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पंजाब विधानसभा चुनाव: हर सरकार ने बस वादे ही किए... अपने मुद्दे खुद सुलझाने के लिए सियासी बने किसान

Sun, 16 Jan 2022 03:16 PM IST
निवेदिता वर्मा अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 16 Jan 2022 03:16 PM IST
सार

पंजाब में लगभग 1850 छोटी बड़ी मंडियां हैं। इन मंडियों का प्रतिवर्ष का टर्नओवर 3500-3600 करोड़ है। इसके साथ ही कृषि यंत्रों का भी 3000 करोड़ के लगभग कारोबार होता है।

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Farmers Union will Contest Punjab Assembly Election
किसान आंदोलन - फोटो : फाइल

विस्तार

खेतों में हल जोतने वाले पंजाब के किसान सियासत की ओर क्यों अग्रसर हुए हैं। इस बड़े सवाल की कुछ बड़ी वजह भी हैं जिनके कारण किसानों को हल छोड़कर सियासत का झंडा उठाना पड़ा है। सबसे बड़ी वजह यह है कि पंजाब कृषि राज्य है। यहां की आर्थिकी का प्रमुख स्रोत किसानी है। इस कारण से यहां के अधिकतर मुद्दे भी किसानों से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा सूबे की कुल 117 सीटों में 77 सीटों पर किसानों की निर्णायक भूमिका भी उनकी इस दावेदारी को और मजबूत करती है।

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पंजाब में कृषि से संबंधित 50362 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल है। इसके साथ ही 42 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। अन्य राज्यों से यह आंकड़ा तो बहुत अधिक है, लेकिन इसके बाद भी पंजाब में अभी तक की सरकारों के द्वारा किसानों के लिए कुछ खास नहीं किया गया। राजनीतिक दलों को सत्ता की गद्दी तक पहुंचाने की क्षमता रखने वाले किसानों को हमेशा से ही इन राजनीतिक दलों ने उपेक्षित ही रखा। यही कारण है कि पंजाब से कटकर बना हरियाणा आज कृषि के क्षेत्र में कहीं आगे हैं। 
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हरियाणा की कृषि विकास दर पंजाब से तीन गुनी है। हरियाणा की 6.3 प्रतिशत और पंजाब की मात्र 2.1 प्रतिशत ही विकास दर है। इसके अलावा भी पंजाब में कई ऐसे मुद्दे हैं जो यहां की सरकारों की उपेक्षा के कारण किसानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। आय में देश के अन्य राज्यों के किसानों की अपेक्षा कई गुना अधिक आय करने के बाद भी पंजाब में किसान लगातार आत्महत्याएं कर रहे हैं। यह समस्या सूबे की अहम समस्या है। हर बार यहां की सरकारें इस पर कदम उठाने की बात करती हैं, लेकिन अभी तक इस ओर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं। कृषि आंदोलन फतेह करने के लिए करने वाले संघर्ष के बाद पंजाब के किसान यह तो समझ गए हैं कि उन्हे अपने मुद्दों को सुलझाने के लिए खुद ही सियासी बनना होगा।

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दो दल बनाकर किसान लड़ रहे चुनाव

2022 के चुनावी मैदान में किसानों के दो प्रमुख राजनीतिक दलों ने सियासत की राह पकड़ी है। प्रमुख रूप से किसान नेता बलबीर राजेवाल के नेतृत्व में 22 किसान संगठन संयुक्त समाज मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं। यहां इनका मजबूत आधार है। इसके अलावा संयुक्त संघर्ष पार्टी बनाकर हरियाणा के किसान नेता गुरनाम चढूनी चुनाव मैदान में हैं।

आर्थिकी में किसानों का बड़ा हाथ

पंजाब में लगभग 1850 छोटी बड़ी मंडियां हैं। इन मंडियों का प्रतिवर्ष का टर्नओवर 3500-3600 करोड़ है। इसके साथ ही कृषि यंत्रों का भी 3000 करोड़ के लगभग कारोबार होता है। 1000 करोड़ रुपये परिवहन का कारोबार है। सबसे बड़ा सूबे में उवर्रक का लगभग 15000 करोड़ प्रतिवर्ष का कारोबार है। इसके अलावा यहां के आढ़ती भरी प्रतिवर्ष किसानों से करीब 1500 करोड़ रुपये की आय करते हैं।

किसानों की समस्याएं

- पराली प्रमुख समस्याओं में शुमार
- छोटे किसानों का भूमि पर अधिकार
- फसल पर सही मूल्य नहीं मिलना
- अच्छे बीज का नहीं मिलना
- सिंचाई भी अहम मुद्दा
- तेजी से भूमि में बढ़ता खारापन
- आधुनिक कृषि मशीनों का अभाव
- भंडारण सुविधाओं का अभाव
- परिवहन समस्या
- कृषि के लिए पूंजी का अभाव

आत्महत्या बड़ा मुद्दा

पंजाब कृषि संपन्न राज्य होने के बाद भी किसानों की आत्महत्याओं की संख्या में कमी नहीं आ रही है। पिछले 2 सालों की यदि हम बात करें तो 471 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। इसके पीछे की बड़ी वजह खेती करने के लिए लिए जाने वाले कर्ज की अदायगी नहीं कर पाने को बताया जा रहा है।

मालवा में किसानों का दबदबा

पंजाब को तीन प्रमुख हिस्सो में विभाजित किया जाता है। इसमें सबसे बड़ा क्षेत्र मालवा है। इसके बाद माझा और फिर दोआबा। मालवा में कुल 69 सीटें हैं। इनमें अधिकांश सीटें ग्रामीण हैं। यही वजह है कि यहां किसानों का दबदबा है। इसके अलावा माझा में 25 और दोआबा में 23 सीटें आती हैं। दोआबा में ज्यादातर अनुसूचित जाति वाली सीटें हैं। माझा में सिख बाहुल्य सीटें हैं।


किसानों का सियासी होना मजबूरी है। पंजाब में सालों से किसानों के मुद्दे मुंह ताक रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी ने इनकी ओर कोई कदम नहीं उठाया। अब किसान खुद ही अपने मुद्दों को सुलझाएंगे। -गुरनाम चढूनी, किसान नेता, संयुक्त संघर्ष पार्टी

चुनाव में किसानों को हर वर्ग का साथ मिल रहा है। किसानों के साथ ही हर वर्ग से चुनाव में प्रत्याशी बनाया जाएगा। - बलबीर राजेवाल, किसान नेता, संयुक्त समाज मोर्चा

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