फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Former SGPC President Avtar Singh Makkar Passes Away

11 साल एसजीपीसी प्रधान रहे अवतार सिंह मक्कड़ का निधन, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हटाए गए थे

Sat, 21 Dec 2019 09:45 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 21 Dec 2019 09:45 AM IST
विज्ञापन
Former SGPC President Avtar Singh Makkar Passes Away
अवतार सिंह मक्कड़ - फोटो : फाइल फोटो
11 साल तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी(एसजीपीसी) के प्रधान रहे जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ (78) का निधन हो गया। जत्थेदार मक्कड़ पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। इसी कारण गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में दाखिल थे। शुक्रवार को शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ के निधन की खबर आते ही शहर में शोक की लहर दौड़ गई।
विज्ञापन


पंजाब के बड़े अकाली नेता माडल टाउन स्थित जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ के घर परिजनों से दुख सांझा करने के लिए पहुंच गए। जत्थेदार मक्कड़ के निधन पर एसजीपीसी के प्रधान गोबिंद सिंह लौगोवाल ने दुख जताया है और इसे कभी न पूरा होने वाला घाटा बताया है। शिरोमणि अकाली दल में पैठ रखने वाले जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ 11 साल तक शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान पद पर रहे।
विज्ञापन


इसके अलावा वह माडल टाउन एक्सटेंशन स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा के भी प्रधान के तौर पर सेवा निभा रहे थे। पिछले कुछ समय से जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ बीमार चल रहे थे और ज्यादातर घर पर ही समय बीताते थे, लेकिन कुछ दिनों से उनकी तबीयत ज्यादा खराब थी और परिजन उनका इलाज गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में करवा रहे थे। शुक्रवार को उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई और फिर उन्होंने शाम को अंतिम सांस ली।
विज्ञापन
विज्ञापन

इस तरह विवादों में रहा पूरा कार्यकाल

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के 99 वर्ष के इतिहास में जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा के बाद 11 वर्ष तक सेवा निभाने का अवसर मिला था। 2005 में बीबी जागीर कौर के स्थान पर जत्थेदार मक्कड़ को एसजीपीसी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जत्थेदार मकड़ ने अपने कार्यकाल के दौरान कई क्रांतिकारी कदम उठाए।

मक्कड़ के कार्यकाल के दौरान ही तत्कालीन जत्थेदार अकाल तख्त ज्ञानी गुरबचन सिंह ने सिंह साहिब की बैठक में विवादित डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को माफी देकर एक ऐसा विवाद छेड़ दिया था, जिसकी काली परछाई पंथक हलकों में आज भी देखी जा सकती है। इसी कार्यकाल के दौरान सिखों के एक बड़े गुट ने समांतर जत्थेदारों की नियुक्ति कर पंथक संकट खड़ा किया।

पहली बार श्री अकाल तख्त साहिब के पंज प्यारों ने एसजीपीसी व अकाल तख्त के जत्थेदार के विरुद्ध बगावत का झंडा उठाया। पहली बार एसजीपीसी ने पंज प्यारों को उनके पदों से हटाया। इस विवाद के बाद जत्थेदार मक्कड़ व बादल परिवार के बीच वैचारिक मतभेद पैदा हुए। तत्कालीन जत्थेदार अकाल तख्त साहिब जोगिंदर सिंह वेदांती के साथ मतभेद पैदा होने के बाद वेदनी ने जत्थेदार के पद से इस्तीफा दे दिया।

 

अगुवाई में डायरेक्टोरेट ऑफ एजुकेशन की स्थापना की गई

जत्थेदार मक्कड़ के कार्यकाल के दौरान ही जत्थेदार अकाल तख्त ने पंथक परंपराओं को दरकिनार कर डेरा सच्चा सौदा को दी माफी वापस ली। समांतर जत्थेदारों ने बंदीछोड़ दिवस पर ज्ञानी गुरबचन सिंह को अकाल तख्त साहिब की डियोड़ी से कॉम के नाम दिए जाने वाले संदेश के दौरान उग्र संगठनों का विरोध झेलना पड़ा।

इनके कार्यकाल के दौरान सचखंड श्री हरिमंदर साहिब के मुख्य प्रवेश द्वार के ऐतिहासिक दरवाजों की सेवा कर नए दरवाजे स्थापित किये गए। दर्शनी ड्योढ़ी का जीर्णोद्धार करवाया गया। सचखंड परिसर में स्थित एतिहासिक रामगढ़िया बूंगों की कार सेवा की गई। उनके कार्यकाल के दौरान सचखंड श्री हरिमंदर साहिब की सदियों पुरानी तांती साजों की कीर्तन परंपरा को पुनर्जीवित किया था।

श्री गुरुग्रंथ साहिब यूनिवर्सिटी की स्थापना के पीछे जत्थेदार मक्कड़ की महत्वपूर्ण भूमिका थी। एसजीपीसी द्वारा संचालित कॉलेजों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए जत्थेदार मक्कड़ ने यूके की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से समझौता किया। सिख धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए मक्कड़ ने एसजीपीसी के इतिहास में पहली बार सिख अध्ययन पत्र विहार-कोर्स शुरू कर देश के स्कूलों में परीक्षाओं का आयोजन कर नई पीढ़ी को सिख धर्म व विरासत के साथ जोड़ा। मक्कड़ पहले ऐसे अध्यक्ष थे, जिनकी अगुवाई में डायरेक्टोरेट ऑफ एजुकेशन की स्थापना की गई।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुए अधिवेशन में मक्कड़ को पद से हटाया गया
जत्थेदार मक्कड़ के कार्यकाल के दौरान एसजीपीसी के दो चुनाव हुए। दोनों पर बादल दल की शानदार जीत हुई। 2011 में हुए एसजीपीसी चुनाव के बाद सहजधारी मुद्दे पर ऐसा विवाद छिड़ा कि जत्थेदार मक्कड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाते रहे। इस दौरान एसजीपीसी की साधारण सभा का कोई भी अधिवेशन नहीं हुआ। 2017 में जब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला दिया तो एसजीपीसी की साधारण सभा में जत्थेदार मक्कड़ को इस पद से हटा कर लौंगोवाल को अध्यक्ष पद की सेवा सौंपी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed