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Punjab: भ्रष्टाचार मामले में पूर्व कांग्रेसी मंत्री साधु सिंह धर्मसोत गिरफ्तार, संगत गिलजियां पर भी एफआईआर

Tue, 07 Jun 2022 07:52 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 07 Jun 2022 07:52 AM IST
सार

पंजाब के पूर्व कांग्रेसी मंत्री साधु सिंह धर्मसोत को विजिलेंस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में पकड़ा गया है।

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Punjab Former Congress Minister Sadhu Singh Dharamsot Arrested in Graft Case by Vigilance Latest News in Hindi
पूर्व मंत्री साधु सिंह धर्मसोत। - फोटो : twitter

विस्तार

पंजाब के पूर्व वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत को विजिलेंस ब्यूरो ने खैर के पेड़ की कटाई के लिए परमिट जारी करने के मामले में गिरफ्तार किया है। धर्मसोत पर परमिट जारी करने में अनियमितताओं सहित अधिकारियों के तबादले, खरीदारी और एनओसी में धांधली करने के आरोप हैं। ब्यूरो ने मंत्री के मीडिया सलाहकार पत्रकार कमलप्रीत सिंह कमल और चमकौर सिंह को भी गिरफ्तार किया है। एफआईआर में चन्नी सरकार में वन मंत्री रहे संगत सिंह गिलजियां का नाम भी शामिल किया गया है।

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विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि डीएफओ मोहाली गुरमनप्रीत सिंह और ठेकेदार हरमोहिंदर सिंह उर्फ हमी एक कॉलोनाइजर से रिश्वत मांग रहे थे। इस मामले में कॉलोनाइजर दविंदर सिंह संधू की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।  पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया है कि उनकी सांठगांठ नेताओं और अफसरों के साथ भी है। इस पूरे मामले के खुलासे के बाद एक और एफआईआर 6 जून, 2022 को दर्ज की गई। इस मामले में धर्मसोत के अलावा आईएफएस अधिकारी अमित चौहान, डीएफओ गुरमनप्रीत सिंह, वन गार्ड दिलप्रीत सिंह और संगत सिंह गिलजियां, धर्मसोत के ओएसडी चमकौर सिंह, कंवलजीत सिंह खन्ना शहर, एसएस गिलजियां के पीए कुलविंदर सिंह शेरगिल और सचिन कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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रिश्वत देने वाला ठेकेदार की डायरी ने खोला राज
प्रवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान हरमोहिंदर सिंह उर्फ हमी ने बताया कि साल 2017 से वह वन विभाग के अधिकारियों, नेताओं और उनके सहायकों को दी रिश्वत का लेखा-जोखा रखने के लिए एक हस्त लिखित डायरी रखता था। वह डायरी उसके स्थान से बरामद की गई थी। डायरी से आरोपियों के तौर-तरीकों का खुलासा हुआ और इसके आधार पर उनको गिरफ्तार किया गया।
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खैर से प्रति पेड़ 1000 रुपये रिश्वत दी गई
विजिलेंस के मुताबिक हरमोहिंदर सिंह उर्फ हमी अपनी फर्म के नाम पर वन विभाग से कटाई के लिए परमिट प्राप्त करके राज्य में खैर के पेड़ काटने और बेचने का कारोबार करता था। उसने अक्तूबर-मार्च सीजन के लिए लगभग 7000 पेड़ काटने का परमिट लिया था। इसके लिए उसे 1000 रुपये प्रति पेड़ रिश्वत देनी पड़ी। इसमें से साधु सिंह धर्मसोत को 500 रुपये प्रति पेड़, डिविजनल वन अफसर को 200 रुपये और रेंज अफसर, ब्लाक अफसर और वन गार्ड को क्रमश: 100-100 रुपये प्रति वृक्ष रिश्वत दी। इस तरह ठेकेदार ने सीजन के दौरान 7 लाख रुपये की रिश्वत दी थी।

तीन साल के कार्यकाल में करोड़ों रुपये जुटाए धर्मसोत ने
विजिलेंस के मुताबिक पंजाब के पूर्व वन मंत्री साधू सिंह धर्मसोत, उनके ओएसडी चमकौर सिंह और पत्रकार कमलजीत सिंह द्वारा डीएफओ के तबादले के लिए 10-20 लाख रुपये, रेंजर के लिए 5-8 लाख रुपये, ब्लाक अफसर और वन गार्ड के लिए 2-3 लाख रुपये की रिश्वत लेते थे। इसके अलावा धर्मसोत ने वन मंत्री के तौर पर अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपये इकट्ठा किए। अपने ओएसडी कमलजीत सिंह द्वारा खैर के पेड़ों की कटाई के लिए परमिट जारी करने के बदले एक करोड़ रुपये लिए। 

अमित चौहान के रोपड़ में डीएफओ रहते, वह पंचायती जमीनों पर लगाए वृक्षों की संख्या कम दिखाता था और बाकी बचे पेड़ों की कटाई की रकम ठेकेदारों के साथ साझा करता था। इससे पंचायतों के सीधे तौर पर फंड का नुकसान होता था। वह कमलजीत सिंह को भी अवैध माइनिंग करवाने में छूट देता था। इसके अलावा धर्मसोत अपने ओएसडी चमकौर सिंह और कमलजीत सिंह द्वारा वन जमीनों पर रास्ते के बदले एनओसी जारी करने के लिए कॉलोनाइजरों, नए बने फीलिंग स्टेशनों, नए प्रोजेक्टों के मालिकों और होटलों और रेस्तरां से रिश्वत लेता था।   

रिश्वत के तौर पर गिलजियां ने लिए 6.40 करोड़ रुपये
विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि हरमोहेंदर सिंह ठेकेदार ने पूर्व वन मंत्री संगत सिंह गिलजियां को मोहाली जिले के गांव नाडा में खैर के पेड़ों की कटाई का परमिट जारी करवाने के लिए कुलविंदर सिंह के मार्फत 5 लाख रुपये रिश्वत दी थी। उसने रेंज अफसर, ब्लाक अफसर और गार्ड को भी रिश्वत दी थी। 

पूर्व मंत्री गिलजियां ने अपने कार्यकाल के दौरान हरमोहेंदर सिंह ठेकेदार की पंजाब के डीएफओ के साथ मीटिंग करवाई थी और हिदायत दी थी कि पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्डों की खरीद सिर्फ सचिन कुमार से ही की जाएगी। एक ट्री-गार्ड की कीमत 2800 रुपये थी, जिसमें से गिलजियां का हिस्सा रिश्वत के तौर पर 800 प्रति पेड़ था। उस समय कुल 80000 ट्री-गार्ड खरीदे गए थे और गिलजियां ने 6,40,00,000 रुपये रिश्वत के तौर पर इकठ्ठा किए थे।
 
प्रवक्ता के अनुसार इस मुहिम का ठेका एक ऐसे ठेकेदार को दिया गया जो पौधों की कीमत उस नर्सरी के खाते में जमा करवा देता था, जिससे पौधे खरीदे जाने थे लेकिन ठेकेदार बिना कोई पौधा खरीदे बाकी 20 प्रतिशत रकम नर्सरी के पास छोड़ कर 80 प्रतिशत नकदी वापस ले लेता था। यह पैसा फिर वन अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बांटा जाता था। वन अधिकारियों ने धोखे से वन क्षेत्र में लगाई पुरानी कंटीली तारों को कंडम करार दिया और महंगे भाव पर नई कंटीली तारें खरीदने के आदेश दिए।

परमिट के लिए मोहाली के 15 अन्य ठेकेदारों ने भी दी रिश्वत 
मोहाली में 15 और ठेकेदार थे, जिन्हें हरमोहेंदर सिंह की तरह ही रिश्वत दी थी। रिश्वत न दिए जाने पर उन्हें परमिट देने से इनकार कर दिया गया या भारी जुर्माने की धमकी देकर परेशान किया जाता रहा। साधु सिंह धर्मसोत को अदायगी खन्ना के निवासी कमलजीत सिंह द्वारा की गई, जो एक पत्रकार है। अमित चौहान ने रोपड़ में बतौर डीएफओ 1160 पेड़ों की कटाई का परमिट 5 लाख 80 हजार देकर दिया था। 

मोहाली में ऐसे चलता था रिश्वत का खेल
मोहाली के वन अधिकारी रिश्वत के बदले जिले की पहाड़ियों के कुदरती रास्ते को लेवल करवा देते थे। कुछ समय पहले मोहाली के गांव नाडा में दिलप्रीत सिंह, वन गार्ड और अन्य वन अधिकारियों की मिलीभगत से पक्की सड़क बनाने के लिए पहाड़ी क्षेत्र को लेवल किया गया था। एसएस गिलजियां के कार्यकाल के दौरान अमित चौहान को डीएफओ रोपड़ नियुक्त किया गया और उस समय बेला के नजदीक गांव जिंदा में 486 एकड़ जमीन में से एक महीने में ही अवैध माइनिंग की गई। गांव में करीब 50 फुट गहरे गड्ढे खोदे गए। सरपंचों की मिलीभगत से 40-50 करोड़ रुपये की अवैध माइनिंग की गई थी, जिनमें से एक का नाम एफआईआर में दर्ज किया गया था, जो बाद में रद्द कर दिया गया था।

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