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पंजाब: कर्ज से तंग आकर एक ही दिन में चार किसानों ने की खुदकुशी
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा/फरीदकोट/संगरूर
Updated Wed, 10 Jan 2018 09:54 AM IST
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farmer suicide
- फोटो : Demo Pics
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पंजाब में भले ही राज्य सरकार किसानों के लिए कर्ज माफी की योजना चला रही है, लेकिन कर्ज में डूबे किसानों की खुदकुशी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले 24 घंटों में राज्य में चार कर्जदार किसानों ने खुदकुशी कर ली।
बठिंडा के गांव पित्थो में किसान बूटा सिंह (55) ने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उस पर बैंकों का 3.6 लाख का कर्ज था। कांग्रेस सरकार की 2.5 एकड़ वाली कर्ज माफी लिस्ट में नाम न आने पर वह काफी परेशान था। आम आदमी पार्टी के जिला ज्वाइंट सचिव इकबाल सिंह पित्थो ने सरकार से मांग की कि परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और उसका कर्जा माफ किया जाए।
वहीं दूसरी घटना फरीदकोट में हुई। यहां गांव चहिल में किसान गुरदेव सिंह संधू (47) ने सोमवार रात खेत में बने ट्यूबवेल के कुएं में फंदा लगाकर जान दे दी। गुरदेव सिंह गांव के स्वतंत्रता सेनानी ऊधम सिंह संधू का पोता था। उसके पास 18 एकड़ जमीन थी। उस पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का करीब 25 लाख रुपये कर्ज था। गांव के सरपंच बलजीत सिंह ने बताया कि गुरदेव सिंह कर्ज के कारण खुद को शर्मसार महसूस कर रहा था।
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तीसरी घटना जिला संगरूर में हुई। गांव लोहाखेड़ा का 30 वर्षीय किसान हरविंदर सिंह पर आढ़तियों और बैंक का करीब आठ लाख रुपये कर्ज था। महज तीन एकड़ जमीन का मालिक हरविंदर लाख कोशिशों के बावजूद भी कर्ज उतारने में असमर्थ था। इससे परेशान होकर उसने कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया। इस बारे में जब परिवार वालों को पता चला तो उन्होंने उसे तुरंत लौंगोवाल के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डाक्टरों ने उसे मृतक घोषित कर दिया।
चौथी घटना लहरागागा के गांव लेहलकलां में हुई। यहां कर्ज से परेशान 40 वर्षीय किसान हरदीप सिंह ने घर में ही पंखे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। पूर्व सरपंच रणजीत सिंह वालिया ने बताया कि हरदीप ने कर्ज लेकर कुछ समय पहले लहरा-मूनक रोड पर मकान बनाया था। हालांकि, अभी तक इस जगह की रजिस्ट्री उसके नाम नहीं हुई थी। कुछ समय पहले ही हरदीप को पता चला कि लहरा-मूनक सड़क चौड़ी होने वाली है। उसे डर था कि उसका मकान भी सड़क के बीच में आ जाएगा। कर्ज और मकान टूटने की परेशानी के कारण उसने खुदकुशी कर ली।
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बठिंडा के गांव पित्थो में किसान बूटा सिंह (55) ने घर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उस पर बैंकों का 3.6 लाख का कर्ज था। कांग्रेस सरकार की 2.5 एकड़ वाली कर्ज माफी लिस्ट में नाम न आने पर वह काफी परेशान था। आम आदमी पार्टी के जिला ज्वाइंट सचिव इकबाल सिंह पित्थो ने सरकार से मांग की कि परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए और उसका कर्जा माफ किया जाए।
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वहीं दूसरी घटना फरीदकोट में हुई। यहां गांव चहिल में किसान गुरदेव सिंह संधू (47) ने सोमवार रात खेत में बने ट्यूबवेल के कुएं में फंदा लगाकर जान दे दी। गुरदेव सिंह गांव के स्वतंत्रता सेनानी ऊधम सिंह संधू का पोता था। उसके पास 18 एकड़ जमीन थी। उस पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का करीब 25 लाख रुपये कर्ज था। गांव के सरपंच बलजीत सिंह ने बताया कि गुरदेव सिंह कर्ज के कारण खुद को शर्मसार महसूस कर रहा था।
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तीसरी घटना जिला संगरूर में हुई। गांव लोहाखेड़ा का 30 वर्षीय किसान हरविंदर सिंह पर आढ़तियों और बैंक का करीब आठ लाख रुपये कर्ज था। महज तीन एकड़ जमीन का मालिक हरविंदर लाख कोशिशों के बावजूद भी कर्ज उतारने में असमर्थ था। इससे परेशान होकर उसने कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया। इस बारे में जब परिवार वालों को पता चला तो उन्होंने उसे तुरंत लौंगोवाल के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डाक्टरों ने उसे मृतक घोषित कर दिया।
चौथी घटना लहरागागा के गांव लेहलकलां में हुई। यहां कर्ज से परेशान 40 वर्षीय किसान हरदीप सिंह ने घर में ही पंखे से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। पूर्व सरपंच रणजीत सिंह वालिया ने बताया कि हरदीप ने कर्ज लेकर कुछ समय पहले लहरा-मूनक रोड पर मकान बनाया था। हालांकि, अभी तक इस जगह की रजिस्ट्री उसके नाम नहीं हुई थी। कुछ समय पहले ही हरदीप को पता चला कि लहरा-मूनक सड़क चौड़ी होने वाली है। उसे डर था कि उसका मकान भी सड़क के बीच में आ जाएगा। कर्ज और मकान टूटने की परेशानी के कारण उसने खुदकुशी कर ली।