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गजब कारनामाः सफर फर्स्ट क्लास काम थर्ड क्लास, एसी कोचों में चोरी हो रहे हजारों फेस टॉवल

Thu, 09 May 2019 02:29 PM IST
खुशबू गोयल दीपक शाही/अमर उजाला, जीरकपुर
दीपक शाही/अमर उजाला, जीरकपुर Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 09 May 2019 02:29 PM IST
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Face Towel Thievery from AC Coaches of Trains, Indian Railway
फेस टॉवल
ट्रेनों के एसी कोचों में से फेस टॉवल चोरी होने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा अंबाला मंडल के एक्सप्रेस ट्रेनों के यात्रियों को दिए जाने वाले बेड रोल के चोरी होने वाले आंकड़ों से हुआ है। वैसे तो आम आदमी ट्रेनों के स्लीपर कोच में यात्रा करता है। एक खास तबके और आर्थिक रूप से मजबूत लोग ही ट्रेनों के वातानुकूलित कोचों में सफर करते हैं, लेकिन उनकी नीयत भी टावल, चादर व कंबल जैसी मामूली चीजों पर खराब होने लगी है। रेल अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2017 से अप्रैल 2019 तक चंडीगढ़, अंबाला, कालका मिलाकर करीब 50 हजार बेड रोल (कंबल, चादर, तौलिए) से जुड़े आइटम चोरी हुए हैं।
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सबसे ज्यादा शिरडी और चंडीगढ़ बांद्रा एक्सप्रेस में चोरी
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा बेड रोल आइटम की चोरी चंडीगढ़ से चलने वाली चंडीगढ़-बांद्रा एक्सप्रेस और कालका से चलने वाली शिरडी एक्सप्रेस में होती है। रेल अधिकारियों की मानें तो कालका से चलने वाली मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में जनवरी 2017 से अप्रैल 2019 तक कुल 2830 और चंडीगढ़ से चलने वाली ट्रेनों में अप्रैल 2017 से अप्रैल 2019 तक करीब 15546 फेस टावल चोरी हुए हैं। वहीं अंबाला से दिल्ली से आगे लंबे रूट की ट्रेनों में यह आंकड़ा करीब 30 हजार पार कर चुका है।
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आपकी एक गलती की सजा अटेंडेंट को भुगतनी पड़ रही

लग्जरी सफर का आनंद लेने वाले मेल एक्सप्रेस ट्रेनों के यात्रियों की एक गलती की कीमत चार से पांच हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कांट्रेक्ट पर तैनात मुलाजिम को चुकानी पड़ती है। जैसे ही कोच से टावल, चादर या फिर कंबल चोरी होता है तो कोच में तैनात अटेंडेंट की सैलरी से ठेकेदार उसकी कीमत काट लेता है। इससे ट्रेनों के अटेंडेंट परेशान हैं। चंडीगढ़ के मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में चलने वाले अटेंडेंट ने नाम नहीं छपने की शर्त पर बताया कि अकसर टावल चोरी होने के बाद उनकी तनख्वाह से राशि काट ली जाती है। ऐसे में उन्हें पैसों की भरपाई के लिए ट्रेनों में पानी बेचने से लेकर कई दूसरे काम भी करने पड़ते हैं।

जल्द सफर के दौरान टावल की जगह नैपकिन दिया जाएगा
वैकल्पिक तौर पर रेलवे ने तौलिए की जगह यात्रियों को डिस्पोजेबल नैपकिन देने का फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद इसे जल्दी ही मेल, एक्सप्रेस, स्लीपर क्लास, एसी कोच में यात्रियों को सफर के दौरान दिया जाएगा। नैपकिन के लिए रेलवे की ओर से आर्डर दिया जा चुका है। इस नई व्यवस्था के तहत रेलवे ने 50 फीसदी काटन और 50 फीसदी बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल का बना डिस्पोजेबल नैपकिन वातानुकूलित बोगी के यात्रियों में उपलब्ध करवाने का फैसला लिया है। इसकी लंबाई 40 सेंटीमीटर व चौड़ाई 30 सेंटीमीटर होगी। रेलवे को इस डिस्पोजेबल नैपकिन की 3.53 रुपये की लागत आएगी।

यहां भी गड़बड़ी

- कई बार एक अटेंडेंट ही दूसरे अटेंडेंट को परेशान करने के लिए कोच से बेडरोल गायब कर देते हैं।
- एसी कोच में चढ़ने वाले अनाधिकृत लोग भी कंबल चोरी कर लेते हैं।
- कंबल की धुलाई के दौरान भी इनमें गड़बड़ी की जाती है, लेकिन इसे रिकॉर्ड में नहीं लेते।
- चादर गंदी होने या फिर फट जाने के बाद इन्हें गायब कर देते हैं और चोरी होना बता देते हैं।

यह भी नियम
- बेड रोल में रखे, कंबल, चादर, पिलो, टावल पर बार कोड होंगे।
- इसके साथ कंबल, चादर, पिलो, टावल पर नंबर भी होंगे।
- एसी कोच की जिस सीट पर बेडरोल दिया जाएगा, उसका पीएनआर नोट होगा।
- पीएनआर के सामने बेडरोल का बार कोड लिखा जाएगा।
- पीएनआर पर 6 यात्री हैं तो सभी की बेडरोल की सुरक्षा की जिम्मेदारी होगी।
- गायब होने पर जिस व्यक्ति के नाम पर पीएनआर होगा उससे हर्जाना लिया जाएगा।

क्या कहना है अधिकारियों का
नॉर्दर्न रेलवे के पीआरओ दीपक ने बताया कि ट्रेनों में टावल चोरी को रोकने के लिए जल्द वातानुकूलित कोचों में नैपकिन दिया जाएगा।
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