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Hindi News ›   Chandigarh ›   Final Salute to Martyre Sub Major Satpal

देखिए, सीमा पर शहीद सूबेदार मेजर को अंतिम सलामी

Mon, 05 Jan 2015 06:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ढांड
ब्यूरो/अमर उजाला, ढांड Updated Mon, 05 Jan 2015 06:02 PM IST
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Final Salute to Martyre Sub Major Satpal

श्रीनगर में शहीद हुए सूबेदार मेजर सतपाल सिंह (49) का उनके पैतृक गांव जड़ौला में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

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सेना व पुलिस के अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। सतपाल के शहीद होने की सूचना मिलते ही उसके घर पर शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा।

सूबेदार मेजर सतपाल सिंह 27 पंजाब रेजीमेंट में 1984 में बतौर सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उसके बाद सात राष्ट्रीय रायफल पंजाब में सूबेदार मेजर के पद पर पदोन्नत हुए।

सेना से 1812 रॉकेट रेजिमेंट अंबाला के अधिकारियों व हरियाणा पुलिस के जवानों ने गांव में पार्थिव शव को सलामी दी। इसके बाद हरियाणा पुलिस के पांच जवानों ने एक राउंड व सेना के आठ जवानों ने तीन राउंड फायर के साथ सलामी देकर अंतिम विदाई दी।

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18 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए थे सतपाल

Final Salute to Martyre Sub Major Satpal

शहीद सूबेदार मेजर 18 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए थे। देश सेवा का जज्बा सतपाल के दिल में शुरू से ही था और यही जज्बा उन्हें सेना में ले गया।

कबड्डी के खिलाड़ी के रूप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके सतपाल सेना में भी कबड्डी खेलते थे। वर्तमान में बिग्रेडियर एमपीएस बाजवा ने कर्नल रहते हुए कबड्डी में अच्छे प्रदर्शन के चलते सतपाल को सिपाही से लांसनायक पद पर पदोन्नत किया था।

वे सेना की बटालियन में कबड्डी के कोच भी रहे है। रिटायर हवलदार बलबीर सिंह व गांव निवासी रिटायर फौजी श्रीचंद ने बताया कि कि सतपाल राष्ट्रीय स्तर पर भी कबड्डी में गांव व प्रदेश का नाम रोशन कर चुके हैं।

भतीजे ने दी मुखाग्नि

Final Salute to Martyre Sub Major Satpal

शहीद सतपाल अपने पीछे अपनी पत्नी और इकलौती बेटी सुदेश को छोड़ गए हैं। रविवार को गांव में उनके पार्थिव शव को उनके भतीजे राकेश कुमार ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। मौके पर हजारों नम आंखों से उन्हें विदाई दी।

मेजर के शहीद होने की सूचना जैसे ही गांव व क्षेत्र में लोगों को पता चली तो लोगों का भारी हुजूम गांव जड़ौला की तरफ उमड़ पड़ा। शव यात्रा व अंतिम संस्कार में हजारों नम आंखों ने शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘गांव ने होनहार और देश भक्त बेटा खोया’
ग्रामीणों का कहना है कि सतपाल मिलनसार व हंसमुख छवि के इंसान थे। जो लोगों के दुख सुख में हमेशा बराबर के भागीदार रहते थे। गांव में जब भी छुट्टी मिलने पर सतपाल आता था और समूचे गांव में जाकर लोगों के दुख सुख सांझे करता था और लोगों की सेवा में सदा आगे रहता था।

ग्रामीणों ने कहा कि गांव ने एक होनहार व देश भक्त बेटे को खो दिया है। उधर, उसकी बेटी सुदेश ने रोते हुए कहा कि उसे अपने पिता पर गर्व है। जो देश की सेवा करते हुए शहीद हुए हैं।

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