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देश के इस हॉस्पिटल में शुरू हुआ आंखों कैंसर का इलाज, बहुत कम पैसे देने होंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 08 Jul 2017 03:12 PM IST
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देश के इस मशहूर हॉस्पिटल में आंखों के कैंसर का इलाज शुरू किया जा चुका है और यहां पर इलाज के लिए बहुत कम फीस देनी पड़ेगी। चंडीगढ़ में सेक्टर 32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कालेज एंड (जीएमसीएच) में आंखों के कैंसर का इलाज शुरू हो गया है। सोमवार को सांसद किरण खेर व स्वास्थ्य सचिव अनुराग अग्रवाल ने ट्रीटमेंट सेंटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर किरण खेर ने ब्रेकीथैरेपी कांप्लेक्स का दौरा किया। मेडिकल कालेज के डायरेक्टर-प्रिंसिपल प्रोफेसर जनमेजा ने किरण खेर को प्रोजेक्ट की जानकारी दी।
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सरकारी अस्पतालों में एम्स के बाद पूरे उत्तर भारत में मेडिकल कालेज में इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इस मौके पर होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन इस प्रोजेक्ट पर पूरा सहयोग करेगा। नेत्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सुदेश आर्या ने बताया कि आंखों में होने वाले कैंसर का नाम रेटिनोब्लास्टोमा है। भारत में रेटिनोब्लास्टोमा 15000 से 18000 जीवित जन्मे बच्चों में से एक को होता है। इसका मुख्य वजह केसों का रिपोर्ट न होना है। इस सुविधा से हर साल एक हजार से ज्यादा रोगी लाभान्वित होंगे।
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आंखों के कैंसर में डाक्टरों की प्राथमिकता रोगियों के जीवन को बचाना होता है। सुविधाओं की कमी के कारण अधिकांश केंद्रों में रोगी को बचाने के लिए उनकी आंखे निकाल देते हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के निरंतर प्रयासों से आज यह प्रोजेक्ट शुरू हो पाया है। ट्रीटमेंट सेंटर में करीब दो करोड़ रुपये का खर्च आया है। यह देश का पहला ऐसा सेंटर है, जिसे एटामिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) ने मंजूरी दी है। साथ ही भामा एटोमिक रिसर्च सेंटर आयोडीन के 125 बीज मुफ्त देने में सहमति जताई है।
इस तकनीक से किया जाएगा इलाज
पहले रेटिना कैंसर के इलाज में सिर्फ लोगों की जान बचती थी, लेकिन आंखों की रोशनी को बचाना मुश्किल होता था। मगर अब ऐसा नहीं है। अब इलाज के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जैसे कि कीमोथैरेपी, लेजर थैरेपी और ब्रैकीथैरेपी। जीएमसीएच 32 में ब्रैकीथैरेपी से इलाज किया जाएगा। कीमोथैरेपी व लेजर थैरेपी के मुकाबले यह काफी सस्ती है। यह बहुत ही कम दूरी के रेडियोथैरेपी का इलाज है।
इलाज नहीं होने पर बाकी शरीर में पहुंचता है कैंसर
रेटिना कैंसर का इलाज वक्त पर नहीं होने से कैंसर दिमाग और हड्डियों में पहुंच जाता है। बीमारी बढ़ने पर आंखें बाहर निकल आती है। पुतली का हिस्सा सफेद होता है। इलाज में देरी से आंखों की रोशनी भी जा सकती है और जान का खतरा बनता है। बीमारी का पता लगते ही सर्जरी की आवश्यकता होती है। सर्जरी से कैंसर को हटा दिया जाता है।