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लुधियाना में प्लास्टिक फैक्ट्री में लगी भीषण आग, नौ ने भागकर बचाई जान, एक मजदूर जिंदा जला

Fri, 14 Feb 2020 07:04 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना ( पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना ( पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 14 Feb 2020 07:04 PM IST
सार

  • दूसरे घायल मजदूर को इलाज के लिए पहुंचाया गया अस्पताल।
  • शार्ट सर्किट से लगी आग, 20 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने पाया काबू।

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fire breaks out at Plastic factory, a worker burnt alive
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

कंगनवाल जुगियाना रोड पर स्थित गर्ग प्लास्टिक फैक्ट्री में गुरुवार की देर रात अचानक आग लग गई। जिस समय फैक्ट्री में आग लगी उस समय दस लोग काम कर रहे थे। जिनमें से एक युवक जिंदा जल गया, जबकि एक झुलस गया। जिसे इलाज के लिए अस्पताल दाखिल कराया गया। देर रात लगी आग से आसपास में भगदड़ मच गई। 

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आग की लपटे दूर-दूर तक दिखाई दे रही थीं। सूचना मिलने के बाद करीब 20 दमकल गाड़ियों ने पानी की बौछारों से आग पर काबू पाया। आग से जिंदा जले मजदूर की पहचान नीरज चौधरी (22) के रूप में हुई है। जो बिहार के जिला बक्सर का रहने वाला था। जबकि घायल की पहचान सोनू के रूप में हुई है। जांच के बाद साहनेवाल पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए नीरज का शव सिविल अस्पताल भिजवा दिया है। 
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जानकारी के अनुसार गर्ग प्लास्टिक फैक्ट्री में गुरुवार की रात को नीतीश चौधरी, अमित चौधरी, पंकज कुमार, जिंदा कुमार, संदीप कुमार,  राहुल कुमार काम करने में लगे हुए थे। जबकि ठेकेदार अशोक चौधरी, पीयूष, नीरज चौधरी के साथ सोनू ऊपर दूसरी मंजिल पर सो रहे थे। देर रात को शार्ट सर्किट की वजह से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भयंकर रूप धारण कर लिया। 

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इसी दौरान आग की लपटे दूर-दूर तक दिखाई देने लगी। काम करने वाले सभी मजदूर बाहर की तरफ भागे और उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए। सभी आग पर काबू पाने में लग गए। इसी दौरान किसी ने इसकी जानकारी फायर ब्रिगेड को दी। उससे पहले राहुल कुमार ऊपर सो रहे चारों को जगाने के लिए चला गया। जब वह आने लगा तो आग ज्यादा फैल चुकी थी। 

राहुल जान बचाते किसी तरह फैक्ट्री के सामने से दूसरी छत पर चला गया। ठेकेदार अशोक चौधरी और प्रदीप ने भी ऐसा ही किया। जल्दबाजी में सोनू भी निकल गया लेकिन नीरज की नींद नहीं टूटी। जब उसकी नींद खुली आग काफी फैल चुकी थी। नीरज ऊपर जाने की बजाय नीचे चला गया और आग से निकलते हुए वहीं बेहोश होकर गिर गया। 

फायर कर्मचारी आग पर काबू पाते रहे लेकिन किसी को नीरज के बारे में कुछ पता नहीं था। जल्दबाजी में मजदूरों को भी नीरज की याद नहीं आई। करीब साढ़े तीन घंटे बाद जब आग कम हुई तो शव का पता चला। जिसके बाद पुलिस की मदद से शव को बाहर निकाला गया और सिविल अस्पताल भेजा गया। पहले तो मजदूर की पहचान करने की कोशिश की गई लेकिन किसी को मजदूर के बारे में कुछ पता नहीं था। जब अंदर सो रहे अन्य मजदूरों को बुलाया गया तो पता चला कि नीरज बाहर नहीं है। इसके बाद पता चला कि नीरज की ही मौत हुई है। 

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