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हरियाणाः हड़ताली स्वास्थ्य कर्मियों पर सख्त हुई सरकार, 300 के खिलाफ केस दर्ज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 16 Sep 2018 12:48 PM IST
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हड़ताल में बैठे स्वास्थ्य कर्मी
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हरियाणा में बीते 27 अगस्त से हड़ताल कर रहे बहुद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों पर सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। शुक्रवार को विभिन्न जिलों में एस्मा के तहत लगभग तीन सौ और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। अब तक 1500 स्वास्थ्य कर्मी बर्खास्त किए जा चुके हैं, जबकि 891 पर केस दर्ज किए जा चुके हैं और 490 को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इसके बावजूद मांगों को लेकर कर्मचारी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। वहीं, सरकार भी हड़ताल खत्म कराने के लिए कर्मचारियों पर लगातार दबाव बना रही है। मिशन डायरेक्टर ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर ये निर्देश दिए हैं कि उनके जिलों के अस्पतालों, सीएचसी व पीएचसी में जो भी एएनएम स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर हड़ताल में भाग ले रही हैं, उन्हें काम पर लौटने के लिए 24 घंटे का समय दिया जाए। यदि वे काम पर नहीं लौटते हैं तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाए।
ज्यादा सक्रिय नेताओं पर केस दर्ज
महिला स्वास्थ्य कर्मियों को बर्खास्त करने की कार्रवाई के अतिरिक्त हड़ताल में ज्यादा सक्रिय स्वास्थ्य कर्मी नेताओं पर केस दर्ज किए जा रहे है। अभी तक 891 हड़ताली कर्मचारियों व नेताओं पर एस्मा के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
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वित्त और स्वास्थ्य विभाग आमने-सामने
स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। हालांकि अब सीएम मनोहर लाल ने खुद मध्यस्थता कर हड़ताल को खत्म करने का जिम्मा उठाया है। बहुद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष ओमपति कादियान, महासचिव हरिनिवास व प्रवक्ता संदीप कुंडू के अनुसार स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उनकी मांगों को मानकर इस संदर्भ में फाइल वित्तीय क्लीयरेंस के लिए वित्त विभाग को भेज दी गई है। लेकिन वित्त विभाग का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई फाइल ही नहीं है। उनके अनुसार दोनों विभाग गोलमोल जवाब दे रहे हैं, लिहाजा यदि हड़ताल और लंबी चली तो इसका जिम्मेवार राज्य सरकार होगी।
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इसके बावजूद मांगों को लेकर कर्मचारी अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। वहीं, सरकार भी हड़ताल खत्म कराने के लिए कर्मचारियों पर लगातार दबाव बना रही है। मिशन डायरेक्टर ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर ये निर्देश दिए हैं कि उनके जिलों के अस्पतालों, सीएचसी व पीएचसी में जो भी एएनएम स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर हड़ताल में भाग ले रही हैं, उन्हें काम पर लौटने के लिए 24 घंटे का समय दिया जाए। यदि वे काम पर नहीं लौटते हैं तो उन्हें बर्खास्त कर दिया जाए।
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ज्यादा सक्रिय नेताओं पर केस दर्ज
महिला स्वास्थ्य कर्मियों को बर्खास्त करने की कार्रवाई के अतिरिक्त हड़ताल में ज्यादा सक्रिय स्वास्थ्य कर्मी नेताओं पर केस दर्ज किए जा रहे है। अभी तक 891 हड़ताली कर्मचारियों व नेताओं पर एस्मा के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
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वित्त और स्वास्थ्य विभाग आमने-सामने
स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। हालांकि अब सीएम मनोहर लाल ने खुद मध्यस्थता कर हड़ताल को खत्म करने का जिम्मा उठाया है। बहुद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष ओमपति कादियान, महासचिव हरिनिवास व प्रवक्ता संदीप कुंडू के अनुसार स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उनकी मांगों को मानकर इस संदर्भ में फाइल वित्तीय क्लीयरेंस के लिए वित्त विभाग को भेज दी गई है। लेकिन वित्त विभाग का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई फाइल ही नहीं है। उनके अनुसार दोनों विभाग गोलमोल जवाब दे रहे हैं, लिहाजा यदि हड़ताल और लंबी चली तो इसका जिम्मेवार राज्य सरकार होगी।