{"_id":"65cb55f35382d67b49068699","slug":"faces-of-first-line-of-farmer-leaders-fought-under-united-kisan-morcha-two-years-ago-have-changed-2024-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान आंदोलन-2: इस बार चेहरे भी बदले और मांगें भी, 32 के स्थान पर 50 किसान संगठन संघर्ष में जुटे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान आंदोलन-2: इस बार चेहरे भी बदले और मांगें भी, 32 के स्थान पर 50 किसान संगठन संघर्ष में जुटे
Wed, 14 Feb 2024 10:04 AM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 14 Feb 2024 10:04 AM IST
सार
2020 में किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, बलवीर सिंह राजेवाल, उगराहां बीकेयू लखोवाल, जमहूरी किसान सभा, बीकेयू डकोंदा के दोनों गुट, क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉ. दर्शनपाल, ऑल इंडिया किसान सभा के नेता नदारद हैं। इन्होंने इस बार आंदोलन से दूरी बना ली है।
विज्ञापन
किसान नेता
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दो साल पहले संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले संघर्ष करने वाले किसान नेताओं की पहली कतार में अब जहां चेहरे बदल गए हैं वहीं, मांगें भी नई उठ गई हैं। पंजाब के प्रमुख किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल, डॉ. दर्शनपाल, जोगिंदर सिंह उगराहां समेत कई चेहरे पहली कतार से नदारद हैं और इस बार कमान जगजीत सिंह डल्लेवाल, सरवण सिंह पंधेर और बीकेयू क्रांतिकारी ने संभाल ली है।
पहले 32 किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले संघर्ष किया था, अब 50 के करीब संगठनों ने अपना-अलग गुट तैयार कर मंगलवार से संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। 2020-21 में किसानों की 32 यूनियन संयुक्त किसान मोर्चा यानी एसकेएम के तहत एक बैनर के तले आई थीं जो अब टूट कर एसकेएम (पंजाब), एसकेएम (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा बन गई हैं।
इस बार जगजीत सिंह डल्लेवाल का संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं और दोनों ही संगठन पूर्व में एसकेएम का हिस्सा रहे हैं। किसान मजदूर मोर्चा 18 किसानों का समूह है जिसके संयोजक सरवण सिंह पंधेर हैं। दोनों ही समूहों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और यूपी के किसान शामिल हैं।
विज्ञापन
दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में कृषि संगठन बीकेयू (एकता सिद्धूपुर) ने छोटे समूहों को साथ लिया और एक समानांतर संगठन एसकेएम (गैर-राजनीतिक) का गठन किया, इसमें हरियाणा, राजस्थान, एमपी के किसान समूह भी शामिल हैं। इसने किसान मजदूर मोर्चा के साथ हाथ मिलाया और दिल्ली चलो 2.0 के आह्वान के साथ अमृतसर और बरनाला में रैलियां कीं। जगजीत सिंह डल्लेवाल पहले संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा रहे हैं लेकिन बाद में उन्होंने बलबीर सिंह राजेवाल के साथ मिलकर चार अलग संगठन बना लिए।
गुरनाम सिंह चढूनी समेत कई प्रमुख चेहरे अलग
2020 में किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, बलवीर सिंह राजेवाल, उगराहां बीकेयू लखोवाल, जमहूरी किसान सभा, बीकेयू डकोंदा के दोनों गुट, क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉ. दर्शनपाल, ऑल इंडिया किसान सभा के नेता नदारद हैं। इन्होंने इस बार आंदोलन से दूरी बना ली है दरअसल, दो साल में, किसान संगठनों के विभाजित होने और नए गठबंधन बनने के साथ उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। कृषि कानूनों को निरस्त करने के बाद दिसंबर 2021 में किसानों के घर वापस लौटने के बाद कृषि समूहों के बीच नए संयोजन और विभाजन सामने आए।
किसानों की मांगें बदली..
किसान एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए 'न्याय' की भी मांग कर रहे हैं। दिल्ली आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की भी मांग है। किसानों की तरफ से जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
एसकेएम के टुकड़े-टुकड़े हुए, नए गुट बने...
किसान आंदोलन, जिसमें शुरू में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 32 संघ शामिल थे, अब अलग-अलग संस्थाओं एसकेएम (पंजाब), एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा में विभाजित हो गया है। इसके अलावा, एसकेएम के तहत 22 यूनियनों ने 25 दिसंबर, 2021 को पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के इरादे से संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) का गठन किया। बलबीर सिंह राजेवाल ने एसएसएम का नेतृत्व ग्रहण किया। हालांकि, पंजाब के तीन प्रमुख किसान संगठनों - बीकेयू (एकता उगराहां), बीकेयू (एकता सिद्धूपुर) और बीकेयू (एकता डकौंदा) ने एसएसएम में शामिल नहीं होने का फैसला किया। इसके गठन के कुछ समय बाद ही कई संगठन एसएसएम से अलग होने लगे। जैसे ही चुनाव लड़ने के फैसले का उल्टा असर हुआ, एसएसएम ने गति खो दी और घटकर पांच कृषि समूह रह गए। राजेवाल के नेतृत्व वाला यह गुट आखिरकार 15 जनवरी, 2024 को एसकेएम में विलय हो गया। इसी तरह, हरियाणा में, किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी ने एक और पार्टी, संयुक्त संघर्ष पार्टी की स्थापना की।
हमारे साथ वादे किए थे, पूरे नहीं किए : डल्लेवाल
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का कहना है कि केंद्र सरकार ने आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए जो वादे किए थे, वो पूरे नहीं किए गए हैं। चाहे न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का वचन हो या फिर पिछले आंदोलन के समय किसानों पर किए मुकदमों को वापस लेने का वादा। हमारे साथ वादाखिलाफी हुई है, हमारी एकजुटता कायम है।
विज्ञापन
पहले 32 किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले संघर्ष किया था, अब 50 के करीब संगठनों ने अपना-अलग गुट तैयार कर मंगलवार से संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। 2020-21 में किसानों की 32 यूनियन संयुक्त किसान मोर्चा यानी एसकेएम के तहत एक बैनर के तले आई थीं जो अब टूट कर एसकेएम (पंजाब), एसकेएम (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा बन गई हैं।
विज्ञापन
इस बार जगजीत सिंह डल्लेवाल का संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं और दोनों ही संगठन पूर्व में एसकेएम का हिस्सा रहे हैं। किसान मजदूर मोर्चा 18 किसानों का समूह है जिसके संयोजक सरवण सिंह पंधेर हैं। दोनों ही समूहों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और यूपी के किसान शामिल हैं।
विज्ञापन
दरअसल, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में कृषि संगठन बीकेयू (एकता सिद्धूपुर) ने छोटे समूहों को साथ लिया और एक समानांतर संगठन एसकेएम (गैर-राजनीतिक) का गठन किया, इसमें हरियाणा, राजस्थान, एमपी के किसान समूह भी शामिल हैं। इसने किसान मजदूर मोर्चा के साथ हाथ मिलाया और दिल्ली चलो 2.0 के आह्वान के साथ अमृतसर और बरनाला में रैलियां कीं। जगजीत सिंह डल्लेवाल पहले संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा रहे हैं लेकिन बाद में उन्होंने बलबीर सिंह राजेवाल के साथ मिलकर चार अलग संगठन बना लिए।
गुरनाम सिंह चढूनी समेत कई प्रमुख चेहरे अलग
2020 में किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी, बलवीर सिंह राजेवाल, उगराहां बीकेयू लखोवाल, जमहूरी किसान सभा, बीकेयू डकोंदा के दोनों गुट, क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉ. दर्शनपाल, ऑल इंडिया किसान सभा के नेता नदारद हैं। इन्होंने इस बार आंदोलन से दूरी बना ली है दरअसल, दो साल में, किसान संगठनों के विभाजित होने और नए गठबंधन बनने के साथ उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। कृषि कानूनों को निरस्त करने के बाद दिसंबर 2021 में किसानों के घर वापस लौटने के बाद कृषि समूहों के बीच नए संयोजन और विभाजन सामने आए।
किसानों की मांगें बदली..
किसान एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, पुलिस मामलों को वापस लेने और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए 'न्याय' की भी मांग कर रहे हैं। दिल्ली आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की भी मांग है। किसानों की तरफ से जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।
एसकेएम के टुकड़े-टुकड़े हुए, नए गुट बने...
किसान आंदोलन, जिसमें शुरू में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 32 संघ शामिल थे, अब अलग-अलग संस्थाओं एसकेएम (पंजाब), एसकेएम (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा में विभाजित हो गया है। इसके अलावा, एसकेएम के तहत 22 यूनियनों ने 25 दिसंबर, 2021 को पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने के इरादे से संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) का गठन किया। बलबीर सिंह राजेवाल ने एसएसएम का नेतृत्व ग्रहण किया। हालांकि, पंजाब के तीन प्रमुख किसान संगठनों - बीकेयू (एकता उगराहां), बीकेयू (एकता सिद्धूपुर) और बीकेयू (एकता डकौंदा) ने एसएसएम में शामिल नहीं होने का फैसला किया। इसके गठन के कुछ समय बाद ही कई संगठन एसएसएम से अलग होने लगे। जैसे ही चुनाव लड़ने के फैसले का उल्टा असर हुआ, एसएसएम ने गति खो दी और घटकर पांच कृषि समूह रह गए। राजेवाल के नेतृत्व वाला यह गुट आखिरकार 15 जनवरी, 2024 को एसकेएम में विलय हो गया। इसी तरह, हरियाणा में, किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी ने एक और पार्टी, संयुक्त संघर्ष पार्टी की स्थापना की।
हमारे साथ वादे किए थे, पूरे नहीं किए : डल्लेवाल
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का कहना है कि केंद्र सरकार ने आंदोलन खत्म करने की अपील करते हुए जो वादे किए थे, वो पूरे नहीं किए गए हैं। चाहे न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का वचन हो या फिर पिछले आंदोलन के समय किसानों पर किए मुकदमों को वापस लेने का वादा। हमारे साथ वादाखिलाफी हुई है, हमारी एकजुटता कायम है।