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आखिर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बुत पर फायरिंग किसने और क्यों की?
रमेश शुक्ला सफर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Updated Tue, 03 Oct 2017 10:49 AM IST
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बुत पर फायरिंग
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देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करवाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बुत पर फायरिंग की गई, लेकिन यह पता नहीं चला कि किसने की और क्यों की? घटना पंजाब के अमृतसर में हुई थी।
भले ही दुनिया जानती है कि बापू की हत्या नत्थूराम गोडसे ने की थी, लेकिन अमृतसर के कंपनी बाग में लगे राष्ट्रपिता के बुत पर फायरिंग करने की गुस्ताखी किसने की, इसका खुलासा आज तक नहीं हो सका। जबकि मामले की शिकायत के आधार पर इसकी जांच के आदेश प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किए गए थे।
यह आदेश पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी को दिए गए। मामले में जांच तो नहीं हुई, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय को नगर निगम ने गोलमोल जवाब जरूर भेज दिया। जवाब में बस इतना कहा गया कि गांधी जी के बुत की देखभाल उचित तरीके से हो रही है।
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भले ही दुनिया जानती है कि बापू की हत्या नत्थूराम गोडसे ने की थी, लेकिन अमृतसर के कंपनी बाग में लगे राष्ट्रपिता के बुत पर फायरिंग करने की गुस्ताखी किसने की, इसका खुलासा आज तक नहीं हो सका। जबकि मामले की शिकायत के आधार पर इसकी जांच के आदेश प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किए गए थे।
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यह आदेश पंजाब सरकार के चीफ सेक्रेटरी को दिए गए। मामले में जांच तो नहीं हुई, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय को नगर निगम ने गोलमोल जवाब जरूर भेज दिया। जवाब में बस इतना कहा गया कि गांधी जी के बुत की देखभाल उचित तरीके से हो रही है।
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साल 2015 में की गई थी फायरिंग
gandhi ji
साल 2015 में अमृतसर के कंपनी बाग में महात्मा गांधी के बुत पर किसी शरारती तत्व ने फायरिंग की थी। मामला आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट पीसी शर्मा तक पहुंचा तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को शिकायत भेजते हुए कहा था कि मामले में सरकार और जिला प्रशासन की जवाबदेही सामने लानी चाहिए।
आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट पीसी शर्मा का कहना है कि कितनी दिलचस्प बात है कि शिकायत पर पंजाब सरकार ने गौर नहीं फरमाया। हालांकि पंजाब के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी ने अमृतसर के नगर निगम से इसका जवाब मांगा गया था।
बाद में निगम ने जांच के आदेश को पुलिस को सौंपने के बजाय गोलमोल चिट्ठी भेजकर सारे मामले की लीपापोती कर दी। अब हालत यह इस बुत को बुलेटप्रूफ शीशे से घेर दिया गया है।
आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट पीसी शर्मा का कहना है कि कितनी दिलचस्प बात है कि शिकायत पर पंजाब सरकार ने गौर नहीं फरमाया। हालांकि पंजाब के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी ने अमृतसर के नगर निगम से इसका जवाब मांगा गया था।
बाद में निगम ने जांच के आदेश को पुलिस को सौंपने के बजाय गोलमोल चिट्ठी भेजकर सारे मामले की लीपापोती कर दी। अब हालत यह इस बुत को बुलेटप्रूफ शीशे से घेर दिया गया है।