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30 किसान संगठनों की बैठक में फैसला, पांच नवंबर तक मालगाड़ियों के लिए खोला रेल ट्रैक

Wed, 21 Oct 2020 08:38 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 21 Oct 2020 08:38 PM IST
सार

  • चंडीगढ़ में हुई बैठक में फैसला, अब चार नवंबर को होगी 30 किसान संगठनों की बैठक
  • भाजपा नेताओं के आवास, शॉपिंग मॉल्स और पेट्रोल पंप का घेराव जारी रखेंगे किसान

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Farmer organisations agreed to vacate railway tracks for goods trains in Punjab
किसान भवन में 30 किसान संगठनों की बैठक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव पास होने के बाद आंदोलनरत किसान यूनियनों की बैठक में 30 किसान संगठनों ने एक राय होकर पांच नवंबर तक मालगाड़ियों के लिए रेलवे ट्रैक खोल दिया है। हालांकि किसान भाजपा नेताओं के आवास, शॉपिंग मॉल्स और रिलायंस पेट्रोल पंप का रणनीति के तहत घेराव जारी रखेंगे। आगे की रणनीति पर फैसला करने के लिए चार नवंबर को चंडीगढ़ में बैठक बुलाई गई है।

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किसान भवन में बुधवार को आयोजित बैठक के बाद पत्रकार वार्ता के दौरान भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल ने बताया कि बैठक में विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया है कि अभी उनके संघर्ष का पहला पड़ाव है लेकिन राज्य हितों को देखते हुए पांच नवंबर तक रेलवे ट्रैक खोल दिए जाएं। इसलिए ताकि मालगाड़ियों के जरिए राज्य में जरूरी वस्तुओं की आवाजाही हो सके।
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उन्होंने बताया कि आगे की रणनीति बनाने को बुधवार से ही रेल ट्रैक मालगाड़ियों के आवागमन के लिए खोल दिए गए हैं। लेकिन यात्री गाड़ियों को नहीं चलने दिया जाएगा। चार नवंबर को चंडीगढ़ के किसान भवन में बैठक कर अगला फैसला लिया जाएगा। 

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बैठक में पहुंचे कैबिनेट मंत्री

30 किसानों की संगठनों की बैठक में पंजाब सरकार के चार कैबिनेट मंत्री और एक विधायक भी पहुंचे। जहां उन्होंने किसान नेताओं से अलग कमरे में चर्चा की। इनमें कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, भारत भूषण आशु और विधायक कुलजीत नागरा के साथ मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार कैप्टन संदीप संधु शामिल रहे।

फैसले का कैप्टन ने किया स्वागत
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसान यूनियनों के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे राज्य की अर्थव्यवस्था और उसके पुनर्जीवन के हित में बताया है। मुख्यमंत्री ने किसान यूनियनों का धन्यवाद भी किया और कहा कि किसानों ने यह कदम उठाकर पंजाब के लोगों के प्रति अपने प्यार और संजीदगी का प्रदर्शन किया है, क्योंकि इससे राज्य को कोयले की अति अपेक्षित आपूर्ति हो सकेगी। 

उन्होंने कहा कि रेल रोको आंदोलन की वजह से कोयले की कमी हो गई गई थी। राज्य के लोग बिजली संकट का सामना कर रहे थे। किसान संगठनों का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मालगाड़ियों के चलने से राज्य में यूरिया की आपूर्ति हो सकेगी। इससे किसानों की खाद की तत्काल जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसानों से पंजाब हित में रेल ट्रैक खोलने की अपील की गई थी।

रेल पटरियों की जांच का काम शुरू: डीआरएम 
रेल डिवीजन फिरोजपुर के रेल मंडल प्रबंधक राजेश अग्रवाल ने कहा कि बुधवार रात से ही रेल पटरियों की जांच का काम शुरू कर दिया गया है ताकि गुरुवार तक मालगाड़ियां चला दी जाएं। जिन स्टेशनों पर मालगाड़ियां खड़ी हैं, वहां पर लोको पायलट और गार्ड इंजन लेकर जाएंगे।

किसानों की बैठक में जबरन घुसे रिलायंस पेट्रोल पंप मालिक, नारेबाजी

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ शॉपिंग माल और रिलायंस पेट्रोल पंप पर दिए जा रहे धरने से आक्रोशित रिलायंस पेट्रोल पंप मालिक किसानों की बैठक में जबरन घुस गए और नारेबाजी की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। हालांकि पंप मालिकों को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने किसान भवन में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

पंजाब स्थित रिलायंस पंप एसोसिएशन प्रधान आरएस पठानिया के नेतृत्व में पेट्रोल पंप मालिक किसान भवन पहुंचे। और किसानों की बैठक में वे जबरन घुस गए। सभागार में पंप मालिक विरोध में नारेबाजी करने लगे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की भी हुई। हालांकि कुछ देर बाद वरिष्ठ पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्ष शांत हुए। 



पंप मालिकों ने कहा कि किसानों के विरोध के कारण उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। वह सिर्फ डीलर मात्र हैं और कुछ नहीं। बड़ी कंपनियों को इससे कोई भी नुकसान नहीं पहुंच रहा है। किसान नेताओं ने कहा कि वह उनकी समस्या को समझते हैं, उनकी मांगों पर विचार करेंगे। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि वह नेताओं के पेट्रोल पंपों के बाहर से धरना समाप्त नहीं करेंगे।

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