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किसान होली पर जलाएंगे कृषि कानून की प्रतियां, उससे पहले भारत बंद

Fri, 19 Mar 2021 06:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़/रोहतक/करनाल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़/रोहतक/करनाल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 19 Mar 2021 06:08 AM IST
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Farmers will burn copies of agricultural law on Holi
kisan andolan - फोटो : अमर उजाला

कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए किसान संगठनों में केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। किसानों ने 26 मार्च के भारत बंद के बाद होली पर भी प्रदर्शन करने की घोषणा की है। किसान नेता होलिका दहन की जगह कृषि कानून की प्रतियां जलाएंगे। इस संबंध में बुधवार को कुंडली बॉर्डर और शंभू बॉर्डर पर किसान नेताओं व कुछ अन्य संगठनों की बैठक हुई। जिसमें रणनीति बनाने के साथ ही किसानों की ड्यूटी भी लगाई गई।

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भारत बंद के लिए सभी के पास जाकर समर्थन मांगा जा रहा है। इसके साथ ही अपील की जा रही है कि बंद शांतिपूर्ण तरीके से होगा। इसमें किसी तरह से कोई माहौल बिगाड़ने का प्रयास करेगा तो उसे किसान खुद ही पुलिस के हवाले कर देंगे। इस बीच जींद के कंडेला गांव में महिला पंचायत हुई। वहीं खटकड़ टोल से किसानों का पैदल जत्था दिल्ली के लिए रवाना हुआ। यह जत्था 23 मार्च को भगत सिंह के शहीदी दिवस पर दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर पहुंचेगा। 
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इसके अलावा टीकरी और खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी है। इधर, शंभू बॉर्डर पर भी किसानों ने बैठक की और भारत बंद को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई। इसके साथ ही होलिका दहन में कृषि कानूनों की प्रति जलाने और इससे पूर्व शहीद भगत सिंह के शहीदी दिवस को बॉर्डर पर मनाने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। करनाल में जीटी रोड स्थित बसताड़ा टोल और करनाल-जींद स्टेट हाईवे स्थित प्यौंत टोल प्लाजा पर भी किसानों के धरने जारी रहे। दूसरी ओर बसताड़ा टोल पर वीरवार को पांच किसान भूख हड़ताल पर भी बैठे रहे। किसान अब 25 मार्च को असंध की अनाजमंडी में होने वाली किसान महापंचायत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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इधर, पंजाब के गांव ईंटावाली में कर्ज से परेशान एक किसान ने जहर निगलकर खुदकुशी कर ली। उसपर 12 लाख रुपये का कर्ज था। किसान रेशम सिंह वासी गांव ईंटावाली पिछले हफ्ते ही दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन से लौटा था।


ग्रामीणों ने नेताओं को गांव में घुसने की रोक पर उठाए सवाल
जींद जिले के उचाना के करसिंधु गांव में ग्रामीणों ने किसानों द्वारा नेताओं के गांव में घुसने की रोक पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ नेता तो अपने कार्यक्रम पहले की तरह ही कर रहे हैं, लेकिन कुछ का विरोध किया जा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता बीरेंद्र सिंह का गांव में आने का कार्यक्रम होता है तो वे भी उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को गांव में बुलाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ लोग किसान आंदोलन की आड़ में गांवों का भाईचारा खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।

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