Haryana Municipal Election: निकाय चुनाव में भी कांग्रेस में हावी रही गुटबाजी, सुरजेवाला ने किया प्रचार, भूपेंद्र हुड्डा, सैलजा ने नहीं संभाला मोर्चा
चुनाव नतीजों पर कुलदीप बिश्नोई ने ट्वीट किया कि सिर्फ खंजर ही नहीं मुझे आंखों में पानी चाहिए। हे प्रभु, दुश्मन भी मुझको खानदानी चाहिए। फ्री हैंड के रुझान आने हुए शुरू हुए। ना राज्यसभा जीत पाए और अब ये। मैं तो पहले ही कहता था कि दुकान में माल कोनी।
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हरियाणा में अंतर्कलह के कारण राज्यसभा की एक सीट गंवा चुकी कांग्रेस ने फिलहाल कोई सबक नहीं सीखा है। निकाय चुनाव में भी गुटबाजी चरम पर रही। 18 नगर परिषद और 28 नगरपालिकाओं के अध्यक्ष पद पर कई जगह कांग्रेस के तीन, चार-चार उम्मीदवार उतर गए। इससे काफी जगह नुकसान हुआ और बाजी विरोधी मार ले गए।
अगर पार्टी चिह्न पर चुनाव लड़ती तो पंचायत और भविष्य में और निकायों में होने वाले चुनाव और 2024 के चुनावी दंगल के लिए संजीवनी मिलती। साथ ही शहरी मतदाताओं का जनादेश भी पता चल जाता। निर्दलीयों को समर्थन देकर कांग्रेस ने सिर्फ खानापूर्ति की। निकाय चुनाव में कांग्रेस दिग्गजों ने प्रचार में मोर्चा संभाला ही नहीं।
कांग्रेस महासचिव व राज्यसभा सदस्य रणदीप सुरजेवाला ने ही प्रचार किया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा सरीखे दिग्गज कहीं नहीं दिखे। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष उदयभान के गृह क्षेत्र होडल में भी कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार बृजभूषण नहीं जीत सके, वह तीसरे स्थान पर रहे। नपा और नप चेयरमैन बनने के लिए सभी दिग्गजों के समर्थक मैदान में उतर गए, जिनकी नाम वापसी के लिए भी कोई प्रयास नहीं हुआ।
कांग्रेस के लिए आने वाले चुनावों में यह नुकसानदायक साबित हो सकता है। चूंकि, पार्टी जिस तरह से गुटों में बंटी हुई है और एक-दूसरे का कांटा राजनीति में निकालने का काम चल रहा है, उससे 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत की राह आसान नहीं होगी। हुड्डा खेमे को फ्री हैंड मिलने से बाकी धड़ों के नेता अंदरखाने नाराज चल रहे हैं।
विधायक कुलदीप बिश्नोई ने तो खुले तौर पर मोर्चा खोल रखा है। समय रहते बड़े नेता एकजुट नहीं हुए तो आठ साल से सत्ता से दूर कांग्रेस को आगामी चुनावों में मुंह की खानी पड़ सकती है। कालका में पूर्व चेयरमैन विजय बंसल, पवन कुमारी, नवदीप शर्मा तीनों कांग्रेस चेयरमैन पद के लिए मैदान में उतरे थे, तीनों हार गए। भाजपा ने बाजी मार ली। पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने विजय बंसल का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी ने पवन कुमारी के लिए मोर्चा संभाला था। असंध में राजेंद्र उर्फ रॉकी मट्टू व सतीश कटारिया दोनों कांग्रेस के ही निर्दलीय उम्मीदवार थे, हालांकि सतीश जीत गए।
चुनाव नतीजों पर कुलदीप का ट्वीट
सिर्फ खंजर ही नहीं मुझे आंखों में पानी चाहिए। हे प्रभु, दुश्मन भी मुझको खानदानी चाहिए। फ्री हैंड के रुझान आने हुए शुरू हुए। ना राज्यसभा जीत पाए और अब ये। मैं तो पहले ही कहता था कि दुकान में माल कोनी।
कांग्रेस के पास चुनाव लड़ने वालों की लंबी फौज: उदयभान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदय भान ने कहा कि नगर पालिका और नगर परिषद चुनाव को लेकर कांग्रेस का रुख स्पष्ट था। पार्टी यह चुनाव नहीं लड़ने का फैसला ले चुकी थी। ऐसे में कांग्रेस की हार या जीत की बात करने वाले जानबूझकर गलत प्रचार कर रहे हैं। 1-1 वार्ड में कांग्रेस के 4-4, 5-5 कार्यकर्ता चुनाव लड़ रहे थे, क्योंकि कांग्रेस के पास स्थानीय इकाई का चुनाव लड़ने वाले कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है।
एक-एक वार्ड से कई-कई कार्यकर्ता चुनाव लड़ने का दम रखते हैं। भाजपा-जेजेपी या अन्य दलों के पास एक-एक वार्ड में बमुश्किल एक-एक कार्यकर्ता ऐसा है जो चुनाव लड़ने की स्थिति में है इसलिए ये पार्टियां बिना किसी संकोच के एक कार्यकर्ता को एक वार्ड का टिकट दे सकती हैं। कांग्रेस छोटी इकाई के लिए किसी एक कार्यकर्ता को पार्टी का टिकट देकर बाकी कार्यकर्ताओं को नाराज नहीं करना चाहती।
बहुत सोच समझकर नेतृत्व ने नगर पालिका और नगर परिषद का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया था। साथ ही कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने की पूर्ण आजादी दी थी ताकि वे अपने स्तर पर लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा ले सकें। इस रेस में भाजपा-जेजेपी अकेली दौड़ रही थीं। बावजूद इसके वे क्लीन स्वीप नहीं कर पाईं। कांग्रेस और उसके बड़े नेताओं की नजर विधानसभा और लोकसभा पर है, हार-जीत का असली फैसला तभी होगा।