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बच्चों को स्कूल भेजने के लिए परिजनों ने घंटों लाइन में लग बहाया पसीना

Mon, 04 Apr 2022 01:39 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 04 Apr 2022 01:39 AM IST
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Family members sweat in queues for hours to send children to school
चंडीगढ़। शहर के ज्यादातर स्कूल सोमवार से खुल जाएंगे। अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अच्छे स्कूल में दाखिले के बाद परिजनों को किताबों के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ा। तेज धूप में कभी गलत लाइन में लग गए तो फिर सही लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार किया। किताबों का सेट हाथ में आने के बाद परिजनों के चेहरे पर ऐसी खुशी थी मानो कोई बड़ी जंग जीत ली हो।
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वहीं, पीछे लगे परिजनों के माथे पर किताबों के स्टॉक खत्म होने की चिंता साफ देखी जा सकती थी। कोरोनाकाल के बाद शहर के पूरी तरह से ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने जा रहे हैं। पहले स्कूल में प्रवेश की मशक्कत और फिर किताबों व ड्रेस के लिए जद्दोजहद परिजनों के लिए समस्या का सबब बनी। शहर के साथ ही मोहाली, डेराबस्सी, पंचकूला से परिजन सुबह ही दुकानों के बाहर आकर खड़े हो गए। दुकानों पर शुरू किए गए टोकन सिस्टम के कारण लाइनें भी सड़कों तक लगी थीं। सबसे बड़ी समस्या लोगों के सामने चुनिंदा दुकानों की थी, जहां पर ही स्कूल की किताबें और ड्रेस मिल रही हैं। ऐसे में भीड़ भी इन्हीं दुकानों पर देखने को मिल रही है।
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चुनिंदा दुकानों पर ही मिल रही हैं किताबें
किताबें खरीदने आ रहे लोगों की शिकायत है कि जिस स्कूल में उनका बच्चा पढ़ रहा है उसकी किताबें हर बुक शॉप पर नहीं मिलती हैं। सेक्टर-19, 22, 7 व इंडस्ट्रियल एरिया की चुनिंदा दुकानों पर ही स्कूलों की किताबें मिल रहीं हैं। लोगों को लाइन में लगकर घंटों इंतजार के बाद किताबें खरीदना मजबूरी हो गई है। दुकानों के बाहर खड़े लोगों ने बताया कि शनिवार को भी उन्हें किताबें लेने के लिए चार से पांच घंटे धूप में लाइन लगाकर खड़े रहना पड़ा। उनका नंबर आने पर पता चलता है कि किताबों का स्टॉक खत्म हो गया है। अधिकतर दुकानों पर स्कूलों के हिसाब से लाइन लगी थी।
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चुनिंदा किताबें चाहिए तो 7 अप्रैल के बाद आइये
लोगों का कहना है कि दुकानदार वर्तमान में कक्षाओं के हिसाब से पाठ्यक्रम का पूरा सेट ही उपलब्ध करवा रहे हैं। किसी कक्षा की कोई चुनिंदा किताब चाहिए तो लोगों को मायूस होकर जाना पड़ता है। ऐसे में लोगों को कहा जाता है कि या तो दुकानदार को फुर्सत मिलने का इंतजार करिए या फिर सात अप्रैल के बाद आकर किताबें लेने आइये।
स्कूल ड्रेस की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि
स्कूल ड्रेस बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि स्कूल की ड्रेस तैयार करने के लिए आवश्यक कच्चा माल पहले से अधिक कीमत पर मिल रहा है। इसके कारण ड्रेस की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जो ड्रेस पहले 600 रुपये में आती थी, उसके लिए अब 650 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।
बातचीत:-
चुनिंदा किताबें भी उपलब्ध करवा रहे हैं
ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ पाठ्य सामग्री का पूूरा सेट ही दे रहे हैं। दो दिन से भीड़ बहुत है। इसके चलते जिन्हें एक दो किताबें लेनी हैं, उनको समस्या न हो इसलिए उन्हें सात अप्रैल के बाद आने का अनुुरोध किया जा रहा है। - सुभीर पुरी, पुस्तक विक्रेता, सेक्टर-22
कपड़ा मंहगा आ रहा है तो कीमत बढ़ी
स्कूल की वर्दी बनाने का कपड़ा पहले से मंहगा आ रहा है। इसके चलते कीमतों में कुछ वृद्धि हुई है। बाकी लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। -अश्वनी कुमार, स्कूल यूनिफॉर्म विक्रेता
किताबें आसानी से और हर जगह मिलनी चाहिए
शिक्षा सुगम और व्यवस्थित होनी चाहिए। किताबें लेने मुझे जीरकपुर से सेक्टर-19 आना पड़ा है। सुबह 11 बजे से लाइन में लगकर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन 2 बजे तक नंबर नहीं आया है। - जितिंदर, निवासी, जीरकपुर

किताबें खरीदने जाना जंग लड़ने से कम नहीं
किताबें हर दुकानदार के पास होती तो समस्या नहीं आती, लेकिन सिर्फ चुनिंदा दुकानदारों पर ही किताबें मिल रही हैं। लाइन में लगकर धक्के खाने पड़ रहे हैं। समझ नहीं आता सरकार इस समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दे रही है। - मनीष सोनी, पीयू
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