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Hindi News ›   Chandigarh ›   Even strict laws against drugs do not give license to trample constitutional rights: High Court

Highcourt: 27 बार गवाही देने नहीं पहुंचे पुलिसकर्मी, पंजाब सरकार पर अविश्वास जता NDPS के आरोपी को जमानत

Sat, 12 Jul 2025 07:22 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 12 Jul 2025 07:22 PM IST
सार

अदालत ने याचिकाकर्ता को जमानत प्रदान करते हुए पंजाब के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में अभियोजन पक्ष के पुलिस गवाह समय पर अदालत में पेश हों।

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Even strict laws against drugs do not give license to trample constitutional rights: High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नशा तस्करी से जुड़े मामले में नियमित जमानत की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नशा समाज के ताने-बाने को दीमक की तरह चाट रही है लेकिन अपराध की गंभीरता और नशे के खिलाफ सख्त कानून भी सांविधानिक अधिकारों को कुचलने का लाइसेंस नहीं देता। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के मामले में आरोपी को जमानत दे दी।
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आरोप के अनुसार फगवाड़ा निवासी कुलदीप से 1.540 किलोग्राम ट्रामाडोल की गोलियां बरामद हुई थीं। आरोपी पिछले 2 वर्ष और 3 महीने से न्यायिक हिरासत में था। मार्च 2023 में आरोप तय हुए लेकिन अब तक 16 में से सिर्फ 3 गवाहों की ही गवाही हो सकी है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष के शेष सभी गवाह पुलिसकर्मी हैं जो बार-बार समन, जमानती और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं हुए। यह स्थिति 27 बार की सुनवाई में दोहराई गई है।
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लापरवाही बर्दाश्त करने योग्य नहीं

पंजाब सरकार इसका कोर्ट को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। केवल यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया कि अब गवाह हर तारीख पर पेश होंगे लेकिन हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर अविश्वास जताया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से जो झलक रहा है, वह अभियोजन पक्ष के गवाहों की लापरवाही है। साथ ही कहा कि इस तरह की लापरवाही पुलिस अधिकारियों की तरफ से हो रही है जो कानून के रखवाले हैं। यह चिंताजनक है और बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।
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न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग

कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की गति और निष्पक्षता, संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह विशेष कानूनों जैसे एनडीपीएस एक्ट पर भी समान रूप से लागू होता है। अदालत ने याचिकाकर्ता को जमानत प्रदान करते हुए पंजाब के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और सुनिश्चित करें कि भविष्य में अभियोजन पक्ष के पुलिस गवाह समय पर अदालत में पेश हों। कोर्ट ने इस आदेश की कॉपी गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व डीजीपी को भेजने के भी आदेश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन की लापरवाही के चलते किसी आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए हिरासत में रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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