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फास्टनर सप्लायर्स का 25 करोड़ वैट रिफंड लटका
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Thu, 09 Oct 2014 10:36 PM IST
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फास्टनर सप्लायर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सालाना बैठक दुगरी में हुई। इसकी अध्यक्षता प्रधान राजकुमार सिंगला ने की। सदस्यों ने कारोबार पर मंथन कर आगे की रणनीति पर विचार किया। उन्होंने आबकारी व कराधान विभाग में लटके 25 करोड़ के वैट रिफंड पर चिंता जताई।
उन्होंने सरकार से अपील की कि उनको वैट रिफंड समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा फास्टर उत्पादों पर वैट की दर 6.05 फीसदी से कम कर कच्चे माल के बराबर ढाई फीसदी करने की वकालत की गई। इस संबंध में कारोबारी आगामी दिनों में आबकारी एवं कराधान आयुक्त पंजाब से मिलकर राहत की गुहार लगाएंगे। जिला टैक्सेशन बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान व वैट माहिर वरिंदर शर्मा ने सदस्यों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
प्रधान राजकुमार ने कहा कि कच्चे माल पर ढाई फीसदी टैक्स लग रहा है। वहीं तैयार माल पर टैक्स छह फीसदी से अधिक है। सप्लायर्स फास्टर मैन्यूफैक्चरर्स से 6.05 फीसदी वैट पर माल की खरीद करते हैं। दो फीसदी सेंट्रल सेल्स टैक्स लगा अंतरराज्जीय बिक्री कर रहे हैं। कारोबारियों का नब्बे फीसदी माल अन्य राज्यों में जा रहा है। ऐसेे में कराधान विभाग के पास चार फीसदी वैट रिफंड जमा हो जाता है। इसे पाने के लिए वे कारोबार विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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अब तक एसोसिएशन के सदस्यों का करीब 25 करोड़ वैट रिफंड लटका पड़ा है। कारोबारियों ने वेरिफिकेशन के लिए पिछली चार स्टेजों तक माल के लेन-देने पर लगाई शर्त को खत्म करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे भी झंझट बढ़ रहे हैं। इस दौरान चेयरमैन प्रीतम सिंह मक्कड़, धर्मपाल सिंगला, इकबाल सिंह, पंकज अग्रवाल और अजय अग्रवाल मौजूद थे।
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उन्होंने सरकार से अपील की कि उनको वैट रिफंड समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा फास्टर उत्पादों पर वैट की दर 6.05 फीसदी से कम कर कच्चे माल के बराबर ढाई फीसदी करने की वकालत की गई। इस संबंध में कारोबारी आगामी दिनों में आबकारी एवं कराधान आयुक्त पंजाब से मिलकर राहत की गुहार लगाएंगे। जिला टैक्सेशन बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान व वैट माहिर वरिंदर शर्मा ने सदस्यों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
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प्रधान राजकुमार ने कहा कि कच्चे माल पर ढाई फीसदी टैक्स लग रहा है। वहीं तैयार माल पर टैक्स छह फीसदी से अधिक है। सप्लायर्स फास्टर मैन्यूफैक्चरर्स से 6.05 फीसदी वैट पर माल की खरीद करते हैं। दो फीसदी सेंट्रल सेल्स टैक्स लगा अंतरराज्जीय बिक्री कर रहे हैं। कारोबारियों का नब्बे फीसदी माल अन्य राज्यों में जा रहा है। ऐसेे में कराधान विभाग के पास चार फीसदी वैट रिफंड जमा हो जाता है। इसे पाने के लिए वे कारोबार विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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अब तक एसोसिएशन के सदस्यों का करीब 25 करोड़ वैट रिफंड लटका पड़ा है। कारोबारियों ने वेरिफिकेशन के लिए पिछली चार स्टेजों तक माल के लेन-देने पर लगाई शर्त को खत्म करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इससे भी झंझट बढ़ रहे हैं। इस दौरान चेयरमैन प्रीतम सिंह मक्कड़, धर्मपाल सिंगला, इकबाल सिंह, पंकज अग्रवाल और अजय अग्रवाल मौजूद थे।