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एक मां का दर्दः 'फाइनांसर कहता है- बेटी को मेरे पास गिरवी रख दो, 25 हजार कर्ज माफ कर दूंगा'

Fri, 03 Jan 2020 10:14 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 03 Jan 2020 10:14 AM IST
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Financer Tortured Labourer Family to Recover Loan, Financial Crisis
फाइल फोटो
किसी की मजबूरी, लाचारी और गरीबी का फाइनांसर किस हद तक नाजायज फायदा उठाते हैं, इसका एक शर्मनाक उदाहरण सामने आया है। पंजाब के लुधियाना में यूपी के हरदोई जिले से मजदूरी करने आए एक परिवार ने 25 हजार रुपये का कर्ज लिया। अब फाइनांसर कर्ज के बदले अपने कर्मचारियों और पुलिस के जरिए दबाव बनाना शुरू कर दिया कि परिवार अपनी 21 वर्षीय बेटी को उसके घर पर छोड़ दे। अगर वे ऐसा करते हैं तो वह उनका सारा कर्ज माफ कर देगा।
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फाइनांसर पर आरोप हैं कि उसने महिला और उसकी बेटी पर दबाव बनाकर कई कागजों पर साइन करवाए और पूरे परिवार के खिलाफ धोखाधड़ी के अलावा दलित उत्पीड़न एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस भी दर्ज करवा दिए। वीरवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में लुधियाना निवासी मजदूरों ने अपने परिवार सहित पहुंचकर पत्रकारों को आपबीती सुनाई। इनके साथ लुधियाना के पूर्व विधायक तरसेम जोधा और पंचायत यूनियन मोहाली के अध्यक्ष बलविंदर सिंह कुंभड़ा भी मौजूद रहे।
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इन्हीं परिवारों में एक शख्स रोहित कुमार भी था, जिनके नाम पर फाइनांसर ने पीड़ित परिवार के खिलाफ पुलिस केस दर्ज कराया था। रोहित कुमार ने पत्रकारों को बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनके नाम से पुलिस को पीड़ित परिवार के खिलाफ शिकायत दी गई है तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मिलकर लिखित बयान दिया कि उनकी तरफ से कभी कोई शिकायत नहीं दी गई।
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घर पर राशन भेजता है, बेटी को भेजने का दबाव डालता है

पत्रकारों से बात करते हुए पीड़ित परिवार की महिला ने बताया कि 50 वर्षीय फाइनांसर जसविंदर सिंह उर्फ जस्सी की नजर उनकी 21 वर्षीय बेटी पर थी। बेटी को फुसलाने के लिए फाइनांसर एक ब्यूटी पार्लर संचालिका के जरिए उनके घर राशन आदि भी भेजता रहा है।

जब लड़की फाइनांसर के बहकावे में नहीं आई तो उसने अपने एक कर्मचारी मोनू के जरिए परिवार के खिलाफ राज्य एससी-एसटी आयोग में अनुसूचित जाति उत्पीड़न की शिकायत देकर परिवार के मुखिया को गिरफ्तार करवा दिया।

पीड़ित महिला ने बताया कि इसी दौरान मोनू और एक महिला पुलिस अधिकारी ने उन पर दबाव बनाया कि मामला रफा दफा करना है तो फाइनांसर जस्सी से मिलें। जव वे अपनी बेटी के साथ फाइनांसर से मिलने पहुंची तो उन्हें डरा धमकाकर पंजाबी में लिखे कई कागजों पर साइन कराए गए।

डर और दबाव के चलते जवान बेटे की जान गई
पीड़ित परिवार के मुखिया ने बताया कि वे बीते दो साल से फाइनांसर के अत्याचार झेल रहे हैं। पुलिस को शिकायतें भी दीं, लेकिन पुलिस वाले भी उक्त फाइनांसर से समझौता करने का दबाव बनाते हैं। उन्होंने बताया कि डर और दबाव के चलते उनका 22 साल का बेटा डिप्रेशन का शिकार हो गया और पिछले साल उसकी मौत हो गई।

उन्होंने अपना बेटा खोया, वहीं उनके बेटे के ससुर की भी नए साल के पहले दिन मौत गई है। वे अपने दामाद के असमय जाने से अवसाद में थे। वे काफी समय से परिवार सहित छिपकर रह रहे हैं। उनकी बेटी जिस जगह नौकरी करती थी, उस रास्ते पर भी फाइनांसर ने अपने आदमी लगा दिए, जिसके चलते उनकी बेटी को भी नौकरी छोड़नी पड़ी।

फाइनांसर ने आरोपों का खंडन किया

फाइनांसर जसविंदर जस्सी से जब फोन पर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने सभी आरोपों को नकार दिया। उन्होंने परिवार के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रहे धोखाधड़ी के केस और उसके तहत जारी समन के ऑर्डर और एफआईआर की प्रतियां भेजीं। उन्होंने कहा कि उनका एक कामरेड से पुराना झगड़ा है और यह सारा ड्रामा उनके द्वारा ही रचा गया है।

पीड़ित परिवार के बारे में जसविंदर ने कहा कि उक्त परिवार लुधियाना में राहगीरों से लूटपाट की घटनाओं में शामिल रहा है और इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 336 के तहत केस भी दर्ज है। उन्होंने कहा कि रोहित ने उनसे 10 लाख रुपये का कर्ज लिया है, जिसमें से कोर्ट के आदेश के बाद उसने अब तक सिर्फ एक लाख रुपये लौटाए हैं और कोर्ट उसे पीओ करार दे चुका है।

बेटी पर बुरी नजर रखने के पीड़ित परिवार के आरोप का जवाब देते हुए जसविंदर ने कहा कि इस परिवार ने मकान खरीदने के लिए चार लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसे लौटाने में देरी होने पर उनकी एक लाख रुपये की बयाना राशि जब्त हो गई। मोनू ने इसी मामले में परिवार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी।

पैसा नहीं लौटाने पर पुलिस ने मां-बेटी को गिरफ्तार कर लिया तो बेटी ने उन पर ये आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि मां-बेटी के खिलाफ अब भी हाईकोर्ट में केस लंबित है।
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