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Haryana: अब हरियाणा में खाद के लिए भी कराना होगा पोर्टल पर पंजीकरण, यमुनानगर से होगी शुरुआत

Thu, 29 Jun 2023 08:41 AM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 29 Jun 2023 08:41 AM IST
सार

हरियाणा में खाद के लिए हर साल मारामारी रहती है। पिछले साल सरसों और गेहूं की बिजाई के समय पुलिस की निगरानी में खाद की बिक्री हुई थी। सुबह से शाम तक खरीद केंद्रों पर किसानों की लाइनें लगी थी। खाद की कमी को लेकर विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर रहा है।

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Farmers will register on Meri Fasal-Mera Byora portal to demand fertilizers in Haryana
किसान - फोटो : PTI

विस्तार

हरियाणा में अब फसलों के साथ-साथ खाद की मांग के लिए भी किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। इसकी शुरुआत यमुनानगर से पायलट प्रोजेक्ट के तहत होगी। यहां सफल प्रयोग के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके अलावा इस बार धान सीजन को देखते हुए हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार से डेढ़ लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद की मांग की है।

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हरियाणा में औसतन रबी और खरीफ के सीजन में 8 लाख मीट्रिक टन खाद की खपत होती है। पिछले कई सालों के आंकड़ों की समीक्षा की गई तो यमुनानगर में सबसे अधिक खाद की खपत पाई गई। विभाग को आशंका है कि यहां पर प्लाईवुड उद्योग अधिक है और किसानों के नाम पर खाद खरीदकर इसे उद्योगों में प्रयोग किया जाता है। इसलिए यमुनानगर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसानों को खाद लेने के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था की शुरुआत रबी फसल के सीजन में की जाएगी। किसानों से सीजन से पहले ही मांग ली जाएगी और उसी हिसाब से खाद की आपूर्ति की जाएगी।
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स्टॉक में 4.31 लाख मीट्रिक टन खाद
हरियाणा में अब तक 4.10 लाख मीट्रिक टन खाद की बिक्री हो चुकी है, जबकि विभाग के स्टॉक में 4.31 लाख मीट्रिक टन खाद है। इसमें 3.20 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 1.11 लाख डीएपी खाद स्टॉक में है। इसके अलावा केंद्र सरकार को 1 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 50 हजार मीट्रिक टन डीएपी की अतिरिक्त मांग की गई है। समय-समय पर केंद्र की ओर से खाद की आपूर्ति की जाएगी।


होती है खाद की तस्करी, हर साल होती है खाद के लिए मारा मारी
हरियाणा में खाद के लिए हर साल मारामारी रहती है। पिछले साल सरसों और गेहूं की बिजाई के समय पुलिस की निगरानी में खाद की बिक्री हुई थी। सुबह से शाम तक खरीद केंद्रों पर किसानों की लाइनें लगी थी। खाद की कमी को लेकर विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यमुनानगर के अलावा प्रदेश की सीमा पर लगते यूपी, राजस्थान और पंजाब के साथ लगते जिलों से खाद की तस्करी भी होती है और खाद दूसरे प्रदेशों में जाता है।

हरियाणा में खाद की कोई कमी नहीं है। केंद्र सरकार से डेढ़ लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद की मांग की गई है। यूरिया का खेती के अलावा उद्योगों में प्रयोग रोकने के लिए यमुनानगर जिले में किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर पंजीकरण कराना होगा। पोर्टल पर मांग के अनुसार ही उनको खाद मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा प्रदेश की सीमाओं से लगते जिलों में भी खाद की तस्करी रोकने के लिए विशेष निगरानी की जाएगी। - डॉ. नरहरि सिंह बांगड़, महानिदेशक., कृषि विभाग।

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