{"_id":"5b9a8d72867a557eaa4dd6a0","slug":"farming-equipment-subsidy-make-deal-of-deficit-in-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में खेती उपकरणों पर सब्सिडी बनी घाटे का सौदा, पर उद्योग मालिकों की हो रही बल्ले बल्ले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में खेती उपकरणों पर सब्सिडी बनी घाटे का सौदा, पर उद्योग मालिकों की हो रही बल्ले बल्ले
दविंदर पाल सिंह, अमर उजाला, मोगा (पंजाब)
Updated Fri, 14 Sep 2018 10:02 AM IST
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पंजाब में किसानों को आधुनिक तकनीक मशीनरी का ब्याज दिन-रात घुन की तरह खा रहा है। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान योजना (आरकेवीवाई) के तहत खेतीबाड़ी उपकरणों की सब्सिडी किसानों के लिए तर्कसंगत नहीं बन सकी। भारतीय किसान यूनियन ने खेती विभाग की ओर से प्रमाणित औद्योगिक इकाइयों पर एकाधिकार कर खेती उपकरण महंगे भाव में बेचकर किसानों की आर्थिक लूट का आरोप लगाया है।
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भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहा प्रदेश नेता बलौर सिंह घाली और भारतीय किसान यूनियन (कादियां) प्रदेश नेता गुलजार सिंह घल्लकलां ने खेती उपकरणों की सब्सिडी की आड़ में किसानों की आर्थिक लूट करने के आरोप लगाकर खेती विभाग से मंजूर उद्योगों से सब्सिडी की मशीनरी खरीदने की शर्त हटाने की मांग की है। लोहे का भाव स्थिर है लेकिन इन उद्योगों ने हैप्पी सीडर की कीमत 3 वर्षों में तीन गुना बढ़ा दी है।
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मामले की विजिलेंस जांच की मांग कर खेती सेक्टर में सब्सिडी तर्कसंगत बनाने पर कीमतें नियंत्रित करने के लिए रेगुलेटरी कमीशन की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि खेती उपकरणों की मांग बढ़ने और औद्योगिक इकाइयों के एकाधिकार से एग्रीकल्चर मशीनरी की कीमतों में हर साल बढ़ोतरी हो रही है।
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उन्होंने दावा किया कि विभाग ने कई ऐसे उद्योग भी प्रमाणित कर दिए हैं, जो सिर्फ दिखावे के लिए इकाई का बोर्ड ही लगाए हैं। वह सब्सिडी की मशीनरी छोटी वर्कशाप से सस्ती तैयार करवाकर सिर्फ बिल देने के लिए किसानों को महंगे भाव में खेती उपकरण बेचकर चपत लगा रहे हैं।
लोग बोले- नहीं मिली सब्सिडी
किसान परमजीत सिंह गांव मनावा और अन्य ने बताया कि उन्होंने पिछले साल महंगे भाव के रोटावेटर खरीदे पर अब तक सब्सिडी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि यह रोटावेटर चलाने के लिए हाई हॉर्स पावर के ट्रैक्टर भी खरीद करने पड़े। इस तरह कंबाइन पर सब्सिडी का एसएमएस लगाने के लिए आम उद्योगों की तुलना में यह प्रमाणित इकाइयों का रेट 25 से 30 हजार रुपये ज्यादा बताया जा रहा है।
उद्योगपति बोले-हम सरकारी नियम कर रहे फॉलो
यहां कृषि विभाग के इंजीनियर सतिंदरपाल सिंह ने पुष्टि की कि सब्सिडी के खेती उपकरण खेती विभाग से प्रमाणित उद्योग महंगा बेचने का मुद्दा नए आए डिप्टी कमिश्नर इंजीनियर डीपीएस खरबंदा के पास भी पहुंच गया है। श्री खरबंदा ने इन प्रमाणित उद्योग मालिकों से मीटिंग कर रेट घटाने का जोर दिया, लेकिन उद्योग मालिकों ने दावा किया कि वह सरकारी नियम के मुताबिक ठीक भाव पर ही मशीनरी बेच रहे हैं।
किसान नेता गुलजार सिंह ने कहा कि डिप्टी कमिश्नर श्री खरबंदा ने किसानों को उन उद्योगों बारे बताने के लिए कहा जो प्रमाणित उद्योगों से कम भाव पर सब्सिडी की मशीनरी उपलब्ध करा सकते हैं।
200 से अधिक छोटे-बड़े उद्योग
मुख्य कृषि अफसर परमजीत सिंह बराड़ ने कहा कि सरकार ने रोटावेटर पर सब्सिडी खत्म कर दी है और बाकी हैप्पी सीडर आदि खेती उपकरणों के लिए किसानों की 550 अर्जियां मिलीं हैं। कमेटी के जरिये ड्रॉ निकालकर फंड प्राप्त होने के बाद किसानों के बैंक खातों में सब्सिडी ट्रांसफर कर दी जाएगी। जिले में सिर्फ 9 इकाइयां प्रमाणित हैं जबकि यहां तकरीबन फोकल प्वाइंट व अन्य स्थानीय कस्बों में तकरीबन 200 से अधिक बड़े छोटे उद्योग खेती उपकरण तैयार करते हैं।
पंजाब कृषि विभाग की ओर से 2018-19 और 2019-20 के लिए खेती मशीनरी पर 665 करोड़ रुपये की सब्सिडी की योजना है। इसमें से फसलों के अवशेष/धान की पराली को आग लगाने से रोकने और ठीक से खेत में मिलाने के लिए अलग-अलग मशीनों की स्कीम के तहत सब्सिडी दी जानी है।
सहकारी समितियों का लाभ उठाएं
ब्लाक कृषि अफसर डॉ. हरनेक सिंह रोडे और कुलदीप सिंह बुट्टर ने छोटे किसानों को महंगे भाव की खेती मशीनरी खुद खरीदने के बजाय सहकारी समितियों द्वारा खरीदे आधुनिक खेती उपकरणों से लाभ उठाने की सलाह दी है। उन्होंने किसानों को मिशन तंदुरुस्त पंजाब के तहत किसानों को अनावश्यक खतरनाक कीटनाशकों के प्रयोग से गुरेज करने के लिए कहा कि पंजाब इस समय रसायनिक जहर पानी के प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है। दूषित पानी से मनुष्य के सेहत पर भारी प्रभाव हुआ है। इस तहत कैंसर की चपेट में आने कारण सैकड़ों लोग मौत के मुंह में चले गए हैं।