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Hindi News ›   Chandigarh ›   Former Finance Minister of Haryana Sampat Singh rejected membership of BJP State Executive

हरियाणा: पूर्व वित्तमंत्री संपत सिंह ने ठुकराई भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्यता, कहा-बंद कमरे में राजनीति असंभव

Mon, 28 Jun 2021 01:35 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 28 Jun 2021 01:35 PM IST
सार

संपत सिंह 2019 चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने भाजपा के प्रदेश प्रधान ओपी धनखड़ से पहले किसानों के मुद्दे सुलझाने की अपील की है।
 

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Former Finance Minister of Haryana Sampat Singh rejected membership of BJP State Executive
हरियाणा के पूर्व वित्तमंत्री संपत सिंह। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा के पूर्व वित्तमंत्री संपत सिंह ने भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के पद को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि बंद कमरे में पुलिस की सुरक्षा में राजनीति असंभव है। इस बारे में संपत सिंह ने ट्वीट भी किया है। पिछले सप्ताह भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार किया गया था। इसमें पूर्व मंत्री संपत सिंह को भी कार्यकारिणी सदस्य बनाया गया था।

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अब संपत सिंह ने कार्यकारिणी का सदस्य बनने से इनकार कर दिया है। कृषि कानूनों के विरोध में हरियाणा में किसानों का प्रदर्शन सात माह से जारी है। इसी कड़ी में सत्ताधारी भाजपा और जजपा नेताओं के खिलाफ कई बार उग्र प्रदर्शन किया जा चुका है। 
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पूर्व वित्तमंत्री रह चुके संपत सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, प्रिय धनखड़ जी, वर्तमान राजनीतिक हालात के चलते मैं राज्य कार्यकारिणी की सदस्यता कबूल नहीं कर सकता। पार्टी को प्राथमिक तौर पर किसानों के मुद्दों का हल निकालना चाहिए जिसका मैंने भी लगातार समर्थन किया है। बंद कमरे में पुलिस सुरक्षा में राजनीति असंभव है।


संपत सिंह इनेलो सरकार के समय प्रदेश के वित्तमंत्री रह चुके हैं। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए थे। कांग्रेस की टिकट पर हिसार लोकसभा और नलवा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे।

गुरुवार को हरियाणा भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी नेताओं ने एक सुर में किसान आंदोलन पर कटाक्ष कर इसे आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बताया था। भाजपा नेताओं ने बैठक में कहा कि किसान आंदोलन का चरम समाप्त हो चुका है, अब वहां सिर्फ राजनीति हावी है। आंदोलन का एजेंडा पूरी तरह बदल चुका है और यह सिलेक्टिव बनकर रह गया है।

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