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5100 रुपये में बनाकर थमा दिया फर्जी लाइसेंस
अमर उजाला ब्यूरो, कैथल
Updated Tue, 12 Aug 2014 11:59 PM IST
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कैथल। जिले में डेयरी चलाने के लिए फर्जी लाइसेंस बनवाने वाला गिरोह सक्रिय है। एक डेयरी संचालक इस गिरोह के झांसे में आ गया, लेकिन उसने गिरोह सदस्यों को पैसे देने से पूर्व ही लाइसेंस की जांच करवा ली, जिसमें लाइसेंस फर्जी पाया गया।
उसकी शिकायत के बाद सीएमओ ने पुलिस को जांच कर गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। थाना सिविल लाइन पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गांव रसीना निवासी रणधीर सिंह ने बताया कि वह गांव में ही डेयरी चलाता है। इसी बीच एक व्यक्ति उसके पास आया। उसने उससे कहा कि वह उसका डेयरी चलाने के लिए लाइसेंस बनवा देगा। इसके कुछ ही दिन बाद वह उसके पास एक प्रमाण पत्र लेकर आया तथा इसके लिए उसने 5100 रुपये की राशि की मांग की। लेकिन रणधीर सिंह ने पैसे देने से पूर्व ही इस लाइसेंस की जांच करवा ली।
उसमें लाइसेंस बनाने की जगह करनाल लिखी थी, जबकि मोहर कैथल के लाइसेंस अथॉरिटी कम फूड डिप्टी ऑफिसर लगी थी। शिकायतकर्ता लाइसेंस को लेकर सीएमओ से मिला। सीएमओ ने विभाग की ओर से लाइसेंस जारी होने की बात से इंकार कर दिया तथा शिकायतकर्ता के साथ हुई पूरी घटना की जानकारी लिखते हुए एसपी को कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया है।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि उसके साथ धोखाधड़ी का प्रयास किया गया है। उसने थाना सिविल लाइन पुलिस अधिकारियों को फर्जी लाइसेंस बनाने वाले व्यक्ति का पूर्ण विवरण दे दिया है।
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उसकी शिकायत के बाद सीएमओ ने पुलिस को जांच कर गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। थाना सिविल लाइन पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गांव रसीना निवासी रणधीर सिंह ने बताया कि वह गांव में ही डेयरी चलाता है। इसी बीच एक व्यक्ति उसके पास आया। उसने उससे कहा कि वह उसका डेयरी चलाने के लिए लाइसेंस बनवा देगा। इसके कुछ ही दिन बाद वह उसके पास एक प्रमाण पत्र लेकर आया तथा इसके लिए उसने 5100 रुपये की राशि की मांग की। लेकिन रणधीर सिंह ने पैसे देने से पूर्व ही इस लाइसेंस की जांच करवा ली।
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उसमें लाइसेंस बनाने की जगह करनाल लिखी थी, जबकि मोहर कैथल के लाइसेंस अथॉरिटी कम फूड डिप्टी ऑफिसर लगी थी। शिकायतकर्ता लाइसेंस को लेकर सीएमओ से मिला। सीएमओ ने विभाग की ओर से लाइसेंस जारी होने की बात से इंकार कर दिया तथा शिकायतकर्ता के साथ हुई पूरी घटना की जानकारी लिखते हुए एसपी को कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया है।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि उसके साथ धोखाधड़ी का प्रयास किया गया है। उसने थाना सिविल लाइन पुलिस अधिकारियों को फर्जी लाइसेंस बनाने वाले व्यक्ति का पूर्ण विवरण दे दिया है।