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सिविल मामले में केस दर्ज करना शक्तियों का दुरुपयोग, क्यों न लगाया जाए भारी जुर्माना : हाईकोर्ट

Tue, 09 Apr 2024 02:30 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Apr 2024 02:30 AM IST
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Filing a case in a civil matter is misuse of powers: Court
-हरियाणा सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश
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-जगुआर लैंड रोवर इंडिया के निदेशक के खिलाफ फरीदाबाद में दर्ज किया गया था मामला

-तीन माह की देरी के बाद दी गई थी शिकायत, निदेशक ने ली है मामले में हाईकोर्ट की शरण

अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। सिविल मामले में शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर इसे आपराधिक मामला बनाने को शक्ति का दुरुपयोग बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार व शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए। जगुआर लैंड रोवर इंडिया लिमिटेड (जेएलआरआईएल) के निदेशक राजीव गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि याचिकाकर्ता या उनकी कंपनी की कोई भूमिका न होते हुए भी उन्हें अनावश्यक रूप से इस आपराधिक मुकदमे में घसीटा गया है। असल में तो यह आपराधिक मामला है ही नहीं बल्कि यह तो पूरी तरह से सिविल विवाद है। याची ने बताया कि यह एक कार से जुड़ा मामला है जिसके लिए डीलर और खरीददार के बीच विवाद था। कंपनी का खरीददार से कोई सीधा रिश्ता नहीं होता है क्योंकि विक्रय का समझौता डीलर और खरीददार के बीच होता है। ऐसे में याची की कंपनी और उसे इस विवाद में नहीं घसीटा जा सकता। सरकार ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि कंपनी प्रत्यक्ष न सही लेकिन परोक्ष रूप से जिम्मेदार है। जस्टिस आलोक जैन ने कहा कि शिकायत तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद दर्ज की गई थी और वाहन की उक्त डिलीवरी के संबंध में निदेशक की कोई भूमिका नहीं थी। वाहन की डिलीवरी लेते हुए ऐसी कोई शिकायत नहीं दी गई थी जबकि शिकायत में तर्क दिया गया कि वाहन बेचते हुए डीलर व कंपनी को वाहन के दोष के बारे में जानकारी थी। यह सब शिकायतकर्ता के इशारे पर अधिकारियों द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला है और यह कोर्ट प्रथम दृष्टया इसे शिकायतकर्ता और अधिकारियों पर जुर्माना लगाने के लिए इसे उपयुक्त मामला मानती है। ऐसे में शिकायतकर्ता व अधिकारियों पर भारी जुर्माने लगाने का मामला बनता है। हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता व अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग के लिए उन पर क्यों न भारी जुर्माना लगाया जाए।
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