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फिरोजपुर के गुप्त ठिकाने पर शहीद-ए-आजम ने बदला था वेश
फिरोजपुर।
Updated Sun, 14 Sep 2014 11:03 PM IST
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह फिरोजपुर के तूड़ी बाजार (मुहल्ला शाहगंज) स्थित बने गुप्त ठिकाने में ही वेश बदलकर दिल्ली गए थे। क्रांतिकारियों के पकड़ने के बाद ही अंग्रेजी सरकार को इस ठिकाने की भनक लगी थी। बाद में फिरोजपुर के 19 लोगों ने अदालत में गवाही दी थी। क्रांतिकारियों के उक्त ठिकाने को नेशनल हेरीटेज बनाने के लिए लोग आवाज उठा रहे हैं। इन दिनों फिरोजपुर में भगत सिंह के जन्म दिवस 23 सितंबर से 28 सितंबर तक समारोह आयोजित करने की तैयारियां चल रही हैं।
लेखक राकेश कुमार ने शहीद भगत सिंह के फिरोजपुर स्थित तूड़ी बाजा में बने गुप्त ठिकाने के बारे में खोजबीन करते हुए बताया कि भगत सिंह ने पार्टी के फैसले के अनुसार अपनी असली पहचान छिपाने के लिए उक्त ठिकाने पर अपने केश और दाढ़ी कटवाई थी। क्रांतिकारी जय गोपाल ने अदालत में अपने बयान में कहा था कि सुखदेव के आने पर उन्होंने, क्रांतिकारी डा. निगम और सुखदेव ने भगत सिंह के केस दाढ़ी काटी थी।
फिर वह यूपी वाला पहरावा धोती और कमीज पहनकर दिल्ली गए थे। इसी तरह डा. गया प्रसाद ने अपना नाम बीएस निगम रखा था। क्रांतिकारी शिव वर्मा ने अपना नाम राम नारायण कपूर, बड़े भाई साहब रखा था। क्रांतिकारी विजय कुमार सिन्हा ने अपना नाम बच्चू रखा था। क्रांतिकारी महाबीर सिंह ने अपना नाम प्रताप सिंह रखा था। सुखदेव को बलेजर के नाम से पुकारा जाता था। चंद्र शेखर आजाद ने अपनी पहचान छिपाने के लिए पंडित जी नाम रखा था। क्रांतिकारी जय गोपाल ने अपना नाम गोपाल रखा था।
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अदालत में पेश हुए थे 19 गवाह
उक्त ठिकाने पर आने वाले क्रांतिकारियों और उनकी सरगर्मियों की पुष्टि कराने के लिए अंग्रेज सरकार ने फिरोजपुर के 19 गवाह अदालत में भुगताए थे। इनमें गज्जू राम, कालू राम, दीवान चंद, तुलसी राम, लेख राज, साधु राम, मोहम्द तूफेल, चंदा सिंह, श्रीमती बीबी रानी, डा. दीवान सिंह, दीना नाथ, रामशरण दास, महाराज स्वरूप, मैरनबख्श, शरणदत्त, जय गोपाल, भाग राम, श्री राम, हंस राज मौजूद थे।
क्रांतिकारी प्रेम दत्त ने फिरोजपुर में बनाया था एक और गुप्त ठिकाना
क्रांतिकारी पार्टी ने एक और क्रांतिकारी प्रेम दत्त को मार्च 1929 के अंत में फिरोजपुर में टाइप सीखने के लिए भेजा था। वह फिरोजपुर शहर स्थित कूचा पटवारिया में लगभग 25 दिन किराए पर रहा था। दत्त को मिलने के लिए एक और क्रांतिकारी किशोरी लाल 12 अप्रैल को आया था।
बाद में किशोरी लाल के लाहौर में पकड़े जाने की सूचना मिलने पर प्रेम दत्त उसी समय लाहौर रवाना हो गए। वहां गोवाल मंडी, लाहौर के उत्तम निवास हाउस में पार्टी के गुप्त ठिकाने से किताबें व अन्य सामान लेकर अपने घर गुजरात चले गए थे। अंग्रेज सरकार की ओर से दत्त को गिरफ्तार करने पर दत्त ने अपने बयान में माना था कि वह फिरोजपुर में टाइप सीखने गया था।
फिरोजपुर शहर के गवाह राम लाल, मुकंद लाल, बसाऊ राम व रोशन लाल ने दत्त की शिनाख्त की थी कि वह फिरोजपुर आया था। दत्त द्वारा अपने पड़ोसी राम लाल से उधार ली दो पुस्तकें भी गुजरात से बरामद हुई थी।
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लेखक राकेश कुमार ने शहीद भगत सिंह के फिरोजपुर स्थित तूड़ी बाजा में बने गुप्त ठिकाने के बारे में खोजबीन करते हुए बताया कि भगत सिंह ने पार्टी के फैसले के अनुसार अपनी असली पहचान छिपाने के लिए उक्त ठिकाने पर अपने केश और दाढ़ी कटवाई थी। क्रांतिकारी जय गोपाल ने अदालत में अपने बयान में कहा था कि सुखदेव के आने पर उन्होंने, क्रांतिकारी डा. निगम और सुखदेव ने भगत सिंह के केस दाढ़ी काटी थी।
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फिर वह यूपी वाला पहरावा धोती और कमीज पहनकर दिल्ली गए थे। इसी तरह डा. गया प्रसाद ने अपना नाम बीएस निगम रखा था। क्रांतिकारी शिव वर्मा ने अपना नाम राम नारायण कपूर, बड़े भाई साहब रखा था। क्रांतिकारी विजय कुमार सिन्हा ने अपना नाम बच्चू रखा था। क्रांतिकारी महाबीर सिंह ने अपना नाम प्रताप सिंह रखा था। सुखदेव को बलेजर के नाम से पुकारा जाता था। चंद्र शेखर आजाद ने अपनी पहचान छिपाने के लिए पंडित जी नाम रखा था। क्रांतिकारी जय गोपाल ने अपना नाम गोपाल रखा था।
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अदालत में पेश हुए थे 19 गवाह
उक्त ठिकाने पर आने वाले क्रांतिकारियों और उनकी सरगर्मियों की पुष्टि कराने के लिए अंग्रेज सरकार ने फिरोजपुर के 19 गवाह अदालत में भुगताए थे। इनमें गज्जू राम, कालू राम, दीवान चंद, तुलसी राम, लेख राज, साधु राम, मोहम्द तूफेल, चंदा सिंह, श्रीमती बीबी रानी, डा. दीवान सिंह, दीना नाथ, रामशरण दास, महाराज स्वरूप, मैरनबख्श, शरणदत्त, जय गोपाल, भाग राम, श्री राम, हंस राज मौजूद थे।
क्रांतिकारी प्रेम दत्त ने फिरोजपुर में बनाया था एक और गुप्त ठिकाना
क्रांतिकारी पार्टी ने एक और क्रांतिकारी प्रेम दत्त को मार्च 1929 के अंत में फिरोजपुर में टाइप सीखने के लिए भेजा था। वह फिरोजपुर शहर स्थित कूचा पटवारिया में लगभग 25 दिन किराए पर रहा था। दत्त को मिलने के लिए एक और क्रांतिकारी किशोरी लाल 12 अप्रैल को आया था।
बाद में किशोरी लाल के लाहौर में पकड़े जाने की सूचना मिलने पर प्रेम दत्त उसी समय लाहौर रवाना हो गए। वहां गोवाल मंडी, लाहौर के उत्तम निवास हाउस में पार्टी के गुप्त ठिकाने से किताबें व अन्य सामान लेकर अपने घर गुजरात चले गए थे। अंग्रेज सरकार की ओर से दत्त को गिरफ्तार करने पर दत्त ने अपने बयान में माना था कि वह फिरोजपुर में टाइप सीखने गया था।
फिरोजपुर शहर के गवाह राम लाल, मुकंद लाल, बसाऊ राम व रोशन लाल ने दत्त की शिनाख्त की थी कि वह फिरोजपुर आया था। दत्त द्वारा अपने पड़ोसी राम लाल से उधार ली दो पुस्तकें भी गुजरात से बरामद हुई थी।