पंजाब में अब तक 20729 पराली जलाने के मामले आए सामने, 2923 किसानों पर कार्रवाई
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पंजाब में पराली जलाने का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी किसान लगातार पराली को आग लगा रहे हैं। हालात ये है कि पूरा उत्तर भारत जहरीली हवा की जद में है। लोगों का घर से निकला मुश्किल हो गया है। हरियाणा में स्कूलों को भी बंद करना पड़ा है।
पराली जलाने की ताजा तस्वीरें पंजाब के लुधियाना से सामने आई हैं। यहां के गांव कोट माना में किसान पराली जला रहे हैं। पराली के धुएं की वजह से लोगों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात बने हैं।
Ludhiana: Farmers continue to burn stubble in Punjab; visuals from Kot Mana village. pic.twitter.com/DLhGLIXemk
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) November 4, 2019
पंजाब में इस साल अब तक पराली जलाने के 20729 मामले सामने आए हैं। जिनमें से 2923 किसानों पर कार्रवाई की जा चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार पराली जलाने के मामलों में 10-20 प्रतिशत कमी आएगी। पिछले साल पराली जलाने के 49000 केस आए थे। इस बार अब तक 20729 केस आए हैं, जबकि 70 प्रतिशत फसल काटी जा चुकी है।
सरकार द्वारा गठित टीमों ने एक नवंबर तक पराली जलाने वाले 11286 घटनास्थलों का दौरा किया है। 1585 मामलों में वातावरण प्रदूषित करने के मुआवजे के तौर पर 41.62 लाख रुपये जुर्माना किसानों पर लगाया है। 1136 मामलों में खसरा गिरदावरी में रेड एंट्री की गई है। वहीं, 202 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। बाकी घटनाओं की तसदीक करने और मुआवजा वसूलने की प्रक्रिया जारी है। पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने बिना स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के चल रहीं 31 कंबाइनों पर 62 लाख रुपये जुर्माना किया है।
मुआवजा ही एकमात्र हल: सीएम
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सरकार ने कई कदम उठाए हैं, पर वे काफी नहीं हैं। क्योंकि ज्यादा किसानों की जमीनें पांच एकड़ से कम हैं। जिस कारण पराली का प्रबंधन करना आर्थिक तौर पर वाजिब नहीं बैठता। पिछले साल किसानों पर लगाया जुर्माना वसूलने पर रोक लगाते हुए कोर्ट ने कहा था कि बढ़ते कर्ज और आत्महत्याओं के मद्देनजर किसानों की आर्थिक मुश्किलें और न बढ़ाई जाएं।
अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि कानून के मुताबिक वातावरण को हुए नुकसान की पूर्ति के लिए कार्रवाई जारी रखी जा सकती है। इस हालत में केंद्र सरकार द्वारा मुआवजा देना ही एकमात्र हल है। इसके राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, यह हमारे लोगों के भविष्य का सवाल है। अब गेंद केंद्र के पाले में है क्योंकि बहुत राज्यों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।
वित्तीय स्थिति को जीएसटी से जोड़ने के कारण आर्थिक समस्याएं बढ़ गई हैं। धान का रकबा बढ़ने के कारण पिछले वर्षों में समस्या बढ़ी है, पिछले दो वर्षों में धान का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। किसानों को धान से वैकल्पिक फसलों की तरफ मोड़ने को उनका एमएसपी तय किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार को यह मामला अपने हाथ में लेकर सहमति बनानी चाहिए।
राजनीति कर रहे हैं केजरीवाल: कैप्टन
सीएम ने पाकिस्तान से आने वाली हवाओं और पश्चिमी चक्रवात से दिल्ली में स्मॉग के लिए पंजाब का योगदान स्वीकार किया। साथ ही कहा कि सारा दोष सिर्फ पंजाब पर मढ़ना गलत है। प्रदूषण के कारणों पर मापदंड दिल्ली में अधिक हैं। समस्या को सुलझाने के बजाय दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। वह बताएं कि इस मसले के हल के लिए जमीनी स्तर पर उन्होंने क्या किया।