किसान आंदोलन : पंजाब में बताई जा रही हरियाणा के युवाओं की कहानी, अब पंजाब के युवा हरियाणा में होंगे सम्मानित
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55 साल पहले 1966 में अलग हुए पंजाब और हरियाणा के लोगों की भाईबंदी किसान आंदोलन में खूब दिख रही है। आंदोलन को समाप्त कराने को लेकर बेशक सियासत की ओर से एसवाईएल को खाई बनाने की कोशिश की जा रही है लेकिन यहां किसान इसको भूलाकर एक दूसरे का मान सम्मान कर रहे हैं।
दिल्ली बार्डरों पर डटे किसानों की सेवा के बदले हरियाणा के युवाओं को पंजाब में अपने गांवों में ले जाया जा रहा है और उनका आतिथ्य सत्कार किया जा रहा है। ग्रामीणों की ओर से गुरुद्वारा में लेकर उनको सिरोपे भी भेंट किए जा रहे हैं। पंजाब के गांवों में उनको किसान योद्धाओं की तरह पेश किया जा रहा है। इसी तर्ज पर अब हरियाणा भाकियू भी योजना तैयार कर रही है, जिसके तहत बार्डरों पर डटे पंजाब के किसानों को गांवों में ले जाया जाएगा, ताकि वे हरियाणा के ग्रामीणों को अपनी कठिनाइयों और आंदोलन के बारे में बता सकें। इससे आंदोलन को और मजबूती देने की तैयारी है।
पंजाब के जिला मोगा के गांव लंग्याणा निवासी सिंदा सिंह ने बताया कि वह पहले दिन से ही बॉर्डर पर डटे हैं। यहां पर शुरू से लेकर अब तक हरियाणा के आसपास के गांवों के युवाओं ने आंदोलनकारी किसानों की खूब सेवा की है। हमारे रहने, खाने से लेकर अन्य जरूरतों को इन्होंने पूरा किया।
युवाओं की सेवा के कारण ही धरना मजबूती के साथ जारी है। इसलिए उन्होंने बहादुरगढ़ के नया गांव के युवाओं को अपने साथ अपने गांव में घुमाया। साथ ही अपने परिवार के सदस्यों को बताया कि अगर वे धरने पर बैठे हैं तो इन हरियाणा के युवाओं के कारण है। पूरे गांव की ओर से उनको मान दिया गया।
पहली बार देखा वाघा बार्डर, पंजाब में बहुत सत्कार मिला
पंजाब में घूमने वाले हरियाणा के राजेश और नरेश कुमार समेत अन्य युवा किसानों ने बताया कि पंजाब के किसानों ने उनका बहुत मान सम्मान किया है। हमें पंजाब के कल्चर को भी समझने का मौका मिला है, इससे पहले वे पंजाब नहीं गए थे। पहली बार वाघा बार्डर देखा। पंजाब के लोगों की दिलदारी के बारे में सुना था, लेकिन चार से पांच दिन तक हमने यहां रहकर महसूस भी किया। बहुत सत्कार मिला। एक दूसरे के गांवों में आने जाने से न केवल दोनों प्रदेशों के किसानों में भाईचारा बढ़ा है, बल्कि इससे आंदोलन को भी मजबूती मिली है।
अब पंजाब के किसानों को हरियाणा के गांवों में ले जाएंगे : मान
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान का कहना है कि सरकारों ने पूरी कोशिश की है कि एसवाईएल या अन्य मुद्दों पर पंजाब व हरियाणा के किसानों को अलग अलग किया जा सके लेकिन किसान टूटने वाले नहीं हैं। ये बहुत ही अच्छी पहल है कि किसानों द्वारा दूसरे प्रदेश के किसानों को अपने अपने गांवों में ले जाया जा रहा है और उनका सम्मान हो रहा है। भाकियू भी इसी तर्ज पर काम करेगी और दिल्ली बार्डरों पर डटे पंजाब के किसानों को हरियाणा के गांवों में ले जाया जाएगा, ताकि वे जनता को अपने संघर्ष की कहानी बता सकें। आखिर किस प्रकार से वे एक माह से ज्यादा से खुले आसमान के नीचे डटे हुए हैं। इसके लिए पूरा शैड्यूल तैयार किया जाएगा। यकीनन इससे आंदोलन को मजबूती मिलेगी और किसान एक दूसरे प्रदेश के किसानों की भावनाओं की कद्र करेंगे।