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PGI चंडीगढ़ में नया प्रयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कमाल, गंभीर मरीजों का इलाज होने लगा आसान

Wed, 31 Aug 2022 04:24 PM IST
ajay kumar वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 31 Aug 2022 04:24 PM IST
सार

डाटा बैंक डिसीजन के फार्मूले पर तैयार किए गए इस योजना में पीजीआई के लगभग सभी विभागों के 6000 मरीजों का आंकड़ा पूरी डिटेल के साथ एकत्रित किया जा चुका है। ऐसे में इसकी मदद से अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञ गंभीर मरीजों के इलाज में मदद ले रहे हैं।

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Experts at PGI Chandigarh are taking help of Artificial Intelligence for treatment
पीजीआई चंडीगढ़

विस्तार

चंडीगढ़ पीजीआई में गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए विशेषज्ञ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ले रहे हैं। यह तकनीक पीजीआई में पिछले चार वर्षों के दौरान इलाज करा चुके 6000 गंभीर मरीजों के इलाज की तकनीक से लैस है। इसमें अलग-अलग बीमारियों से जूझ रहे गंभीर मरीजों के इलाज में प्रयोग किए गए दवा व अन्य महत्वपूर्ण निर्णय को शामिल किया गया है ताकि उसका आकलन कर मौजूदा डॉक्टर नए मरीजों के इलाज की राह को आसान बना सके। 

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चार वर्षों के दौरान किए गए अथक परिश्रम का फल मिलने लगा है। इस तकनीक का प्रयोग कर पीजीआई के ज्यादातर विभागों के विशेषज्ञ गंभीर मरीजों के इलाज से जुड़े निर्णय आसानी से लेने लगे हैं। पीजीआई एनेस्थीसिया विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. जीडी पुरी ने बताया कि इस तकनीक का सबसे ज्यादा लाभ आईसीयू में भर्ती मरीजों के लाइव सेविंग, डेथ और दवा की डोज संबंधित आकलन में मिल रही है। 
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वही पीजीआई जैसे संस्थान में जहां प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज कराने आते हैं, वहां बेड की उपलब्धता संबंधी जानकारी भी इस तकनीक के आधार पर प्राप्त की जा सकती है क्योंकि इससे हम मरीज के भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक का भी अनुमान लगा सकते हैं। 

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हजारों मरीजों का उदाहरण बन रहा सहायक
डाटा बैंक डिसीजन के फार्मूले पर तैयार किए गए इस योजना में पीजीआई के लगभग सभी विभागों के 6000 मरीजों का आंकड़ा पूरी डिटेल के साथ एकत्रित किया जा चुका है। ऐसे में इसकी मदद से अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञ गंभीर मरीजों के इलाज में मदद ले रहे हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के पीजीआई के सीनियर रिसर्च फेलो व इस योजना पर प्रो पुरी के निर्देश पर काम कर रहे सुशांत कुमार ने बताया कि डाटा में फीड हजारों तरह के गंभीर मरीजों का उदाहरण देखकर के डॉक्टर अपने मरीजों की मौजूदा स्थिति का आकलन करते हैं। इस तकनीक में अलग-अलग मरीजों की उम्र, हाइट, वजन व शारीरिक संरचना के आधार पर जानकारी फीड की गई है जिससे आने वाले समय में मरीज के इलाज में प्रयोग किए जाने वाले चिकित्सा तकनीक व दवाओं के डोज का उचित मूल्यांकन करने में ज्यादा परेशानी ना हो। 

ऑपरेशन थियेटर में लगा सिस्टम
सुशांत कुमार ने बताया कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत पीजीआई की ओटी में कंप्यूटर सभी एनेस्थीसिया मशीन से कनेक्ट कर दी गई है जिससे सर्जरी के दौरान की जाने वाली सभी प्रक्रिया, यहां तक कि मरीज को दी जाने वाली दवा तक की डिटेल कंप्यूटर में फीड होती जाती है। उस कंप्यूटर को सर्वर से जोड़ा गया है। वहीं इस सारी डिटेल को ऑटोमेटिक और मैनुअल तरीके से कंप्यूटर में फीड किया जाता है। जिससे अब तक 6000 मरीजों का अलग-अलग डाटा रिस्टोर हो चुका है। जिसमें पीजीआई के अलग-अलग विभागों से जुड़े मरीज शामिल हैं।

सुपर कम्प्यूटर के साथ मिलकर हो रहा काम
इस योजना को आगे और सफल बनाने के लिए मौजूदा समय में पीजीआई सुपर कंप्यूटर के साथ मिलकर परम युक्ति पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि पीजीआई ने चार साल पहले इंफोसिस के साथ मिलकर यह काम शुरू किया था। इसके लिए नेशनल सुपर कंप्यूटर मिशन के तहत फंडिंग की जा रही है।
 

पीजीआई में एनेस्थीसिया इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम को लेकर चार साल पहले जो परिकल्पना की गई थी वह धीरे धीरे साकार होने लगा है। इस तकनीक की मदद से गंभीर मरीजों के इलाज में काफी मदद मिलने लगी है। इससे इलाज की राह और आसान होगी। -प्रो. जीडी पुरी, पीजीआई के पूर्व डीन एकेडमिक व एनेस्थीसिया विभाग के पूर्व प्रमुख। 

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