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अमर उजाला से खास बातचीत : पूर्व सेना प्रमुख वीपी मलिक बोले- चीन के साथ भरोसे की कमी, भारत को सतर्क रहने की जरूरत

Tue, 16 Feb 2021 11:12 AM IST
ajay kumar अरविंद बाजपेयी, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)
अरविंद बाजपेयी, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Tue, 16 Feb 2021 11:12 AM IST
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Former Army Chief VP Malik Talk with Amar Ujala on LAC Disengagement
पूर्व सेना प्रमुख वीपी मलिक। - फोटो : फाइल फोटो

चीन के साथ भारत के संबंध सामान्य होने में समय लगेगा। इसके लिए जरूरी है कि चीन पर आर्थिक दबाव बनाए रखा जाए। चीन के साथ भरोसे की कमी है। पूर्व में हम इसके कई उदाहरण देख चुके हैं। इसी वजह से हमको हर जगह सावधानी बरतनी होगी। हालांकि चीन इस बात को अच्छी तरह समझ गया है कि भारतीय सेना उसको मुंहतोड़ जवाब दे सकती है। यह बात यहां अमर उजाला से बातचीत में कारगिल युद्ध के समय सेना प्रमुख रहे जनरल वीपी मलिक ने कही। 

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उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर पर दोनों सेनाओं में अप्रैल 2020 की स्थिति पर वापस जाने की सहमति बनी है। नौ माह के तनाव के बाद अब चीन के सैनिक पैंगोंग त्सो इलाके से पीछे हटने को तैयार हो गए हैं। चीन और भारत के बीच कोर कमांडर स्तर पर बातचीत के बाद यह समझौता हुआ है। 
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समझौते के बाद यदि चीन कोई कदम उठा सकता है तो भारत भी कार्रवाई कर सकता है लेकिन भारत को अलर्ट रहने की जरूरत है। अभी तक की बातचीत के मुताबिक भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर पर की गई बातचीत के बाद पहले चरण में चीन और भारत के सैन्य दल पैंगोग त्सो के किनारे से अप्रैल 2020 वाली स्थिति पर वापस लौटेंगे। इसके साथ ही फिंगर चार और फिंगर आठ पर दोनों देशों के बीच तनातनी खत्म करने के लिए पेट्रोलिंग भी खत्म की जाएगी। दूसरे चरण में फिंगर चार और फिंगर आठ में अप्रैल 2020 के बाद निर्मित डिफेंस स्ट्रक्चर को हटाया जाएगा।  
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जनरल वीपी मलिक ने कहा कि कैलाश रेंज के खाली होने के बाद भी हमारा कोई नुकसान नहीं है। हमारे सैनिक किसी भी परिस्थिति में चुशुल के काफी नजदीक ही होंगे। यदि दो चरण में सारी कार्रवाई यथावत होती है तो तीसरे चरण में देपसांग, गोगरा, हाट स्प्रिंग और गलवां में डिसएंगेजमेंट के लिए बातचीत की जाएगी। इसमें दोनों ओर के कमांडर किसी भी मसले को देखने, समझने और उसका निपटारा करने के लिए बात कर सकते हैं। हां, इसमें यह अवश्य है कि हमारे कमांडरों को इस दौरान अलर्ट अवश्य रहना होगा कि कहीं चीन इसका कोई अनावश्यक लाभ न ले।

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