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Chandigarh News: कई सालों तक फाइनेंस कंपनी ने अतिरिक्त ब्याज दर के साथ वसूला ब्याज, अब लौटानी होगी रकम
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चंडीगढ। जिला उपभोक्ता आयोग ने फ्लैट सुविधा मुहैया करवाने के नाम पर बिना बताए अतिरिक्त ब्याज दर से पैसे वसूलने के मामले में सुनवाई करते हुए इंडिया बुल्स प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कोताही बरतने का दोषी करार दिया है। आयोग ने इंडिया बुल्स को शिकायतकर्ता की ओर से जमा करवाई राशि नौ प्रतिशत ब्याज समेत वापस करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए तीस हजार व केस में खर्च हुई राशि के रूप में 7500 रुपये देने के आदेश दिए हैं।
मोहाली जिला निवासी अनिल कुमार बब्बर, उनकी पत्नी ईशा रानी और बेटी पूजा बब्बर ने जिला उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने साल 2018 में इंडिया बुल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बद्दी (सोलन) के न्यू टाउन अपार्टमेंट में फ्लैट का इश्तिहार देखकर कंपनी से संपर्क किया था। कंपनी की ओर से भरोसा दिया गया संबंधित प्रोजेक्ट के सभी दस्तावेज चेक कर लिए गए हैं। फ्लैट लेने के फाइनेंस की सुविधा भी उपलब्ध है।
शिकायतकर्ता ने न्यू टाउन अपार्टमेंट में फ्लैट पाने के लिए इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से लोन लिया। इंडिया बुल्स से शिकायतकर्ता पक्ष ने 5.58 लाख रुपये का लोन 8.55 प्रतिशत ब्याज पर लिया। कुछ साल बाद शिकायतकर्ता को पता चला फाइनेंस कंपनी 8.5 प्रतिशत की बजाय 13.75 प्रतिशत का भारी दर से ब्याज वसूल रही है जबकि बाजार में ब्याज दर 7 से 8.5 प्रतिशत के बीच थी।
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फाइनेंस कंपनी की ओर से दलील दी गई कि रजिस्ट्री न होने के चलते प्रतिवादी ने होम लोन पर ब्याज दर बढ़ा दी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने इंडिया बुल्स प्राइवेट लिमिटेड को नौ प्रतिशत ब्याज दर के साथ रकम लौटाने के निर्देश दिए। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 30 हजार व केस में खर्च हुई राशि के रूप में 7500 रुपये देने के भी आदेश दिए।
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मोहाली जिला निवासी अनिल कुमार बब्बर, उनकी पत्नी ईशा रानी और बेटी पूजा बब्बर ने जिला उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने साल 2018 में इंडिया बुल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से बद्दी (सोलन) के न्यू टाउन अपार्टमेंट में फ्लैट का इश्तिहार देखकर कंपनी से संपर्क किया था। कंपनी की ओर से भरोसा दिया गया संबंधित प्रोजेक्ट के सभी दस्तावेज चेक कर लिए गए हैं। फ्लैट लेने के फाइनेंस की सुविधा भी उपलब्ध है।
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शिकायतकर्ता ने न्यू टाउन अपार्टमेंट में फ्लैट पाने के लिए इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से लोन लिया। इंडिया बुल्स से शिकायतकर्ता पक्ष ने 5.58 लाख रुपये का लोन 8.55 प्रतिशत ब्याज पर लिया। कुछ साल बाद शिकायतकर्ता को पता चला फाइनेंस कंपनी 8.5 प्रतिशत की बजाय 13.75 प्रतिशत का भारी दर से ब्याज वसूल रही है जबकि बाजार में ब्याज दर 7 से 8.5 प्रतिशत के बीच थी।
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फाइनेंस कंपनी की ओर से दलील दी गई कि रजिस्ट्री न होने के चलते प्रतिवादी ने होम लोन पर ब्याज दर बढ़ा दी है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता आयोग ने इंडिया बुल्स प्राइवेट लिमिटेड को नौ प्रतिशत ब्याज दर के साथ रकम लौटाने के निर्देश दिए। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 30 हजार व केस में खर्च हुई राशि के रूप में 7500 रुपये देने के भी आदेश दिए।