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पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो. नाहर का कार्यकाल नहीं बढ़ता तो आज पीयू में सीनेट के नहीं होते ये हालात
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के सीनेट चुनाव न कराने के लिए भले ही कोरोना को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हो, लेकिन इसकी नींव उसी दिन पड़ गई थी जिस दिन सीनेट में पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर का कार्यकाल बढ़वाने के लिए कांग्रेस ने सीनेट में अपनी ताकत दिखाई थी। उस दिन से कांग्रेस व भाजपाइयों में दरार और बढ़ गई और भाजपा ने तय कर लिया था कि सीनेट का रिफॉर्म होगा। इसके लिए वह किसी भी हद तक जाएंगे। केंद्र सरकार की से भी इशारा उन्हें मिल चुका था। भाजपाइयों के मिशन को राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने और सफल कर दिया, क्योंकि इस नीति में गवर्नेंस रिफॉर्म की बात की गई है और यूजीसी ने इस पर काम करने के लिए पीयू को निर्देश भी दे दिए हैं। अब माना जा रहा है कि पीयू में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस ही बनेगा जो पीयू का संचालन करेगा। उधर, सीनेट चुनाव कराने के लिए कांग्रेस ने पूरा जोर लगा रखा है। सोमवार को भी कांग्रेस प्रदर्शन करेगी।
यह था पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण
पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर का कार्यकाल इस पद पर बढ़ाने की मांग सीनेट में कांग्रेस के सदस्यों ने शुरू कर दी थी। वहीं दूसरी ओर पीयू वीसी प्रो. राजकुमार इस पद के लिए किसी अन्य शिक्षक का चयन कर चुके थे। सीनेट की अगली बैठक का सभी को इंतजार था। साथ ही कांग्रेस व भाजपा ने अपने-अपने सभी सीनेट सदस्यों को फोन करके बैठक में बुलाया ताकि वोटिंग भी हुई तो बहुमत से निर्णय हो। जैसे ही बैठक हुई तो उसमें पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण आ गया। पूर्व वीसी ने प्रो. नाहर का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया। इस पर हंगामा हो गया। कांग्रेस के सदस्य सीनेट में ही धरने पर बैठ गए। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री भी पहुंचे थे। उनके अलावा सांसद व अन्य भाजपा नेता भी थे। भाजपा नेताओं के बोलने पर नारेबाजी शुरू हो गई। केंद्रीय मंत्री ने उसी दिन कह दिया था कि धारा 370 पर हम काम कर सकते हैं तो सीनेट रिफॉर्म पर क्यों नहीं। सांसद ने भी सीनेट रिफॉर्म की बात कही। हालांकि इस प्रकरण में जीत कांग्रेस की हुई, क्योंकि प्रकरण हाईकोर्ट पहुंचा और वहां से फैसला आया। कांग्रेस सदस्यों का तर्क था कि अधिकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। उनकी मनमानी वह नहीं चलने देंगे।
शिक्षिकों की रिक्तियां न करना भी कारण बना
सीनेट रिफॉर्म की ओर बढ़ रहे कदम का एक कारण यह भी बना कि पीयू में 26 असिस्टेंट प्रोफेसरों की रिक्तियां निकाली गई थीं। इन पर सिंडिकेट ने रोक लगा दी। पीयू के एक गुट ने कहा कि सिंडिकेट में कांग्रेस के सदस्यों का बहुमत है। ऐसे में उन्होंने जानबूझकर ऐसा किया है। एक साल से अधिक हो गया, अब तक शिक्षकों की यह रिक्तियां नहीं भरी गईं। हालांकि सिंडिकेट ने तर्क दिए थे कि पहले उन विभागों में शिक्षक रखे जाएं जहां जरूरत हो और जहां पद रिक्त हों। कई अन्य कारण भी बताए थे।
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डीन रिसर्च को हटाने के बाद भी गर्माया मामला
पीयू वीसी ने डीन रिसर्च के पद पर प्रो. एसके तोमर को तैनात किया था, लेकिन शिक्षकों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। उनका कहना था कि वरिष्ठता के आधार पर इस पद पर चयन होना चाहिए। सिंडिकेट की बैठक हुई और उसमें यह मुद्दा सदस्यों ने उठाया और सिंडिकेट ने प्रो. तोमर को पद से हटा दिया। उसके बाद वरिष्ठता क्रम में डीन रिसर्च बनाए गए। सूत्रों का कहना है कि यह मुद्दा भी सीनेट रिफॉर्म की ओर ले गया।
अब यह चल रही है राजनीति
एक तरफ जहां कांग्रेस ने सीनेट को बचाने के लिए ताकत झोंक दी है। उनका तर्क है कि सीनेट पीयू का संचालन करती है। साथ ही संस्थान का लोकतांत्रिक ढांचा है। वहीं दूसरी ओर भाजपा सीनेट रिफॉर्म से लेकर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस तक की बात कर रही है। उनका कहना है कि सीनेट व सिंडिकेट में एक गुट वर्षों से हावी है जो मनचाहे फैसले करवा रहा है। इससे पीयू को नुकसान हो रहा है। दोनों ही दलों के नेता ताकत झोंके हुए हैं। कांग्रेस धरना प्रदर्शन कर रही है। सोमवार को भी प्रदर्शन होगा। उनके साथ कुछ छात्र संगठन भी आ गए हैं। सूत्रों का कहना है कि वहीं भाजपा ने इस प्रदर्शन के बाद अपना काम तेज कर दिया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के जरिए बोर्ड ऑफ गवर्नेंस का नोटिफिकेशन करवाने की तैयारी की जा रही है।
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यह था पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण
पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर का कार्यकाल इस पद पर बढ़ाने की मांग सीनेट में कांग्रेस के सदस्यों ने शुरू कर दी थी। वहीं दूसरी ओर पीयू वीसी प्रो. राजकुमार इस पद के लिए किसी अन्य शिक्षक का चयन कर चुके थे। सीनेट की अगली बैठक का सभी को इंतजार था। साथ ही कांग्रेस व भाजपा ने अपने-अपने सभी सीनेट सदस्यों को फोन करके बैठक में बुलाया ताकि वोटिंग भी हुई तो बहुमत से निर्णय हो। जैसे ही बैठक हुई तो उसमें पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रकरण आ गया। पूर्व वीसी ने प्रो. नाहर का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया। इस पर हंगामा हो गया। कांग्रेस के सदस्य सीनेट में ही धरने पर बैठ गए। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री भी पहुंचे थे। उनके अलावा सांसद व अन्य भाजपा नेता भी थे। भाजपा नेताओं के बोलने पर नारेबाजी शुरू हो गई। केंद्रीय मंत्री ने उसी दिन कह दिया था कि धारा 370 पर हम काम कर सकते हैं तो सीनेट रिफॉर्म पर क्यों नहीं। सांसद ने भी सीनेट रिफॉर्म की बात कही। हालांकि इस प्रकरण में जीत कांग्रेस की हुई, क्योंकि प्रकरण हाईकोर्ट पहुंचा और वहां से फैसला आया। कांग्रेस सदस्यों का तर्क था कि अधिकारी नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। उनकी मनमानी वह नहीं चलने देंगे।
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शिक्षिकों की रिक्तियां न करना भी कारण बना
सीनेट रिफॉर्म की ओर बढ़ रहे कदम का एक कारण यह भी बना कि पीयू में 26 असिस्टेंट प्रोफेसरों की रिक्तियां निकाली गई थीं। इन पर सिंडिकेट ने रोक लगा दी। पीयू के एक गुट ने कहा कि सिंडिकेट में कांग्रेस के सदस्यों का बहुमत है। ऐसे में उन्होंने जानबूझकर ऐसा किया है। एक साल से अधिक हो गया, अब तक शिक्षकों की यह रिक्तियां नहीं भरी गईं। हालांकि सिंडिकेट ने तर्क दिए थे कि पहले उन विभागों में शिक्षक रखे जाएं जहां जरूरत हो और जहां पद रिक्त हों। कई अन्य कारण भी बताए थे।
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डीन रिसर्च को हटाने के बाद भी गर्माया मामला
पीयू वीसी ने डीन रिसर्च के पद पर प्रो. एसके तोमर को तैनात किया था, लेकिन शिक्षकों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। उनका कहना था कि वरिष्ठता के आधार पर इस पद पर चयन होना चाहिए। सिंडिकेट की बैठक हुई और उसमें यह मुद्दा सदस्यों ने उठाया और सिंडिकेट ने प्रो. तोमर को पद से हटा दिया। उसके बाद वरिष्ठता क्रम में डीन रिसर्च बनाए गए। सूत्रों का कहना है कि यह मुद्दा भी सीनेट रिफॉर्म की ओर ले गया।
अब यह चल रही है राजनीति
एक तरफ जहां कांग्रेस ने सीनेट को बचाने के लिए ताकत झोंक दी है। उनका तर्क है कि सीनेट पीयू का संचालन करती है। साथ ही संस्थान का लोकतांत्रिक ढांचा है। वहीं दूसरी ओर भाजपा सीनेट रिफॉर्म से लेकर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस तक की बात कर रही है। उनका कहना है कि सीनेट व सिंडिकेट में एक गुट वर्षों से हावी है जो मनचाहे फैसले करवा रहा है। इससे पीयू को नुकसान हो रहा है। दोनों ही दलों के नेता ताकत झोंके हुए हैं। कांग्रेस धरना प्रदर्शन कर रही है। सोमवार को भी प्रदर्शन होगा। उनके साथ कुछ छात्र संगठन भी आ गए हैं। सूत्रों का कहना है कि वहीं भाजपा ने इस प्रदर्शन के बाद अपना काम तेज कर दिया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के जरिए बोर्ड ऑफ गवर्नेंस का नोटिफिकेशन करवाने की तैयारी की जा रही है।