443 वर्ष में पहली बार बैसाखी पर पंजाब में सन्नाटा, जलियांवाला बाग दिखा सूना, गिद्दा-भांगड़ा भी नहीं
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सोमवार को बैसाखी के दिन पंजाब में गिद्दा-भांगड़ा और धार्मिक कार्यक्रमों की धूम नहीं दिखी। इसकी वजह कोरोना महामारी थी। पंजाब में ऐसा पहली बार हुआ जब बैसाखी पर धूमधाम नहीं रही। हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग बंद रहा। लोगों ने घर में ही रहकर सरबत के भले की अरदास की।
फतेहगढ़ साहिब: गुरुद्वारे रहे बंद, घरों से सरबत के भले की अरदास
कोविड-19 के प्रकोप के चलते फतेहगढ़ साहिब के सभी एतिहासिक गुरुद्वारा साहिब बैसाखी पर बंद रहे और न के बराबर संगत माथा टेकने पहुंची। गुरुद्वारा साहिब के द्वार पर पुलिस का कड़ा पहरा भी रहा और पुलिस संगत को हाथ जोड़कर घर में ही रहने की अपील करती दिखी।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में खासला साजना दिवस को समर्पित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग डाले गए और सिख कौम की चड़दीकला की अरदास की। इस मौके गुरुद्वारा साहिब के मैनेजर नत्था सिंह ने बताया कि श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने बैसाखी वाले दिन 1699 को श्री आनंदपुर साहिब में सिख खालसा पंथ की नींव रखी थी।
उन्होंने बताया कि गुरुद्वारा साहिब में बैसाखी को समर्पित श्री अखंड पाठ साहिब के आज भोग डाले गए हैं। इसके अलावा विश्व भर में फैली महामारी के खत्म करने के लिए सरबत के भले की अरदास की गई है। इस मौके पर गुरुद्वारा साहिब के एडिशनल मैनेजर बलविंदर सिंह भमारसी, कर्मजीत सिंह, हरजिंदर सिंह पंजोली, हरजीत सिंह, बलजीत सिंह, शमशेर सिंह राठौर, सुरिंदर सिंह समाणा मौजूद थे। सुबह 11 बजे लोगों ने अपने घरों में रहकर बैसाखी का त्यौहार मनाया और छतों पर केसरी निशान लगाए।
साधू सिंह धर्मसोत ने घर से की अरदास
पंजाब के जंगलात मंत्री साधू सिंह धर्मसोत ने बैसाखी पर अपने परिवार के साथ सरबत के भले की अरदास की और सभी लोगों को बैसाखी की बधाई देते कहा कि श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने पंज प्यारों की रहनुमाई में सिख पंथ की साजना की थी और संगत को वचन दिया था कि जहां गुरु के पूर्ण रूप में पांच सिंह मौजूद होंगे, वहां मैं भी मौजूद रहूंगा।
जलियांवाला बाग में नहीं हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम
शहीद स्थली जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए किसी भी कार्यक्रम का आयोजन नहीं हुआ। केंद्र ने पहले इस बात की घोषणा कर दी थी कि जलियांवाला बाग अब 15 जून को खुलेगा। इस संबंध में जलियांवाला बाग के सचिव एस मुखर्जी ने एक बड़ा होर्डिंग मुख्य गेट के बाहर लगा दिया था। जलियांवाला बाग के प्रबंधकों ने मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर टीन लगाकर रास्ता बंद किया हुआ है। यह पहला अवसर है जब शहीद स्थली में शहीदों को श्रद्धासुमन भेंट करने के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।
कैप्टन ने घर में की सरबत के भले की अरदास
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह बैसाखी के मौके पर प्रदेश वासियों से घर पर ही रहकर 11 बजे अरदास करने की अपील की थी। जिसे भरपूर जन समर्थन मिला। सीएम ने सोमवार को लोगों का धन्यवाद किया।
मुख्यमंत्री ने अपने निवास स्थान से बैसाखी की अरदास की। उन्होंने यह आशा जताई कि लोगों द्वारा एकसाथ की गई अरदास पंजाब को सुरक्षित रखते हुए जानलेवा कोरोना वायरस के खिलाफ जीत यकीनी बनाएगी। कैप्टन ने लोगों से अपील की थी कि वह बैसाखी के पवित्र दिवस पर घरों में ही रहते हुए इस बार रिवायती तरीके से त्योहार मनाने से गुरेज करें। यही उनके, उनके बच्चों, राज्य और देश के हित में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय की मांग है कि सभी जिम्मेदारी से व्यवहार करें और इस महामारी को फैलने से रोकने में अपना योगदान दें।
बठिंडा: तख्त श्री दमदमा साहिब में माथा टेकने के लिए कुछ ही श्रद्धालु पहुंचे
कर्फ्यू के कारण सोमवार को तख्त श्री दमदमा साहिब में नाममात्र ही श्रद्धालु पहुंचे। तख्त के मैनेजर परमजीत सिंह ने सिख संगतों से अपील की थी कि वे टीवी चैनलों के माध्यम से लाइव प्रसारण देखकर ही बैसाखी मनाएं। तख्त श्री दमदमा साहिब में बैसाखी के मौके पर देश-विदेश से सिख संगत लाखों की तादाद में माथा टेकने पहुंचती थी। इसके अलावा तलवंडी साबो स्थित तख्त श्री दमदमा साहिब के बाहर बाजार लगता था लेकिन इस बार कोरोना के कारण ऐसा कुछ नहीं हुआ।
श्री आनंदपुर साहिब: गुरुघरों में नाममात्र संगत नतमस्तक
खालसा पंथ का महत्वपूर्ण त्यौहार बैसाखी श्री कीरतपुर साहिब तथा श्री आनंदपुर साहिब स्थित गुरुघरों में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने श्रद्धापूर्वक मनाया। इस दौरान संगत की आमद में भारी कमी रही। कर्फ्यू के चलते इक्का-दुक्का लोग ही गुरु घरों में नतमस्तक होने पहुंचे। तख्त श्री केसगढ़ साहिब में रखे गए पिछले दिनों से श्री अखंड पाठ जी के भोग डाले गए और सरबत के भले की अरदास के बाद शबद कीर्तन किया गया।
सिंह साहिब ज्ञानी रघुवीर सिंह ने लोगों से अपील की है कि कोरोना महामारी के चलते अपने घरों से बाहर न निकलें, अपने परिवार के साथ सिमरन करते हुए सरबत के भले की कामना करें। वहीं दूसरी ओर गुरुद्वारा श्री पातालपुरी साहिब, गुरुद्वारा श्री बाबा गुरदित्ता जी में भी श्री अखंड पाठ के भोग डाले गए और शबद कीर्तन किए गए।
मैनेजर बलविंदर सिंह ने बताया कि खालसा पंथ की सृजन का दिवस सिख कौम के लिए एतिहासिक त्यौहार है। रोपड़ के एतिहासिक गुरुद्वारा श्री भट्ठा साहिब में भी बैसाखी श्रद्धा भावना के साथ सादे ढंग से मनाई गई।