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पहले स्नातक चुनाव किए स्थगित, अब तारीख पे तारीख
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय ने 18 अगस्त को होने वाले सीनेट स्नातक वर्ग के चुनाव टाल दिए थे। अब इसे करवाने को लेकर दो तारीखें घोषित कर दी हैं। इसमें भी पीयू का पक्ष है कि अभी दिल्ली और उत्तराखंड से चुनाव करवाने की अनुमति मिलना बाकी है।
अगर ये राज्य अनुमति दे देते हैं तो 19 या 26 सितंबर में से किसी एक दिन चुनाव आयोजित करेंगे। इसकी जानकारी रजिस्ट्रार कम रिटर्निंग अफसर विक्रम नय्यर ने मीडिया को दी। स्नातक वर्ग के उम्मीदवारों का कहना है कि पीयू का रुख स्पष्ट नहीं है। इसे लेकर वीरवार को उम्मीदवार अन्य जत्थेबंदियों के साथ मिलकर प्रदर्शन करेंगे।
पीयू ने बुधवार को जानकारी दी कि 23 अगस्त को दिल्ली और उत्तराखंड को चुनाव करवाने को लेकर स्मरण पत्र भेजा गया है। अगर इन राज्यों से अनुमति मिल जाती है तो 19 या 26 सितंबर को स्नातक वर्ग के चुनाव आयोजित करवाए जाएंगे। चुनाव को लेकर पांच अन्य राज्यों हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ से अनुमति मिल चुकी है। विश्वविद्यालय ने उक्त तारीखों को चुनाव करवाने को लेकर पूरी तैयारी कर ली है।
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चुनाव करवाने को लेकर उम्मीदवार 12 दिन से संघर्षरत
स्नातक वर्ग के उम्मीदवार रविदंर उर्फ बिल्ला धालीवाल पिछले 12 दिन से सीनेट चुनाव की एक निश्चित तारीख की मांग को लेकर धरने पर बैठे है। उन्हें पूर्व सीनेटर, विद्यार्थी और शिक्षक जत्थेबंदियों के साथ किसान यूनियन के नेता भी समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। रविंदर ने बताया कि पीयू ने धरना टालने के लिए प्रेस नोट जारी किया है, इसमें चुनाव की कोई तय तारीख नहीं है। वीसी दफ्तर के बाहर जारी धरने में बुधवार को पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका, मुस्लिम महासभा पंजाब के सदस्यों के साथ पूर्व सीनेटर डीपीएस रंधावा और ललकार के सदस्य मौजूद रहे।
चुनाव की पक्की तारीख दे पीयू
पीयू को स्नातक वर्ग के चुनाव करवाने को लेकर एक पक्की तारीख जारी करनी चाहिए। पिछले हफ्ते सामूहिक प्रदर्शन के दौरान रजिस्ट्रार ने उम्मीदवारों के साथ बातचीत की थी। तब हमने पक्ष रखा था कि पीयू पूरी तैयारी के साथ एक निश्चित तारीख तय करें। बार-बार नई तारीख का एलान कर और बाद में चुनाव रद्द कर उम्मीवारों और मतदाताओं को गुमराह नहीं करें। -भूपिंदर बाठ, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग
दिल्ली और उत्तराखंड में बहुत कम मतदाता
पीयू असल में चुनावी प्रक्रिया का मजाक बना रही है, क्योंकि पिछले वर्षों में दिल्ली से मुश्किल से 250 और उत्तराखंड में देहरादून के एकमात्र केंद्र पर मात्र 50 मत पड़ते रहे हैं। अगर पीयू चुनाव करवाना चाहे तो अन्य राज्यों जहां 60 हजार से ज्यादा वोट पड़ते हैं, में चुनाव करवाए। इन दो राज्यों में चुनाव बाद में आयोजित करवाए जा सकते हैं। - डॉ. रूबिंदरनाथ शर्मा, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग
पीयू सिस्टम के साथ खेल रही
पीयू प्रशासन सिस्टम के साथ खेल रहा है। चुनाव आयोजित करवाने ही है तो पूरी तैयारी के साथ एक पक्की तारीख दें। बार-बार चुनाव की तारीख का एलान कर कुछ समय पहले ही चुनाव रद्द करना लोकतांत्रिक ढांचे का मजाक है। पिछली बार भी 18 अगस्त को बहुत से मतदाता बूथ पर पहुंच गए थे। पीयू मतदाताओं के साथ उम्मीदवारों को भी प्रताड़ित कर रही है। - डॉ. अमित भाटिया, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग
हाईकोर्ट पीयू के खिलाफ करे कार्रवाई
पीयू ने चुनाव का मजाक बना दिया है। हमारा पीयू से सवाल है कि जब अफसरों की भर्ती हुई, तब क्या इन्हें साक्षात्कार के लिए दो तारीखें दी गई थीं? फिर ये साढ़े तीन लाख मतदाताओं को दो तारीख कैसे दे रहे हैं। लोकतांत्रिक ढांचे का मजाक बनाने और हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने के लिए हाईकोर्ट को पीयू के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। -अधिवक्ता डीपीएस रंधावा, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग
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अगर ये राज्य अनुमति दे देते हैं तो 19 या 26 सितंबर में से किसी एक दिन चुनाव आयोजित करेंगे। इसकी जानकारी रजिस्ट्रार कम रिटर्निंग अफसर विक्रम नय्यर ने मीडिया को दी। स्नातक वर्ग के उम्मीदवारों का कहना है कि पीयू का रुख स्पष्ट नहीं है। इसे लेकर वीरवार को उम्मीदवार अन्य जत्थेबंदियों के साथ मिलकर प्रदर्शन करेंगे।
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पीयू ने बुधवार को जानकारी दी कि 23 अगस्त को दिल्ली और उत्तराखंड को चुनाव करवाने को लेकर स्मरण पत्र भेजा गया है। अगर इन राज्यों से अनुमति मिल जाती है तो 19 या 26 सितंबर को स्नातक वर्ग के चुनाव आयोजित करवाए जाएंगे। चुनाव को लेकर पांच अन्य राज्यों हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ से अनुमति मिल चुकी है। विश्वविद्यालय ने उक्त तारीखों को चुनाव करवाने को लेकर पूरी तैयारी कर ली है।
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चुनाव करवाने को लेकर उम्मीदवार 12 दिन से संघर्षरत
स्नातक वर्ग के उम्मीदवार रविदंर उर्फ बिल्ला धालीवाल पिछले 12 दिन से सीनेट चुनाव की एक निश्चित तारीख की मांग को लेकर धरने पर बैठे है। उन्हें पूर्व सीनेटर, विद्यार्थी और शिक्षक जत्थेबंदियों के साथ किसान यूनियन के नेता भी समर्थन देने के लिए पहुंच रहे हैं। रविंदर ने बताया कि पीयू ने धरना टालने के लिए प्रेस नोट जारी किया है, इसमें चुनाव की कोई तय तारीख नहीं है। वीसी दफ्तर के बाहर जारी धरने में बुधवार को पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका, मुस्लिम महासभा पंजाब के सदस्यों के साथ पूर्व सीनेटर डीपीएस रंधावा और ललकार के सदस्य मौजूद रहे।
चुनाव की पक्की तारीख दे पीयू
पीयू को स्नातक वर्ग के चुनाव करवाने को लेकर एक पक्की तारीख जारी करनी चाहिए। पिछले हफ्ते सामूहिक प्रदर्शन के दौरान रजिस्ट्रार ने उम्मीदवारों के साथ बातचीत की थी। तब हमने पक्ष रखा था कि पीयू पूरी तैयारी के साथ एक निश्चित तारीख तय करें। बार-बार नई तारीख का एलान कर और बाद में चुनाव रद्द कर उम्मीवारों और मतदाताओं को गुमराह नहीं करें। -भूपिंदर बाठ, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग
दिल्ली और उत्तराखंड में बहुत कम मतदाता
पीयू असल में चुनावी प्रक्रिया का मजाक बना रही है, क्योंकि पिछले वर्षों में दिल्ली से मुश्किल से 250 और उत्तराखंड में देहरादून के एकमात्र केंद्र पर मात्र 50 मत पड़ते रहे हैं। अगर पीयू चुनाव करवाना चाहे तो अन्य राज्यों जहां 60 हजार से ज्यादा वोट पड़ते हैं, में चुनाव करवाए। इन दो राज्यों में चुनाव बाद में आयोजित करवाए जा सकते हैं। - डॉ. रूबिंदरनाथ शर्मा, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग
पीयू सिस्टम के साथ खेल रही
पीयू प्रशासन सिस्टम के साथ खेल रहा है। चुनाव आयोजित करवाने ही है तो पूरी तैयारी के साथ एक पक्की तारीख दें। बार-बार चुनाव की तारीख का एलान कर कुछ समय पहले ही चुनाव रद्द करना लोकतांत्रिक ढांचे का मजाक है। पिछली बार भी 18 अगस्त को बहुत से मतदाता बूथ पर पहुंच गए थे। पीयू मतदाताओं के साथ उम्मीदवारों को भी प्रताड़ित कर रही है। - डॉ. अमित भाटिया, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग
हाईकोर्ट पीयू के खिलाफ करे कार्रवाई
पीयू ने चुनाव का मजाक बना दिया है। हमारा पीयू से सवाल है कि जब अफसरों की भर्ती हुई, तब क्या इन्हें साक्षात्कार के लिए दो तारीखें दी गई थीं? फिर ये साढ़े तीन लाख मतदाताओं को दो तारीख कैसे दे रहे हैं। लोकतांत्रिक ढांचे का मजाक बनाने और हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने के लिए हाईकोर्ट को पीयू के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। -अधिवक्ता डीपीएस रंधावा, उम्मीदवार, स्नातक वर्ग