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चंडीगढ़: पीजीआई के नेहरू हॉस्पिटल की कैंटीन में आग, मरीजों को सुरक्षित निकाला गया

Mon, 27 Jan 2020 09:19 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 27 Jan 2020 09:19 PM IST
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Fire breaks out at PGI chandigarh's fifth floor canteen
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

पीजीआई के नेहरू हास्पिटल की पांचवीं मंजिल में स्थित डॉक्टर कैंटीन किचन में सोमवार सुबह छह बजे आग लग गई। आग लगते ही पांचवीं और चौथी मंजिल में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में कैंटीन जलकर राख हो गई। गनीमत रही कि कैंटीन से आग आगे नहीं बढ़ पाई। पीजीआई के फायरकर्मियों ने कैंटीन में ही आग को काबू पा लिया। लेकिन आग की लपटें इतनी ज्यादा थी कि यदि समय पर आग नहीं बुझती तो बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। 

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एहतियात के तौर पर पांचवीं मंजिल के मेल सर्जिकल वार्ड और प्राइवेट रूम के मरीजों को वहां से शिफ्ट करना पड़ा। इस दौरान उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण कढ़ाई से गर्म तेल से निकली आग की लपटे बताई जा रही हैं।
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आग की लपटों ने ऊपर रखें कागज और गत्ते को पकड़ लिया और देखते-देखते किचन का अंदर का एरिया जलकर राख हो गया। फायरकर्मियों के मुताबिक सुबह छह बजकर 10 मिनट पर कैंटीन किचन में आग लगने की कॉल आई। सूचना मिलते ही पीजीआई के फायरकर्मी ऊपर पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश की। 

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इस दौरान नगर निगम फायरकर्मी को भी सूचना दी। सूचना मिलते ही सेक्टर 11, 32 और सेक्टर 17 से तीन फायर टेंडर पीजीआई के लिए रवाना हुए। लेकिन जब तक वे पीजीआई पहुंचते, तब तक आग पर काबू पा लिया गया था। अच्छी बात यह रही कि आग से कोई हताहत नहीं हुआ है। लेकिन पांचवीं मंजिल के कॉरिडोर में धुंआ भर गया था। पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर कुमार गौरव धवन ने बताया कि आग को समय रहते काबू पा लिया गया है। आग से किसी को नुकसान नहीं पहुंचा है।

पांचवीं मंजिल के मरीजों को शिफ्ट किया गया
आग लगते ही पूरे कॉरिडोर में शोर मच गया। आग की लपटें बढ़ती देख सुरक्षाकर्मियों ने एहतियात के तौर प्राइवेट रूम और मेल सर्जिकल वार्ड के मरीजों को शिफ्ट चौथी और तीसरी मंजिल में शिफ्ट कर दिया। धुआं निकालने के लिए कॉरिडोर के शीशे तोड़ दिए। शिफ्ट किए गए मरीजों को करीब 45 मिनट के बाद वापस दोबारा वार्ड में लाया गया। हालांकि देर शाम कॉरिडोर में धुआं महसूस किया जा रहा था। इस दौरान मरीज के साथ आए अटेंडेंट ने धुएं से एलर्जी और आंख में जलन की शिकायत बताई।

ऐन वक्त पर सिलेंडर को बाहर किया
कैंटीन के किचन में चार से पांच सिलेंडर भी रखे थे। आग लगते ही कर्मियों ने किचन के शीशे तोड़कर बाहर फेंक दिए गए। जिस तरह से आग की लपटें निकल रही थीं, उस हिसाब से यदि आग सिलेंडर तक पहुंच जाती तो तबाही मचना तय थी। लेकिन कर्मियों ने सूझबूझ से काम लिया और सिलेंडर को बाहर फेंक दिया। किचन के सामने मेल सर्जिकल वार्ड है, जबकि कुछ दूरी पर प्राइवेट वार्ड के मरीज दाखिल होते हैं।

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