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पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने गृह मंत्री को लिखा पत्र, कहा- प्रशासन को दें हिदायत, पांच सौ रुपये प्रति वर्गफीट की दर से न वसूले जुर्माना
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चंडीगढ़। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन कुमार बंसल ने वीरवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि वे चंडीगढ़ प्रशासन को हिदायत दें कि संपत्ति मालिकों से इमारत के उल्लंघन या दुरुपयोग के लिए 500 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से जुर्माना न वसूल करें।
पत्र के माध्यम से बंसल ने गृह मंत्री को कहा है कि जिस कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलेपमेंट एंड रेग्यूलेशन) एक्ट 1952 के तहत एस्टेट नियमों को बनाया गया था, उसमें केवल पांच सौ रुपये के जुर्माने तथा जिस दिन से उल्लंघना हुई उस दिन से 20 रुपये प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान था। लेकिन इस अधिनियम के विरोध में चंडीगढ़ के प्रशासक ने वर्ष 2007 में चंडीगढ़ एस्टेट नियमों की घोषणा की। साथ ही वर्ष 2009 में संसोधन कर 500 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से मासिक शुल्क का प्रावधान किया गया ।
बंसल ने कहा कि प्रशासक के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है जिससे वो अधिनियम के संशोधन में कोई कदम उठा सकते हैं। यह सिर्फ संसद का अधिकार क्षेत्र है। जुर्माने की यह अनुचित वृद्धि बिना सोचे समझे लागू कर दिया गया। जिसकी वजह से चंडीगढ़ में वाणिज्यिक,औद्योगिक और आवासीय संपत्तियों के मालिकों को संकट और कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।अधिनियम का उल्लंघन करने की जुर्माना राशि करोड़ों रुपये में तब्दील हो चुकी है। यही नहीं कई जुर्माने तो संपत्ति की मूल लागत से हजार गुना हैं।
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पत्र के माध्यम से बंसल ने गृह मंत्री को कहा है कि जिस कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलेपमेंट एंड रेग्यूलेशन) एक्ट 1952 के तहत एस्टेट नियमों को बनाया गया था, उसमें केवल पांच सौ रुपये के जुर्माने तथा जिस दिन से उल्लंघना हुई उस दिन से 20 रुपये प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान था। लेकिन इस अधिनियम के विरोध में चंडीगढ़ के प्रशासक ने वर्ष 2007 में चंडीगढ़ एस्टेट नियमों की घोषणा की। साथ ही वर्ष 2009 में संसोधन कर 500 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से मासिक शुल्क का प्रावधान किया गया ।
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बंसल ने कहा कि प्रशासक के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है जिससे वो अधिनियम के संशोधन में कोई कदम उठा सकते हैं। यह सिर्फ संसद का अधिकार क्षेत्र है। जुर्माने की यह अनुचित वृद्धि बिना सोचे समझे लागू कर दिया गया। जिसकी वजह से चंडीगढ़ में वाणिज्यिक,औद्योगिक और आवासीय संपत्तियों के मालिकों को संकट और कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।अधिनियम का उल्लंघन करने की जुर्माना राशि करोड़ों रुपये में तब्दील हो चुकी है। यही नहीं कई जुर्माने तो संपत्ति की मूल लागत से हजार गुना हैं।
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