सिद्धू के सलाहकार का कैप्टन पर हमला: कहा- मेरे खिलाफ रची साजिश, पालतू व पिछलग्गू अधिकारियों को बनाया डीजीपी
नवजोत सिंह सिद्धू के राजनीतिक सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व डीजीपी सुरेश अरोड़ा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। ट्विटर पर उन्होंने अपने खिलाफ साजिश रचने वालों के नामों का खुलासा किया। अब वे पीएम नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की तैयारी में हैं।
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पंजाब पुलिस के पूर्व अधिकारी और प्रदेश कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू के राजनीतिक सलाहकार मोहम्मद मुस्तफा ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व डीजीपी सुरेश अरोड़ा के खिलाफ मोर्चा खोला है। बुधवार को उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर खुद को डीजीपी न बनाए जाने की साजिश रचने के लिए जहां कैप्टन को जिम्मेदार ठहराया, वहीं कई अन्य लोगों को भी इस साजिश में शामिल होने के लिए लताड़ा।
उन्होंने साजिश का आरोप लगाते हुए मामले में पीएम और गृहमंत्री से मिलने की बात कही है। मुस्तफा ने पहली बार खुद को डीजीपी नियुक्त न करने के पूरे मामले को ट्विटर पर एक पोस्ट के रूप में सार्वजनिक किया है। मुस्तफा ने लिखा कि मेरे लिए डीजीपी बनना या न बनना कभी भी कोई मुद्दा नहीं रहा।
यह मुख्यमंत्री का अधिकार है और उनकी मर्जी है कि कौन डीजीपी होगा लेकिन मेरे अंदर के सिपाही को इस बात का सख्त एतराज था और हमेशा रहेगा कि एक बेबस सीएम ने अरोड़ा जैसे फर्जी किरदार वाले साजिशी और उनके पालतू दिनकर गुप्ता के साथ मिलकर साजिश रची और मेरा नाम यूपीएससी के पैनल से बाहर करवाकर मुझे जलील किया।
मेरे जैसे निडर, देशभक्त, राष्ट्रवादी और खुद्दार व्यक्ति की खुद्दारी पर चोट की गई। सीएम कार्यालय के एक चोटी के अफसर द्वारा मेरे खिलाफ लगातार रची जा रही साजिशों के संकेत मिलने पर भी कैप्टन पर पूरा भरोसा करता रहा। अगर मैं सीएमओ के उस अधिकारी द्वारा दी गई खबरों पर अमल करता तो प्रधानमंत्री या उस समय के भाजपा प्रधान अमित शाह को जरूर मिलता या फिर कम से कम यूपीएससी के चेयरमैन से मिल लेता, जिनसे मेरी एसएसपी के समय से जान पहचान थी।
मुझे भरोसा और यकीन है कि अगर इनमें से किसी एक से भी मिल लेता तो वह मेरा सर्विस रिकार्ड, मेरा काम और मेरी राष्ट्रवादी सोच को देखकर कभी भी मेरे साथ ऐसा धोखा न होने देते, क्योंकि मेरा मुकाबला जिनसे था, वह इन सब बातों को मुख्य रखते हुए मुझसे हजारों मील पीछे हैं। यह सारी साजिश अरोड़ा ने एक केंद्रीय मंत्री और कैप्टन के साथ मिलकर रची थी।
यूपीएससी के फैसले के अगले दिन जब मैं यूपीएससी के चेयरमैन से मिला तो वह भी मेरा नाम पैनल से गायब होने पर बहुत हैरान थे। उन्होंने मशविरा दिया कि तुरंत ही इस फैसले के खिलाफ उन्हें एक रिप्रेजेंटेशन दें लेकिन उनके साथ तफसीली मशविरा करने के बाद कोर्ट का रुख करने का फैसला किया, क्योंकि अब चेयरमैन के हाथ में भी करने को बहुत कुछ नहीं बचा था।
सीएम हाउस में रची गई साजिश: मुस्तफा
मुस्तफा ने आगे लिखा कि प्रदेश के मुख्य सचिव जिसे प्रदेश की नौकरशाही के जमीर का रखवाला समझा जाता है, करण अवतार सिंह द्वारा निभाई गई घटिया और निंदनीय भूमिका से मैं और सीएमओ के चोटी के अधिकारी सबसे ज्यादा हैरान थे कि वह भी अपने छोटे-मोटे लालच को पूरा करने के लिए मुस्तफा को खत्म करने की साजिश का हिस्सा बन गए।
एक फरवरी, 2019 को शाम 7 बजे मैं और रजिया सुल्ताना (पंजाब सरकार में मंत्री) सीएम से उनकी कोठी पर मिले और उन्हें रची जा रही साजिशों की खबरों के बारे में जानकारी दी। इस समय उनका चेहरा देखने लायक था। मैं और रजिया समझ गए कि मेरा काम तमाम हो चुका है। इसके एक घंटे बाद ही उस कमरे में सीएम ने मुख्य सचिव करण अवतार और मेरे खिलाफ साजिश के मुख्य सूत्रधार डीजीपी अरोड़ा के साथ बैठक की, जिसमें करण अवतार को मेरे खिलाफ रची गई साजिश का हिस्सा बनाया गया और उन्हें मुझे निपटाने के लिए खास भूमिका सौंपी गई, जो 4 फरवरी को यूपीएससी की बैठक में उन्होंने बढ़-चढ़कर निभाई।
यूपीएससी बोर्ड एक गोरखधंधा: मुस्तफा
मुस्तफा के अनुसार सीएम हाउस में साजिश रचने वाली इस बैठक के तुरंत बाद सीएमओ के उच्च अधिकारी ने मुझे सूचित कर दिया था कि आपकी कब्र खोदी जा चुकी है और अब केवल चार फरवरी को यूपीएससी के भवन में आपको दफनाने की रस्म बाकी है। हुआ भी यही। मेरे कातिलों को यह जानकार बड़ी हैरानी होगी कि यूपीएससी की फर्जी कार्रवाई वाली बैठक खत्म होने के चंद मिनट बाद ही मुझे सब कुछ पता लग गया था। यह अलग बात है कि रवीन अपनी ड्यूटी समझकर छूठ बोलते रहे और मीडिया को गुमराह करते रहे।
एक संस्थान के तौर पर यूपीएससी पर मुझे पूरा भरोसा है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करवाने के लिए जिस तरीके से डीजीपी के पैनल को तैयार करने वाला यूपीएससी बोर्ड बनाया जाता है, वह एक गोरखधंधा है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पूरी तरह नकारता है। अंत में मुस्तफा ने लिखा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिलना अब भी मेरे एजेंडे में है। मैं इनसे जरूर मिलने की कोशिश करूंगा, ताकि भविष्य में किसी फर्जी किरदार वाले पिछलग्गू पालतू के कारण किसी बहादुर राष्ट्रवादी को नुकसान न हो।