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बजट 2022: हरियाणा में अब दूसरे बच्चे के जन्म पर भी मिलेंगे पांच हजार रुपये, तीन किश्तों में मिलेगी राशि

Tue, 08 Mar 2022 06:39 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 08 Mar 2022 06:39 PM IST
सार

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में ‘गुरू-शिष्य’ योजना शुरू करने का एलान किया है। उन्होंने कहा है कि इस योजना के माध्यम से इस साल 25 हजार गुरु और 75 हजार शिष्यों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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Five thousand rupees will also be available on the birth of second child in Haryana
हरियाणा बजट 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का विस्तार किया है। जिसके तहत दूसरे बच्चे के जन्म पर महिलाओं को पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को बजट में कहा कि पीएमएमवीवाई (प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना ) के तहत गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को तीन किश्तों में पांच हजार रुपये की राशि दी जा रही है। इस योजना के तहत महिलाओं को पहले बच्चे के जन्म पर तीन किश्तों में पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है लेकिन अब इसका विस्तार करते हुए दूसरे बच्चे के जन्म पर भी यह राशि दी जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट में 33.7 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 2017.24 करोड़ रुपये आवंटित किए। उन्होंने कहा कि चार हजार प्ले स्कूलों के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ समेत क्षेत्रीय पदाधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया गया है। बाल कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा शीघ्र ही आंगनबाड़ी जाने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और विकास मानकों की निगरानी के लिए बाल संवर्धन प्रणाली लागू की जाएगी। परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए उसके पालन पोषण के अतिरिक्त पोषण सहायता प्रदान की जाएगी।
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25 हजार गुरु व 75 हजार शिष्य लेंगे ट्रेनिंग
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में ‘गुरू-शिष्य’ योजना शुरू करने का एलान किया है। उन्होंने कहा है कि इस योजना के माध्यम से इस साल 25 हजार गुरु और 75 हजार शिष्यों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को गुणवत्ता परक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने बजट पेश करते हुए कहा कि पुराने समय में कुशल शिल्पकार युवा प्रशिक्षुओं को अपने शिल्प का कौशल सिखाते थे। आधुनिक शिक्षा प्रणाली के आगमन पर यह परंपरा लुप्त हो गई है। जिसे फिर से शुरू किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवसाय और शिल्प में गुरू-शिष्य परंपरा को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय गुरु-शिष्य कौशल प्रशिक्षण तंत्र की स्थापना करेगा। जिसके तहत अनुभवी शिल्पकारों को नामांकन, मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया जाएगा। प्रमाणित शिल्पकारों को गुरु के रूप में नामांकित किया जाएगा। गुरु-शिष्यों को प्रशिक्षण देंगे और सीखने के अवसर प्रदान करेंगे। प्रशिक्षण के पूरा होने पर शिष्य का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण में एक लाख गुरु व शिष्यों को इसमें शामिल कर इसी साल इसका रिव्यू किया जाएगा। जिसके बाद इस योजना को अगले साल के लिए बढ़ाया जाएगा।

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