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लंबा चलेगा आंदोलन!: छह माह का राशन लेकर निकले हैं किसान, जानिए ट्रैक्टरों में और क्या है इंतजाम

Mon, 12 Feb 2024 10:57 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 12 Feb 2024 10:57 PM IST
सार

13 फरवरी के प्रस्तावित दिल्ली मार्च में ज्यादातर आंदोलनकारी किसान माझा क्षेत्र से आए हैं। इनमें अधिकतर किसान श्री अमृतसर साहिब, गुरदासपुर, तरनतारन, ब्यास, फिरोजपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, लुधियाना, दोराहा, खन्ना, समराल व समाना आदि से पहुंचे हैं।

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Farmers Prepared for Andolan in Delhi
किसानों के आंदोलन के लिए आए ट्रैक्टर - फोटो : संवाद

विस्तार

दिल्ली कूच के लिए पंजाब के अलग-अलग जिलों से किसान संगठन ट्रैक्टरों पर सवार होकर पंजाब-हरियाणा बॉर्डर की ओर बढ़ रहे हैं। बॉर्डर में जगह-जगह किसानों का जमावड़ा है। 

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किसान अपने साथ छह माह का राशन, टेंट, बिस्तर, दवाइयां व अन्य जरूरी सामान लेकर चले हैं। ट्रालियों में पानी व बिजली आदि की पूर्ण व्यवस्था है। किसानों कहना है कि वह हर हाल में दिल्ली पहुंच कर रहेंगे। किसानों का कहना है कि वह फतेह करके लौटेंगे, टकराव नहीं करेंगे। 
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) केंद्र सरकार की ओर से मांगें पूरी न करने से रोष में है। बठिंडा, मानसा, संगरूर, पटियाला और मोहाली के हरियाणा से सटे बॉर्डर पर विभिन्न जिलों के किसान पूरी तरह डट गए हैं। कुछ अभी रास्ते में हैं। फतेहगढ़ साहिब में किसानों ने दो जगह अपना ठिकाना बनाया है, जिसमें एक अनाज मंडी सरहिंद और दूसरा नबीपुर पशु मंडी साधुगढ़।
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सोमवार को बड़ी संख्या में किसान फतेहगढ़ साहिब में संयुक्त किसान मोर्चा से संगठित भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल और किसान मजदूर मोर्चा केएमएम के नेता सरवण सिंह पंधेर सहित भारी संख्या में किसान गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में दिल्ली मोर्चा लगाने से पहले नतमस्तक होने पहुंचे।

केंद्र सरकार ने 2021 की मांगें नहीं मानीं: डल्लेवाल
गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहिब में मीटिंग से पहले किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अरदास की। डल्लेवाल ने बताया कि आज हम शहीदों की धरती पर किसान मोर्चा को फतेह करने की पूरी तैयारी करके आए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा की मांगें 2021 से लंबित हैं। केंद्र सरकार सभी मांगों को पूरा करने का वादा करके मुकर गई है। इनमें 2021 में किसान आंदोलन दौरान किसानों पर किए गए केस वापस लेने, लखीमपुर खीरी के मृतक किसानों को इंसाफ देने, बिजली संशोधन बिल दोबारा न लेकर आने, प्रदूषण कानून से कृषि को बाहर निकालने, डॉ. स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने सहित अन्य मांगे शामिल हैं। डल्लेवाल ने नेशनल हाईवे को बंद करने पर कहा कि यह केंद्र सरकार की घबराहट एवं दिल में डर को दर्शाता है, इसीलिए बैरिकेड्स लगाए गए हैं। हम अपनी लड़ाई संयम और शालीनता से लड़ने वाले हैं।
 

दूसरे दिन भी श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास के बाद रवाना हुए किसान
किसान जत्थेबंदियों का सोमवार दूसरा जत्था श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास करके दिल्ली के लिए रवाना हुआ। किसान करीब 150 से अधिक ट्रैक्टर लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुए। 

इस जत्थे में किसान व जवान भाई यूनियन पंजाब और संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के कार्यकर्ता बढ़ी संख्या में शामिल हुए। किसानों की ओर से पहले श्री हरिमंदिर साहिब पहुंच कर श्री अकाल तख्त साहिब पर अरदास की गई। इसके बाद यह जत्था बोले सो निहाल के जयघोष के साथ दरबार साहिब पहुंचा।

किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा, सुखजीत सिंह और अमरजीत सिंह रड़ा ने बताया कि किसान आने वाले दिनों में दिल्ली पहुंच कर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना मोर्चा लगाने वाले हैं। देश की जनता को भी उनका साथ देना चाहिए। 

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी व अन्य किसान संगठनों की ओर से ब्यास से दिल्ली कूच के लिए बड़ी संख्या में ट्रालियों का काफिला भी भेजा जा चुका है। फतेहगढ़ साहिब से एक हजार के लगभग ट्रालियों के काफिले में राशन का सामान भी शामिल है। वहीं इन ट्रालियों में छह माह का समान लेकर जा रहे है। अगर आंदोलन लंबा भी चलता है तो फिर भी कोई मुश्किल नहीं आएगी। इस बार मांगें मनवा कर ही लौटेंगे।

लोगों की बढ़ रही मुसीबत, नदी के बीच से पैदल निकल रहे
किसानों का 13 फरवरी को दिल्ली कूच अब आमजन के लिए मुसीबत बन गया है। पंजाब सीमा सील होने पर सैकड़ों वाहनों के लिए चलना मुश्किल हो गया। 

सोमवार को इसका ज्यादा असर हरियाणा जाने वाले मुख्य मार्ग यानी शंभू टोल का रास्ता पूरी तरह से बंद होने पर दिखा। एक ओर जहां अंबाला की ओर जाने वाले छोटे वाहनों को शंभू से घनौर जाने वाले मार्ग से अंबाला के लिए डायवर्ट किया गया, जहां कई वाहनों की कतारें लग गईं। वहीं, पंजाब बॉर्डर की सीमा से सटे गांवों की तरफ से आने-जाने वाले लोग पैदल ही घग्गर नदी पर जान जोखिम में डालते नजर आए। महिलाएं और बुजुर्ग पुलिस मुलाजिमों के समक्ष रोष प्रकट करते नजर आए।



घग्गर नदी के भीतर से पैदल निकलने को मजबूर हुए लोग
हरियाणा पुलिस की तरफ से जब पुल के ऊपर से रोक लगी तो लोग घग्गर नदी के भीतर पानी के बीच ही गुजरते नजर आए। पानी एक-दो फुट था, लेकिन बीच-बीच में 6-6 फीट के कुछ गहरे गड्ढे भी थे। इन्हें जान दांव पर लगाकर लांघ रहे थे। राजपुरा से अंबाला जाने वाले वाहन गगन चौक के से ही वाया बनूड़, डेराबस्सी के रास्ते से होते हुए अंबाला जा सकते हैं। वहीं, अंबाला जाने के लिए शंभू, तेपला, मनौली सुरत, सूरजगढ़, बनूड़ से डेराबस्सी के रास्ते से अंबाला व दिल्ली को जा सकते हैं।
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