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इंसानियत हुई शर्मसार, नहीं मिली एंबुलेंस तो बाइक रेहड़ी में ले गए शव, इलाज नहीं मिलने से मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला कैंट(हरियाणा)
Updated Fri, 05 Oct 2018 09:21 AM IST
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बाइक रेहड़ी में ले गए शव
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इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना, पहले तो डॉक्टर छुट्टी पर। इलाज नहीं मिला तो मौत हो गई, फिर एंबुलेंस नहीं मिली और शव को बाइक रेहड़ी में घर लेकर आना पड़ा। ये हाल है स्वास्थ्य मंत्री के अपने शहर में करोड़ों की लागत से बने सिविल अस्पताल का। हरियाणा में अंबाला कैंट में यह घटना देखने को मिली।
करोड़ों की लागत से बना सिविल अस्पताल जहां एक मरीज की जिंदगी तक नहीं बचा पाया, वहीं मौत के बाद भी शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिली। प्राइवेट एंबुलेंस ने भी इंसानियत को दरकिनार करते हुए शव ले जाने के लिए 1500 से 2000 रुपये की डिमांड की। परिजनों के पास इतने रुपये नहीं थे कि एंबुलेंस चालक को दे पाते, तो वे बाइक रेहड़ी पर शव ले जाने को मजबूर हो गए।
अंबाला कैंट के तोपखाना के रहने वाले मुन्ना लाल (55) को बुधवार रात अचानक पेट में दर्द हो गया। परिजन उसे अंबाला कैंट के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पर डॉक्टरों ने मरीज को उपचार दिया और अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। उपचार के बाद मरीज को आराम नहीं आया। सुबह जब अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहुंचे तो देखा कि लैब में ताला लगा हुआ है। क्योंकि रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ललित सैनी एक माह की छुट्टी पर गए हैं और अस्पताल प्रशासन की तरफ कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
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मरीज की हालत नहीं सुधरी तो डॉक्टर ने फिर से इलाज किया, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ। कहीं और ले जाने के लिए परिजन मरीज को लेकर बाहर आए तो वह बेहोश होकर गिर गया। उसे दोबारा सिविल अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया, इस वजह से मौत हुई।
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करोड़ों की लागत से बना सिविल अस्पताल जहां एक मरीज की जिंदगी तक नहीं बचा पाया, वहीं मौत के बाद भी शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिली। प्राइवेट एंबुलेंस ने भी इंसानियत को दरकिनार करते हुए शव ले जाने के लिए 1500 से 2000 रुपये की डिमांड की। परिजनों के पास इतने रुपये नहीं थे कि एंबुलेंस चालक को दे पाते, तो वे बाइक रेहड़ी पर शव ले जाने को मजबूर हो गए।
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अंबाला कैंट के तोपखाना के रहने वाले मुन्ना लाल (55) को बुधवार रात अचानक पेट में दर्द हो गया। परिजन उसे अंबाला कैंट के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पर डॉक्टरों ने मरीज को उपचार दिया और अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। उपचार के बाद मरीज को आराम नहीं आया। सुबह जब अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए पहुंचे तो देखा कि लैब में ताला लगा हुआ है। क्योंकि रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ललित सैनी एक माह की छुट्टी पर गए हैं और अस्पताल प्रशासन की तरफ कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
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मरीज की हालत नहीं सुधरी तो डॉक्टर ने फिर से इलाज किया, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ। कहीं और ले जाने के लिए परिजन मरीज को लेकर बाहर आए तो वह बेहोश होकर गिर गया। उसे दोबारा सिविल अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया, इस वजह से मौत हुई।
परिजनों ने किया हंगामा
बाइक रेहड़ी में ले गए शव
मुन्ना लाल की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। परिजनों ने कहा कि करोड़ों रुपये की इमारत खड़ी कर दी गई है, जबकि सुविधाएं नाममात्र की नहीं हैं। यदि समय पर अल्ट्रासाउंड हो जाता तो पता चल जाता कि मरीज को क्या बीमारी है। इसके अलावा भी चिकित्सकों ने इलाज में लापरवाही बरती है।
एंबुलेंस ने मांगे 2000 रुपये
परिजन शव को ले जाने के लिए सिविल अस्पताल प्रशासन से एंबुलेंस की डिमांड करने लगे, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। फिर परिजनों ने अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस से संपर्क किया तो उसने 1500 से 2000 रुपये की डिमांड की। इतनी राशि परिजनों के पास नहीं थी, इसलिए बाद में बाइक रेहड़ी में शव को लेकर परिजन घर के लिए रवाना हुए।
एंबुलेंस ने मांगे 2000 रुपये
परिजन शव को ले जाने के लिए सिविल अस्पताल प्रशासन से एंबुलेंस की डिमांड करने लगे, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। फिर परिजनों ने अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस से संपर्क किया तो उसने 1500 से 2000 रुपये की डिमांड की। इतनी राशि परिजनों के पास नहीं थी, इसलिए बाद में बाइक रेहड़ी में शव को लेकर परिजन घर के लिए रवाना हुए।