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Haryana News: सहकारिता विभाग में एक और घोटाले की आशंका, तीन जिलों और मुख्यालय का रिकॉर्ड गायब

Mon, 05 Feb 2024 10:03 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 05 Feb 2024 10:03 PM IST
सार

करनाल, झज्जर और पानीपत जिले का रिकॉर्ड गायब है। आशंका जताई जा रही है कि घोटाले को दबाने की खातिर रिकॉर्ड खुर्द बुर्द कर दिया गया है। उधर, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीमों ने संबंधित जिला कार्यालयों में पहुंचकर रिकॉर्ड कब्जे में लेना शुरू कर दिया है।

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Fear of another scam in cooperative department in Haryana
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सहकारिता विभाग में करोड़ों रुपये के घोटाले के खुलासे के बाद अब एक और घोटाले की आशंका है। दरअसल, तीन जिलों झज्जर, करनाल और पानीपत समेत मुख्यालय स्तर पर साल 2007 से लेकर 2013 तक का रिकॉर्ड ही गायब है। रिकॉर्ड न मिलने पर अधिकारियों की सांसें फूली हुई हैं। उधर, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीमों ने भी घोटाले के दस्तावेजों को खंगालने के लिए सहकारिता विभाग के कार्यालयों में दस्तक देना शुरू कर दिया है।

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घोटाले का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल के रिपोर्ट तलब करने के बाद से ही विभाग में खलबली मची हुई है। जब मुख्यालय के अधिकारियों ने अपने स्टाफ से इस संबंध में रिकॉर्ड मांगा तो कर्मचारियों ने जवाब दिया कि संबंधित रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। मुख्यालय स्तर पर कुछ रिकॉर्ड नहीं मिलने पर कहा जा रहा है कि जब चंडीगढ़ स्थित 30 बेज बिल्डिंग से कार्यालय बदला गया तो कुछ रिकॉर्ड इधर से उधर हो गया।

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वहीं, घोटाले की मुख्य केंद्र करनाल जिले का रिकॉर्ड भी गायब है, क्योंकि करनाल में अतिरिक्त रजिस्ट्रार (एआर) अनु कौशिश और डिप्टी रजिस्ट्रार (डीआर) रोहित गुप्ता ने सेवाएं दी हैं। अनु कौशिश घोटाले की मुख्य कड़ी है। इनके अलावा झज्जर और पानीपत का रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। आशंका जताई जा रही है कि घोटाले को दबाने के लिए रिकॉर्ड खुर्द बुर्द कर दिया गया है। उधर, एसीबी की टीमों ने संबंधित जिला कार्यालयों में पहुंचकर रिकॉर्ड कब्जे में लेना शुरू कर दिया है।

आईसीडीपी में 2005 से अब तक 182 करोड़ रुपये खर्च

सहकारिता विभाग में आईसीडीपी योजना के तहत 2005 से लेकर अब प्रदेशभर में कुल 182 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि, हरियाणा को इस योजना में नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनसीडीसी) के तहत कुल 251 करोड़ रुपये अलॉट हुए थे। अभी विभाग ने 68 करोड़ खर्च नहीं किए हैं। एसीबी अभी 2018 के बाद के मामलों की जांच कर रही है। अगर जांच का दायरा बढ़ा तो 2005 से लेकर अब तक की जांच में कई और गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं।

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