बजट सत्र: किसान कल्याण प्राधिकरण विधेयक पास, विपक्ष ने कहा- किसानों को तरजीह नहीं, कांग्रेस का वॉकआउट
विधेयक में संशोधन के अनुसार अब सरकार प्राधिकरण में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति कर सकती है।
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हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण विधेयक, 2022 के विरोध में मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। प्राधिकरण में किसानों को तरजीह नहीं दिए जाने के आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। हालांकि, सदन में विधेयक पारित हो गया। प्रदेश सरकार की ओर से हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण अधिनियम, 2018 में संशोधन करने के लिए हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण विधेयक, 2022 सदन में पेश किया गया।
इस पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत विपक्ष के विधायकों ने कहा कि जिनके लिए प्राधिकरण बनाया गया है, उसमें किसानों को सदस्य ही नहीं बनाया गया तो किसानों का कल्याण कैसे होगा। विधायक किरण चौधरी, अमित सिहाग, शमशेर गोगी, वरुण चौधरी और निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने एक सुर में मांग उठाई कि विधयेक में कम से कम आधे सदस्य किसान होने चाहिए।
यह भी आरोप लगाया कि प्राधिकरण में सरकारी सदस्यों को शामिल किया है, ऐसे में सरकार के बाहर जाकर कैसे काम कर सकते हैं। जवाब में कृषि मंत्री जेपी दलाल ने आश्वासन दिया कि छह सदस्य भी बनाए जा सकते हैं, जिसमें से अधिकतर किसान होंगे लेकिन विपक्षी इस बात पर अड़े रहे कि केवल आश्वासन नहीं चाहिए, इस पर काम होना चाहिए। हंगामे के बीच कांग्रेस विधायकों ने इस विधेयक के खिलाफ सदन से वॉकआउट किया।
प्रधान सचिव रैंक का होगा सीईओ
विधेयक में संशोधन के अनुसार अब सरकार प्राधिकरण में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति कर सकती है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी या तो प्रधान सचिव के रैंक का अधिकारी होगा या फिर कृषि क्षेत्र से कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति होगा। उसे प्राधिकरण के कोष से मासिक वेतन व भत्ते दिए जाएंगे।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी महानिदेशक या निदेशक के रैंक का जबकि संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरियाणा सिविल सेवा का अधिकारी होगा। वहीं, मुख्य सचिव अध्यक्षता में कृषि सलाहकार परिषद बनाई जाएगी, जिसमें 22 सदस्य और एक सदस्य सचिव होगा। परिषद के सदस्यों में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार तथा हरियाणा कौशल विश्वविद्यालय गुरुग्राम के कुलपति शामिल होंगे। इसके अलावा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष परिषद के सदस्य होंगे। कृषि विभाग के अध्यक्ष इस परिषद के सदस्य-सचिव होंगे।
पीपीपी के माध्यम से सत्यापित किया जा रहा श्रमिकों का डाटा: धानक
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री अनूप धानक ने बताया कि प्रदेश में श्रमिकों की संख्या लगभग 919275 है, जिनमें 610398 भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं। धानक ने सदन को अवगत कराया कि परिवार पहचान पत्र के सत्यापित डाटा में 579853 पंजीकृत सदस्य हैं, 20545 श्रमिकों की संख्या पीपीपी पर नहीं मिली है, जिसके लिए सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक शीश पाल सिंह केहरवाला द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में अनूप धानक ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा कोविड-19 के दौरान पंजीकृत प्रत्येक श्रमिक के खाते में 1000-1000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम,1958 के तहत सिरसा जिले में पंजीकृत कामगारों की संख्या 48,288 है और पूरे राज्य में यह संख्या 27,71,900 है। कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत यह संख्या सिरसा जिले के लिए 14308 तथा पूरे राज्य के लिए 23,36,951 है।
पंजीकरण के लिए मजदूर संघों की लेंगे मदद
श्रमिकों की जटिल पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए विधायक ने मजदूर संघों की मदद लेने की बात कही। इस पर अनूप धानक ने सदन को अवगत कराया कि लगातार 90 दिन एक पंजीकृत ठेकेदार के पास काम करने के बाद मजदूर अपना पंजीकरण करवा सकता है।