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नेक्टर लाइफ सांइस कंपनी में भीषण आग, सब जलकर खाक
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 06 Jun 2016 01:18 AM IST
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नेक्टर लाइफ साइंस कंपनी की यूनिट में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
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बरवाला रोड स्थित गांव हरिपुर हिंदुआ में शुक्रवार देर रात दवा बनाने वाली नेक्टर लाइफ साइंसेज केमिकल कंपनी में आग लगने से करोड़ों रुपये का नुकसान हो गया।
आग कंपनी के सॉल्वेंट रिकवरी प्लांट में लगी, जिसमें प्लांट, मशीनरी व करोड़ों रुपये के केमिकल पदार्थ जल कर राख हो गए। आग लगने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इसकी जांच की जा रही है।
कंपनी में आग लगने से कई ब्लास्ट भी हुए। इस कारण आसपास के रिहायशी क्षेत्र में दहशत फैल गई। चार मंजिला प्लांट की ऊंची लपटों व धमाकों से आसपास के गांवों के लोग भी डरकर घरों से बाहर आ गए। डेराबस्सी से तीन, चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली व दप्पर स्टील स्ट्रिप्स कंपनी की एक-एक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां करीब ढाई घंटे बाद आग पर काबू पा सकीं।
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जानकारी के अनुसार, सैकड़ों एकड़ में फैली नेक्टर कंपनी में अब तक हुए आधा दर्जन हादसों में यह सबसे बड़ा फायर हादसा है। कंपनी के यूनिट-2 के साल्वेंट रिकवरी यूनिट में रात करीब सवा नौ बजे आग लगी। जिस समय आग लगी, उस समय यूनिट-2 में करीब 150 कर्मचारी काम कर रहे थे, जबकि आग लगने वाले प्लांट में 8 कर्मचारी काम कर रहे थे। सभी कर्मचारियों ने भाग कर अपनी जान बचाई। आग लगने से फैक्टरी व आसपास के रिहायशी क्षेत्र में अफरातफरी मच गई।
चार मंजिल ऊंची उठी पलटें
रिकवरी प्लांट चार मंजिला लोहे का बना हुआ है। ज्वलनशील केमिकल होने के कारण कुछ ही देर में आग की लपटें उठने लगीं। चार मंजिल से ऊंची लपटें रात में कई किमी दूर से दिखाई दे रही थीं। डेराबस्सी के फायर अफसर मनजीत सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना दमकल विभाग को 9 बजकर 22 मिनट मिली थी। रिकवरी प्लांट के चारों ओर प्लास्टिक व ड्रमों के वेस्ट के कारण दमकल गाड़ियां करीब 200 मीटर दूर खड़ी करनी पड़ीं।
शेड के सपोर्ट नहीं झेल पाए तापमान
फायर अफसर ने बताया कि चार मंजिला शेड को सपोर्ट करने वाले लोहे पिलर्स तापमान नहीं झेल सके और लफकर मुड़ गए। इससे तीनों मंजिल पर पड़े सॉल्वेंट लीक होकर नीचे आग में घी की तरह गिरते गए और आग चार मंजिल तक फैलकर और भयावह हो गई। बीच में ड्रमों के धमाके होते रहे। प्लांट में आधा दर्जन रिएक्टर्स थे। इनमें एक रिएक्टर टूटकर गिरा गया। गनीमत रही कि वह फटा नहीं।
1500 लीटर फोम का हुआ इस्तेमाल
फायर अफसर ने कहा कि कंपनी में वाटर स्टोरेज टैंकों में पर्याप्त मात्रा में पानी था। इस कारण किसी दमकल गाड़ी को बाहर चक्कर नहीं काटना पड़ा। आग बुझाने में करीब 1500 लीटर फोम का इस्तेमाल किया गया। इसे कंपनी ने ही मुहैया कराया।
20 करोड़ से अधिक का नुकसान होने की संभावना
कंपनी सूत्रों के अनुसार, आग लगने से 20 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान होने की संभावना है। सीईओ दिनेश दुआ ने कहा कि नुकसान करोड़ों में है, जिसका वास्तविक आकलन मुंबई से पहुंची एक्सपर्ट्स टीम कर रही है। आग लगने का कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण कई बार फायर फ्लैश होने के चांस बढ़ जाते हैं।
कंपनी की फायर फाइटिंग टीम व फायर सेफ्टी एंड कंट्रोल उपाय पूरी तरह वर्किंग में थे। इससे आग को समय रहते काबू पाने में मदद मिली। एक्सपर्ट्स की टीम आग लगने का कारण भी खोज रही है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल पहले ही यह नया प्लांट शुरू हुआ था। फायर अफसर मनजीत सिंह ने बताया कि कंपनी से नए प्लांट के बारे में मंजूरी पत्र, हताहतों की संख्या और नुकसान के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है।
पहले भी कई बार लग चुकी है आग
इसकंपनी में इससे पहले भी आग लगने की करीब आधा दर्जन घटनाएं हो चुकी है। यह घटना आग लगने की अन्य सभी घटनाओं से बड़ी है।
कंपनी के यूनिट की मंजूरी को लेकर बना असमंजस
कंपनी के रिकवरी यूनिट में आग लगने के बाद इसकी मंजूरी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। करीब डेढ़ साल पहले लगाए प्लांट की मंजूरी के बारे में कंपनी प्रबंधकों ने दावा किया कि उनके पास हरेक तरह की मंजूरी है। वहीं फायर अफसर मनजीत सिंह ने कहा कि इसकी जांच की जा रही है कि कंपनी के पास मंजूरी है कि नहीं।
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आग कंपनी के सॉल्वेंट रिकवरी प्लांट में लगी, जिसमें प्लांट, मशीनरी व करोड़ों रुपये के केमिकल पदार्थ जल कर राख हो गए। आग लगने का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इसकी जांच की जा रही है।
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कंपनी में आग लगने से कई ब्लास्ट भी हुए। इस कारण आसपास के रिहायशी क्षेत्र में दहशत फैल गई। चार मंजिला प्लांट की ऊंची लपटों व धमाकों से आसपास के गांवों के लोग भी डरकर घरों से बाहर आ गए। डेराबस्सी से तीन, चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली व दप्पर स्टील स्ट्रिप्स कंपनी की एक-एक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां करीब ढाई घंटे बाद आग पर काबू पा सकीं।
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जानकारी के अनुसार, सैकड़ों एकड़ में फैली नेक्टर कंपनी में अब तक हुए आधा दर्जन हादसों में यह सबसे बड़ा फायर हादसा है। कंपनी के यूनिट-2 के साल्वेंट रिकवरी यूनिट में रात करीब सवा नौ बजे आग लगी। जिस समय आग लगी, उस समय यूनिट-2 में करीब 150 कर्मचारी काम कर रहे थे, जबकि आग लगने वाले प्लांट में 8 कर्मचारी काम कर रहे थे। सभी कर्मचारियों ने भाग कर अपनी जान बचाई। आग लगने से फैक्टरी व आसपास के रिहायशी क्षेत्र में अफरातफरी मच गई।
चार मंजिल ऊंची उठी पलटें
रिकवरी प्लांट चार मंजिला लोहे का बना हुआ है। ज्वलनशील केमिकल होने के कारण कुछ ही देर में आग की लपटें उठने लगीं। चार मंजिल से ऊंची लपटें रात में कई किमी दूर से दिखाई दे रही थीं। डेराबस्सी के फायर अफसर मनजीत सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना दमकल विभाग को 9 बजकर 22 मिनट मिली थी। रिकवरी प्लांट के चारों ओर प्लास्टिक व ड्रमों के वेस्ट के कारण दमकल गाड़ियां करीब 200 मीटर दूर खड़ी करनी पड़ीं।
शेड के सपोर्ट नहीं झेल पाए तापमान
फायर अफसर ने बताया कि चार मंजिला शेड को सपोर्ट करने वाले लोहे पिलर्स तापमान नहीं झेल सके और लफकर मुड़ गए। इससे तीनों मंजिल पर पड़े सॉल्वेंट लीक होकर नीचे आग में घी की तरह गिरते गए और आग चार मंजिल तक फैलकर और भयावह हो गई। बीच में ड्रमों के धमाके होते रहे। प्लांट में आधा दर्जन रिएक्टर्स थे। इनमें एक रिएक्टर टूटकर गिरा गया। गनीमत रही कि वह फटा नहीं।
1500 लीटर फोम का हुआ इस्तेमाल
फायर अफसर ने कहा कि कंपनी में वाटर स्टोरेज टैंकों में पर्याप्त मात्रा में पानी था। इस कारण किसी दमकल गाड़ी को बाहर चक्कर नहीं काटना पड़ा। आग बुझाने में करीब 1500 लीटर फोम का इस्तेमाल किया गया। इसे कंपनी ने ही मुहैया कराया।
20 करोड़ से अधिक का नुकसान होने की संभावना
कंपनी सूत्रों के अनुसार, आग लगने से 20 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान होने की संभावना है। सीईओ दिनेश दुआ ने कहा कि नुकसान करोड़ों में है, जिसका वास्तविक आकलन मुंबई से पहुंची एक्सपर्ट्स टीम कर रही है। आग लगने का कारण पूछने पर उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण कई बार फायर फ्लैश होने के चांस बढ़ जाते हैं।
कंपनी की फायर फाइटिंग टीम व फायर सेफ्टी एंड कंट्रोल उपाय पूरी तरह वर्किंग में थे। इससे आग को समय रहते काबू पाने में मदद मिली। एक्सपर्ट्स की टीम आग लगने का कारण भी खोज रही है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल पहले ही यह नया प्लांट शुरू हुआ था। फायर अफसर मनजीत सिंह ने बताया कि कंपनी से नए प्लांट के बारे में मंजूरी पत्र, हताहतों की संख्या और नुकसान के बारे में रिपोर्ट मांगी गई है।
पहले भी कई बार लग चुकी है आग
इसकंपनी में इससे पहले भी आग लगने की करीब आधा दर्जन घटनाएं हो चुकी है। यह घटना आग लगने की अन्य सभी घटनाओं से बड़ी है।
कंपनी के यूनिट की मंजूरी को लेकर बना असमंजस
कंपनी के रिकवरी यूनिट में आग लगने के बाद इसकी मंजूरी को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। करीब डेढ़ साल पहले लगाए प्लांट की मंजूरी के बारे में कंपनी प्रबंधकों ने दावा किया कि उनके पास हरेक तरह की मंजूरी है। वहीं फायर अफसर मनजीत सिंह ने कहा कि इसकी जांच की जा रही है कि कंपनी के पास मंजूरी है कि नहीं।