यश गाथा: दुनिया से जाने के बाद भी लुधियाना के यश ने छह जिंदगियों को दी खुशी, ग्रीन कॉरिडोर से मुंबई भेजा गया दिल
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिका प्रो. विपिन कौशन का कहना है कि अंगदान की राह आसान नहीं है। इसे आसान बनाने के लिए आमजन के साथ ही धार्मिक गुरुओं व संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।
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लुधियाना के 20 वर्षीय यश पांडे ने दुनिया से जाने के बाद भी चार जिंदगियों को नया जीवन प्रदान किया है। वहीं दो लोगों को नेत्रज्योति भी दी है। एक मार्च को तीव्र रफ्तार वाहन की चपेट में आने से यश को सिर में गंभीर चोट आई। परिजनों ने उन्हें तत्काल पीजीआई में भर्ती करवाया। इलाज के दौरान 3 मार्च को पीजीआई की कमेटी ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद उनके परिजनों से अंगदान की अनुमति मिलने पर उनकी दोनों किडनी, पैनक्रियाज और दोनों आंखें पीजीआई की अंगदान की प्रतीक्षा सूची में शामिल पांच मरीजों को प्रत्यारोपित की गई है। जबकि पीजीआई में हृदय का मिलान न होने पर उसे ग्रीन कॉरिडोर के जरिये मुम्बई के अस्पताल में भर्ती एक मरीज के लिए भेजा गया।
अंगदाता परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए पीजीआई के प्रभारी निदेशक प्रो. सुरजीत सिंह ने कहा कि उस परिवार ने यह संदेश दिया है कि अपने दु:ख को दरकिनार कर दूसरों के उपकार के भाव को प्रधानता देनी चाहिए। क्योंकि उस क्षण लिया गया एक निर्णय कई लोगों की जिंदगी बदलने में सहायक साबित हो सकता है। अपने प्रिय के अंगदान का निर्णय उस परिवार के मजबूत इरादों को प्रदर्शित करता है।
बेटे ने अपना नाम किया सार्थक
यश के पिता मनोज कुमार पांडे ने अंगदान का निर्णय लेकर कहा कि मेरे बेटे ने दुनिया से जाते हुए भी अपने नाम को सार्थक किया है। उसके अंगदान से 6 लोगों के जीवन में खुशियां लौटेंगी। इस दुख की घड़ी में यही हमारे लिए सांत्वना है। हमें इस बात का संतोष है कि हमारा बेटा अंगदान के जरिये दुनिया से जाकर भी जिंदा रहेगा।
सबका मिले साथ तो बने बात
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिका प्रो. विपिन कौशन का कहना है कि अंगदान की राह आसान नहीं है। इसे आसान बनाने के लिए आमजन के साथ ही धार्मिक गुरुओं व संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। अवधारणा बदलने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है। क्योंकि धीरे-धीरे विचारधारा में बदलाव आना शुरू हो गया है।
चंद घंटों में दिल पहुंचा मुम्बई
प्रो. कौशल ने बताया कि अंगदान से मिले दिल का पीजीआई के किसी मरीज से क्रास मैच न होने के कारण उसकी सूचना आस-पास के प्रदेशों को दी गई। मुम्बई के एचएन रिलायंस अस्पताल में रिफेक्टरी हार्ट फैल्योर के एक मरीज से मैच हो गया। जिसके बाद चंडीगढ़ व मोहाली पुलिस और ट्रैफिक विभाग के सहयोग से दिल ने 4 मार्च की दोपहर 12.25 बजे मुम्बई के लिए उड़ान भरी।