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फतेहाबाद: स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. सूरजभान के खिलाफ चलेगा आपराधिक केस, भर्ती में अनियमितता का आरोप

Fri, 20 Aug 2021 06:23 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 20 Aug 2021 06:23 PM IST
सार

वर्ष 2013 में एनआरएचएम के तहत जिला स्तर पर कर्मचारी भर्ती होनी थी। भर्ती के विषय में निदेशालय की तरफ से नियमावली जारी हुई। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने पर आरोप लगा कि तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सूरजभान कंबोज ने नियमावली में छेड़छाड़ कर अपनी सुविधा अनुसार नियम बना दिए और विज्ञापन जारी कर दिया। इसी आधार पर अपने चहेते को भर्ती किया। 

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Former Director of Health Department will face Criminal case
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत हुई एक भर्ती तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सूरजभान कंबोज के लिए आफत बन गई है। इस भर्ती में डॉ. सूरजभान कंबोज पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे थे। एक वकील ने अदालत में शिकायत दायर की, जो खारिज हो गई थी। फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जो मंजूर हो चुकी है। अब सेशन कोर्ट ने कहा है कि डॉ. सूरजभान के खिलाफ आपराधिक केस चलना चाहिए। डॉ. सूरजभान कंबोज करीब तीन महीने पहले स्वास्थ्य विभाग के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। 

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मामले के अनुसार वर्ष 2013 में एनआरएचएम के तहत जिला स्तर पर कर्मचारी भर्ती किए जाने थे। इसको लेकर निदेशालय की तरफ से नियमावली जारी हुई। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने पर आरोप लगा कि तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सूरजभान कंबोज ने नियमावली में छेड़छाड़ करते हुए अपनी सुविधा अनुसार नियम बना दिए और विज्ञापन जारी कर दिया। उसी के आधार पर अपने चहेते को बतौर कर्मचारी नियुक्त कर दिया। उस भर्ती में आवेदक रहे सुशील कुमार ने सिविल कोर्ट की शरण ली। 
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सिविल कोर्ट ने निर्णय सुनाया कि यह भर्ती गलत तरीके से हुई है और दोबारा होनी चाहिए। यह मामला हाईकोर्ट तक गया, मगर हाईकोर्ट से भी निर्णय सिविल सर्जन के खिलाफ आया। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में लिखा कि सिविल सर्जन ने फर्जीवाड़ा किया है। इस टिप्पणी के आधार पर एडवोकेट विनोद कुमार ने फतेहाबाद की कोर्ट में अलग से आपराधिक केस दायर कर कहा कि डॉ. सूरजभान कंबोज के खिलाफ आइपीसी की धाराओं के तहत केस दायर होना चाहिए। मगर सीजेएम कोर्ट ने केस को खारिज कर दिया। सीजेएम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एडवोकेट विनोद कुमार ने सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की।
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याचिकाकर्ता के तौर पर खुद ही सेशन कोर्ट में पेश हुए वकील
एडवोकेट विनोद कुमार खुद ही याचिकाकर्ता के तौर पर पेश हुए। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा कि डॉ. सूरजभान कंबोज ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की है। उन्होंने फर्जी दस्तावेज रचे व आवेदकों को धोखा दिया। ऐसे में उनके खिलाफ आइपीसी की धारा 166, 167, 415, 418, 463, 464, 466 व 468 के तहत कार्रवाई बनती है। 

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की कोर्ट ने अपने 21 पेज के फैसले में लिखा है कि सिविल सर्जन के खिलाफ 166, 167 व 415 के तहत कार्रवाई बनती है। इसके लिए फाइल में पर्याप्त दस्तावेज हैं। ऐसे में डॉ. सूरजभान कंबोज के खिलाफ आपराधिक केस चलना चाहिए। 


याचिककर्ता ने बताया कि अब यह मामले में सीजेएम कोर्ट में ही ट्रायल चलेगा। सेशन कोर्ट ने 19 अगस्त को ही फैसला सुनाया है। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को सीजेएम कोर्ट में होगी। कोर्ट की तरफ से डॉ. सूरजभान कंबोज को समन जारी होंगे। इसके बाद उन्हें कोर्ट में अभियुक्त के तौर पर जमानत भी करवानी होगी।

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