिगेड के पास पुख्ता इंतजाम नहीं थे। फायर कर्मचारियों के पास न तो कोई सेफ्टी किट थी और न ही मुंह पर बांधने के लिए मास्क। इस वजह से धुआं चढ़ने के कारण भी फायर कर्मचारियों की हालत खराब हो रही थी।
जिला फायर अफसर सुरजीत सिंह ने कहा कि फैक्टरी में आगजनी से बचाव के कोई प्रबंध नहीं थे। धागा और कपड़ा पड़ा होने के कारण आग ज्यादा फैल गई थी। तीस गाड़ियों ने चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।