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Chandigarh News: चुनावी बुखार... सरकारी संपत्ति पर स्टिकर वॉर

Sat, 22 Aug 2026 02:24 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 02:24 AM IST
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Election fever... 'Sticker war' on government property.Election fever... 'Sticker war' on government property.

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चंडीगढ़। छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित हुए अभी एक दिन ही हुआ है, लेकिन प्रचार का रंग शहर की सार्वजनिक संपत्ति पर चढ़ने लगा है। कॉलेजों के आसपास बस स्टॉप, स्ट्रीट लाइट पोल, ट्रैफिक साइन बोर्ड, स्मार्ट साइकिल स्टैंड और सार्वजनिक मैप बोर्ड छात्र संगठनों के प्रिंटेड स्टिकर से पटे नजर आ रहे हैं। एक संगठन का स्टिकर लगा नहीं कि दूसरा उससे आगे निकलने की होड़ में जुट जाता है।
मध्य मार्ग स्थित पोस्ट ग्रेजुएशन कॉलेज के सामने बस स्टॉप, स्ट्रीट लाइट पोल और स्मार्ट साइकिल स्टैंड पर अलग-अलग छात्र संगठनों के स्टिकर दिखाई दिए। सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज के बाहर दीवारों और ट्रैफिक साइन बोर्ड पर भी प्रचार सामग्री चिपकी मिली। सेक्टर-32 में एसडी कॉलेज के सामने निजी स्कूल की दीवार, रास्ता बताने वाले मैप बोर्ड और मार्केट के आसपास भी जगह-जगह स्टिकर नजर आए।
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पुराने स्टिकर पर नए का कब्जा
सेक्टर-46 की तस्वीर तो और गंभीर है। कॉलेज से दूर मार्केट के बस स्टॉप पर पिछले साल के स्टिकर अभी पूरी तरह हटे भी नहीं थे कि नए स्टिकरों ने उनकी जगह घेरनी शुरू कर दी। डिवाइडर पर लगे ट्रैफिक साइन बोर्ड भी प्रचार से ढक गए हैं। सेक्टर-26 स्थित गुरु गोबिंद सिंह खालसा कॉलेज के बाहर ट्रैफिक लाइट और दीवारों पर भी स्टिकर चिपके मिले।
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लोकतंत्र की तैयारी, शहर की बदरंगी
छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभ्यास हैं, लेकिन प्रचार के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना इसी भावना पर सवाल खड़ा करता है। लिंगदोह समिति की सिफारिशों में भी अनधिकृत प्रचार और सार्वजनिक व कॉलेज संपत्ति को नुकसान से बचने की भावना स्पष्ट है। हर साल चुनाव आते हैं, शहर की संपत्ति स्टिकरों से ढकती है, कर्मचारी उन्हें हटाते हैं और सफाई का खर्च सार्वजनिक खजाने से जाता है। सवाल यह है कि जब समस्या हर साल सामने आती है तो स्टिकर लगाने वाले की पहचान, तत्काल जुर्माना और सफाई का खर्च संबंधित संगठन से वसूलने की ठोस व्यवस्था अब तक क्यों नहीं बन पाई?
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