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#FathersDay: पति की मौत के बाद अपने बच्चे को बनाया कर्नल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 18 Jun 2017 09:23 AM IST
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लिली बावा अपनी बेटी के साथ।
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13 अक्तूबर, 1987 का दिन आज भी याद है जब कर्नल इंदर बल सिंह बावा के शहीद होने की सूचना मिली थी। उस समय बेटा तेजिंदर सिंह बावा मात्र 14 साल और बेटी मनमीत बावा साढ़े बारह साल की थी।
पति के शहीद होने का गम तो मन में था, लेकिन बच्चों को मां और पिता दोनों का प्यार देना था। उस दिन दृढ़ संकल्प लिया कि पति के संस्कारों को बच्चों में भरूंगी। हार नहीं मानूंगी। ये संस्कार ही मेरे बच्चों के लिए पत्थर की लकीर बने और आज मेरे बच्चे अच्छे मुकाम पर हैं।
ये कहना है पार्षद लिली बावा का। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए जरूरत पड़ने पर अपने बच्चों के लिए सख्त भी हुई और दुलार भी किया। तभी तो आज अपने बच्चों में अपने पति के संस्कार को देखती हूं। लिली बावा ने बताया कि 1989 में गैस एजेंसी खोली। उस समय हालात ऐसे थे कि बच्चे भी सिलेंडर सप्लाई करने जाते थे।
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लिली बावा ने अपने बच्चों में पिता के संस्कार भरे साथ ही बेटे को भी फौज में डाला। उनका बेटा तेजिंदर सिंह भी फौज में कर्नल हैं। कर्नल बावा बताते हैं कि रात को खाने के बाद अक्सर मेरी मां हम दोनों भाई बहन को टहलाने ले जाती थीं। करीब 45 मिनट तक हम तीनों एक साथ होते थे।
उस वक्त मां जीवन के उतार-चढ़ाव के बारे में अवगत कराती। उनकी सीख की बदौलत ही उनके बेटे अच्छी जगह पर हैं। उन्होंने बताया कि उनकी छोटी बहन यूएस में माइक्रोसॉफ्ट में इंजीनियर हैं। लिली बावा पंचकूला से लोकप्रिय पार्षद हैं।
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पति के शहीद होने का गम तो मन में था, लेकिन बच्चों को मां और पिता दोनों का प्यार देना था। उस दिन दृढ़ संकल्प लिया कि पति के संस्कारों को बच्चों में भरूंगी। हार नहीं मानूंगी। ये संस्कार ही मेरे बच्चों के लिए पत्थर की लकीर बने और आज मेरे बच्चे अच्छे मुकाम पर हैं।
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ये कहना है पार्षद लिली बावा का। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए जरूरत पड़ने पर अपने बच्चों के लिए सख्त भी हुई और दुलार भी किया। तभी तो आज अपने बच्चों में अपने पति के संस्कार को देखती हूं। लिली बावा ने बताया कि 1989 में गैस एजेंसी खोली। उस समय हालात ऐसे थे कि बच्चे भी सिलेंडर सप्लाई करने जाते थे।
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लिली बावा ने अपने बच्चों में पिता के संस्कार भरे साथ ही बेटे को भी फौज में डाला। उनका बेटा तेजिंदर सिंह भी फौज में कर्नल हैं। कर्नल बावा बताते हैं कि रात को खाने के बाद अक्सर मेरी मां हम दोनों भाई बहन को टहलाने ले जाती थीं। करीब 45 मिनट तक हम तीनों एक साथ होते थे।
उस वक्त मां जीवन के उतार-चढ़ाव के बारे में अवगत कराती। उनकी सीख की बदौलत ही उनके बेटे अच्छी जगह पर हैं। उन्होंने बताया कि उनकी छोटी बहन यूएस में माइक्रोसॉफ्ट में इंजीनियर हैं। लिली बावा पंचकूला से लोकप्रिय पार्षद हैं।