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आम बजट 2016: जेटली से बस एक आस, टैक्स छूट का दायरा बढ़े
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 29 Feb 2016 08:54 AM IST
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली आज आम बजट पेश करेंगे। बजट पर जहां उद्योगपतियों, आम आदमी और गृहणियों की नए टैक्स का बोझ न पड़े इस पर खास नजर रहेगी, वहीं रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारी, स्वास्थ्य और कोचिंग स्टडीज से जुड़े प्रोफेशनल्स भी राहत की उम्मीद में हैं।
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सरकार किस-किसको राहत देगी और किस-किस मद में टैक्स बढ़ने की संभावना है इस पर भी आम से लेकर खास सबकी नजर होगी।
जल्द से जल्द लागू हो जीएसटी
टैक्स मामलों के एक्सपर्ट्स सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द से जल्द गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू करे। जीएसटी लागू होने से देशभर में एक समान टैक्स लगेगा। इससे जहां आम जनता को राहत मिलने की संभावना है, वहीं व्यापारियों को भी अलग-अलग तरह के टैक्स भरने के झंझट से राहत मिलेगी।
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कर से छूट का दायरा बढ़े
वर्तमान में देश में सालाना 2.5 लाख रुपये तक की कमाई पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है। वहीं 2.70 लाख रुपये की कमाई पर लगने वाले 2000 रुपये का टैक्स भी सरकार की ओर से माफ है। इसके बाद 2.5 से 5 लाख तक की सालाना कमाई पर 10 फीसदी और उससे ऊपर 10 लाख तक 20 फीसदी कर लगता है।
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इससे ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है। आयकर मामलों के एक्सपर्ट और एडवोकेट हितेश पुरी के अनुसार देश में जैसे लोगों के सैलरी पैकेज बढ़ रहे हैं, उसके अनुसार टैक्स स्लैब सिस्टम में एक लाख रुपये तक की छूट बढ़ाए जाने की संभावना है। इसके अलावा कामकाजी महिलाओं को आय पर टैक्स में 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त छूट मिलने की अपेक्षा है।
अमित मित्तल, डायरेक्टर, माया गार्डन के अनुसार होम लोन पर दिए जाने वाले ब्याज पर टैक्स में मिलने वाली सब्सिडी की राशि अगर बढ़ाई जाती है तो इससे रियल एस्टेट इंडस्ट्री पर भी काफी असर पड़ेगा। इसकी वर्तमान लिमिट 2 लाख रुपये हैं। उम्मीद है कि सरकार इसे 3 लाख रुपये तक कर दे। इससे सरकार की 2022 तक हर व्यक्ति का अपना घर होने की योजना को भी साकार रूप मिलेगा। इसके अलावा होम लोन पर ब्याज कम होना चाहिए।
करण ग्रोवर, डायरेक्टर ऑडी ने बताया कि ऑटो इंडस्ट्री को बूम मिले, इसके लिए सरकार को एक्साइज ड्यूटी कम करनी चाहिए। इसके अलावा वैट भी काफी बढ़ चुका है। लग्जरी कारों पर टैक्स ज्यादा होते हैं, जिसमें थोड़ी रियायत दी जानी चाहिए। कार लोन पर ब्याज कम हो तो आम लोगों के साथ ही इंडस्ट्री को भी फायदा होगा।
चंदर वर्मा, इंडस्ट्रियलिस्ट के मुताबिक सरकार को ‘मेक इन इंडिया’ को सफल बनाने के लिए उद्योग जगत की सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करना चाहिए, ताकि उद्योगपति सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की बजाय उद्योग पर ध्यान दे सकें।
आरके महाजन, डायरेक्टर, ब्राइट अकेडमी का कहना है कि कोचिंग और अन्य तरह के इंस्टीट्यूट्स के लिए सरकार को टैक्स संबंधी मामलों में राहत देनी चाहिए। इससे टैक्स का बोझ कम होने से इंस्टीट्यूट संचालक गरीब और प्रतिभावान बच्चों को निशुल्क सुविधा दे सकेंगे।
गुरप्रीत सिंह हैप्पी, सरपंच दड़वा और प्रधान पेंडू संघर्ष कमेटी चंडीगढ़ के मुताबिक गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए उचित बजट दिया जाना चाहिए। लाल डोरा से बाहर बने मकानों की बेहतर व्यवस्था के लिए विशेष फंड की आस है।
डॉ. हुकम चंद, प्रधान सरपंच एसोसिएशन चंडीगढ़ ने बताया कि आज भी देश की काफी आबादी गांव में रहती है। इसलिए सरकार को गांव के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नई योजनाएं बननी चाहिए और उसके लिए अलग से बजट कोष बनाना चाहिए।
कुलजीत सिंह संधू, सरपंच गांव धनास ने बतासा कि गांव के विकास का एजेंडा प्रशासन को भेज दिया गया है। अब देखना है कि गांव के विकास पर क्या होता है। आस है कि गांव के विकास के लिए प्रयास इस बजट में देखने को मिलेगा।
मोहिंदर कौर, सरपंच गांव बहलाना ने बताया कि गांव में पीने के पानी, रोड गली, सीवरेज व्यवस्था के लिए अलग से कोष बनें। गांव-गांव तक सरकारी योजनाएं मुहैया हों। इसके लिए विशेष प्रोजेक्ट बनाना चाहिए।