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आर्मी पेंशन के लिए भटक रहे 1971 के ईंडो-पाक युद्ध का योद्धा
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 30 Dec 2015 09:40 AM IST
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साल 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध में घायल एक सिपाही की विकलांगता पेंशन पिछले 39 साल से बंद है। रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इंजरी काफी ठीक हो गई है, इसलिए पेंशन बंद कर दी गई।
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कुछ सालों बाद उसके पैर में दर्द शुरू होता है। पीजीआई चंडीगढ़ में उसे दाखिल कराया गया । आपरेशन के दौरान उसके पैर से बम के छर्रे निकलते हैं। चंडीमंदिर स्थित आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) में पूर्व सिपाही ने दोबारा से विकलांगता पेंशन और वार इंजरी पेंशन की गुजारिश की।
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ट्रिब्यूनल ने याचिका स्वीकार करते हुए रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि मेडिकल बोर्ड सिपाही की विकलांगता का पुनर्मूल्यांकन कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपे।
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पूर्व सिपाही भाग सिंह मूल रूप से मोहाली के रहने वाले हैं। 1971 के युद्ध में वे पंजाब के वाघा बार्डर पर तैनात थे। युद्ध के दौरान वह घायल हो गए थे। घायल होने के बाद फौज से उनकी नौकरी खत्म कर दी गई। साल 1974 से लेकर 1976 तक उन्हें विकलांगता पेंशन दी गई।
उसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठा और उनकी चोट का फिर से मूल्यांकन किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि इंजरी काफी कम हो गई है। इसी आधार पर उनकी विकलांगता पेंशन बंद कर दी गई। सेना की पूरी नौकरी करने की वजह से उन्हें सर्विस से जुड़ी अन्य सुविधाएं मिलती रहीं।
करीब दस साल बाद उनके बाई टांग की थाई में दर्द उठा। चंडीमंदिर के कमान हास्पिटल में दिखाने के बाद उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में आपरेशन के दौरान उनके पैर से बम के छर्रे निकाले गए।
आपरेशन में निकले बम के छर्रों को आधार बनाकर भाग सिंह ने रक्षा मंत्रालय सहित अन्य संबंधित विभागों को पत्र भेजकर दोबारा से विकलांगता पेंशन शुरू करने की मांग की। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। वे दर-दर की ठोकरें खाते रहे।
एक्स सर्विसमैन एसोसिएशन ने अपने हाथों लिया केस
सभी जगह धक्के खाने के बाद भाग सिंह पूरी तरह से निराश हो गए। किसी ने इस बारे में सूचना आल इंडिया एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन को दी। एसोसिएशन के चेयरमैन भीम सेन सहगल ने आरटीआई के जरिए भाग सिंह के रिकार्ड हासिल किए। उसमें पता चला कि पूर्व सैनिक की इंजरी को फिजिकली चेक नहीं किया गया था। सभी रिकार्ड हासिल करने के बाद उन्होंने इस केस को एएफटी में दायर किया।
दो महीने पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश
ट्रिब्यूनल ने केस सुनने के बाद रक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया है कि मेडिकल बोर्ड याचिकाकर्ता का दोबारा से चेकअप करे और उसकी रिपोर्ट दो महीने के भीतर आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल को सौंपे। रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। भीम सेन सहगल ने बताया कि भाग सिंह युद्ध के वक्त घायल हुए थे, इसलिए वार इंजरी पेंशन की भी माग की गई है।
सेना के नौ मेडल मिल चुके हैं
भाग सिंह को सेना के बहुत ही बहादुर सिपाही रहे हैं। उन्हें नौ मेडल भी मिल चुके हैं। वे 1971 के युद्ध के अलावा 1962, 1965 के युद्ध में भी हिस्सा ले चुके हैं।